सावन के दूसरे सोमवार पर काशी विश्वनाथ में उमड़े भक्त, गंगा 2 सेमी/घंटे की रफ्तार से बढ़ी; ड्रोन-NDRF तैनात
सारांश
मुख्य बातें
वाराणसी में सावन के दूसरे सोमवार (10 अगस्त) को श्री काशी विश्वनाथ धाम में हजारों श्रद्धालुओं और कांवड़ियों का सैलाब उमड़ पड़ा। ब्रह्म मुहूर्त से ही दशाश्वमेध घाट पर गंगाजल लेने के लिए भक्तों की लंबी कतारें लग गईं, जबकि मंदिर परिसर में मंगला आरती और जलाभिषेक के दौरान फूलों की वर्षा की गई। इसी बीच पहाड़ी क्षेत्रों में जारी भारी वर्षा के कारण गंगा का जलस्तर प्रति घंटे 2 सेमी की दर से बढ़ रहा है, जिससे सभी 84 घाटों तक पहुँचने के रास्ते बाधित हो गए हैं।
मंदिर में भव्य श्रृंगार और जलाभिषेक
सावन के इस पावन अवसर पर काशी विश्वनाथ धाम को फूलों से भव्य रूप से सजाया गया। मंगला आरती के दौरान भक्तों और कांवड़ियों पर पुष्पवर्षा की गई। दशाश्वमेध घाट से जल लेकर मंदिर की ओर बढ़ रहे एक श्रद्धालु ने बताया, 'हम दशाश्वमेध घाट से जल लेकर काशी विश्वनाथ मंदिर जा रहे हैं। सुरक्षा व्यवस्था अच्छी है।'
कांवड़िए राहुल चतुर्वेदी ने जानकारी दी कि उनका दल यहाँ से पैदल कुनौरा महादेव मंदिर की ओर प्रस्थान करेगा और अगले दिन सुबह तक वहाँ पहुँचने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा, 'हर साल हम महादेव को जल अर्पित करते हैं। यहाँ की व्यवस्था बहुत अच्छी है।'
गंगा का बढ़ता जलस्तर: घाटों तक रास्ते बंद
उत्तर भारत के पहाड़ी इलाकों में लगातार हो रही वर्षा का असर अब वाराणसी में भी साफ दिखने लगा है। दशाश्वमेध घाट के पुजारी विवेकानंद पांडे ने बताया, 'गंगा का जलस्तर हर दिन लगभग दो से तीन फीट बढ़ रहा है। जलस्तर बढ़ने के कारण पूरा रास्ता बंद कर दिया गया है।' उन्होंने यह भी बताया कि गंगा आरती की जगह बदलनी पड़ी है और अब आरती पिछली निर्धारित जगह से 15-20 फीट ऊपर की जा रही है। यह ऐसे समय में आया है जब लाखों श्रद्धालु सावन के शेष सोमवारों में भी दर्शन के लिए काशी आने वाले हैं।
सुरक्षा के व्यापक इंतजाम: ड्रोन, NDRF और जल पुलिस तैनात
बढ़ते जलस्तर और भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की है। मंदिर और घाटों के आसपास ड्रोन से निगरानी की जा रही है। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की टीमें और जल पुलिस किसी भी आपात स्थिति में त्वरित सहायता के लिए तैनात की गई हैं।
डीआईजी शिव हरि मीणा ने बताया, 'आज सावन का दूसरा सोमवार है। वाराणसी पुलिस और प्रशासन की कोशिशों से पहला सोमवार भी सफलतापूर्वक संपन्न हुआ था। दूसरे सोमवार के लिए भी हमने वही रणनीति अपनाई है।' उन्होंने आगे जानकारी दी कि सेक्टर और ज़ोनल सिस्टम लागू किया गया है, कई स्थानों पर बैरियर लगाए गए हैं और फोर्स को पूरी तरह ब्रीफ किया गया है।
आम जनता और श्रद्धालुओं पर असर
गंगा के बढ़ते जलस्तर के कारण 84 घाटों तक पहुँचने के सामान्य मार्ग बाधित हो गए हैं, जिससे श्रद्धालुओं को वैकल्पिक रास्तों से जाना पड़ रहा है। गौरतलब है कि सावन में काशी में बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है, और जलस्तर के इस रुझान को देखते हुए प्रशासन अगले सोमवारों के लिए भी सतर्क बना हुआ है। आने वाले दिनों में जलस्तर की स्थिति और मौसम पर सभी की नज़र टिकी रहेगी।