21 अक्टूबर 2026
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कोटा में दुर्गा विसर्जन के दौरान नाव पलटी, चंबल नहर में चार बच्चे लापता; SDRF NDRF की तलाश जारी

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कोटा में दुर्गा विसर्जन के दौरान नाव पलटी, चंबल नहर में चार बच्चे लापता; SDRF NDRF की तलाश जारी

सारांश

कोटा में दुर्गा विसर्जन के दौरान चंबल की राइट मेन कैनाल में नाव पलटने से चार बच्चे लापता हैं। तीन लोग तैरकर बचे। प्रतिबंधित नाव के उपयोग की बात सामने आई है। SDRF, NDRF और गोताखोर रात भर तलाश में जुटे हैं।

मुख्य बातें

20 अक्टूबर 2026 की शाम कोटा की चंबल राइट मेन कैनाल में दुर्गा विसर्जन के दौरान नाव पलटी।
नाव में सवार 7 लोगों में से 3 तैरकर बचे; 4 बच्चे अभी भी लापता हैं।
मंत्री मदन दिलावर ने बताया कि प्रतिबंधित असुरक्षित नाव का उपयोग किया गया था।
SP तेजस्विनी गौतम ने पुष्टि की कि SDRF, NDRF , सिविल डिफेंस और स्थानीय गोताखोर खोज में लगे हैं।
घटना बोरखेड़ा थाना क्षेत्र की है; पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

राजस्थान के कोटा जिले में मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 की शाम दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान एक दर्दनाक हादसा हो गया, जब 80 फीट रोड पर स्टील ब्रिज के निकट चंबल नदी की राइट मेन कैनाल में सात लोगों को ले जा रही नाव बीच नहर में पलट गई। हादसे में चार बच्चे लापता हो गए और उनके डूबने की आशंका जताई जा रही है। राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और स्थानीय गोताखोरों की टीमें रात को भी बचाव अभियान में जुटी हैं।

घटनाक्रम: कैसे हुआ हादसा

यह घटना बोरखेड़ा थाना क्षेत्र में हुई। दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के लिए लोग किशोर सागर से निकलने वाली नहर पर पहुँचे थे। सात लोग एक नाव में सवार होकर विसर्जन के लिए रवाना हुए, लेकिन नहर के बीचोबीच पहुँचते ही नाव अचानक पलट गई। नाविक सहित तीन व्यक्ति तैरकर किनारे तक पहुँचने में सफल रहे, जबकि शेष चार बच्चे — जिन्हें तैरना नहीं आता था — नहर की गहराई में समा गए।

हादसे की सूचना मिलते ही मौके पर अफरा तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने तत्काल प्रशासन को सूचित किया, जिसके बाद बचाव दलों को बड़े पैमाने पर तैनात किया गया।

बचाव अभियान: कौन कौन सी टीमें मैदान में

लापता बच्चों की खोज के लिए SDRF, NDRF, नगर निगम और सिविल डिफेंस की टीमें संयुक्त रूप से अभियान चला रही हैं। स्थानीय गोताखोरों की भी सहायता ली जा रही है। बचाव दल नहर में गहरे पानी में खोजबीन कर रहे हैं।

कोटा की पुलिस अधीक्षक (SP) तेजस्विनी गौतम ने बताया कि जिन तीन लोगों को तैरना आता था, वे स्वयं निकलने में कामयाब रहे, लेकिन बाकी चार को तैरना नहीं आता था। उन्होंने कहा कि बचाव अभियान लगातार जारी है और टीमें गहन खोज कर रही हैं।

मंत्री मदन दिलावर की प्रतिक्रिया

राजस्थान सरकार में मंत्री मदन दिलावर ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि "त्योहार के दिन इस दुखद घटना से परिवारों में शोक छा गया है।" मंत्री ने यह भी बताया कि विसर्जन के लिए सात लोग एक असुरक्षित नाव में सवार हुए थे, जबकि ऐसी नाव का उपयोग प्रतिबंधित है। यह जानकारी प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

आम जनता पर असर और सुरक्षा का सवाल

गौरतलब है कि यह हादसा तब हुआ जब पूरे देश में नवरात्रि और दशहरे के आसपास विसर्जन का माहौल रहता है। प्रतिबंधित नाव के उपयोग की बात सामने आने के बाद स्थानीय प्रशासन की तैयारियों और विसर्जन घाटों पर निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब राजस्थान में त्योहारी भीड़ के दौरान नदियों और नहरों के किनारे सुरक्षा इंतजाम की बार बार माँग होती रही है।

लापता बच्चों के परिजन घाट पर मौजूद हैं और बचाव टीमों के नतीजों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, नहर की गहराई और प्रवाह के कारण बचाव कार्य चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

आगे क्या होगा

बचाव दल रात भर खोज अभियान जारी रखेंगे। प्रशासन ने कहा है कि हादसे के कारणों और प्रतिबंधित नाव के उपयोग की जाँच की जाएगी। बोरखेड़ा पुलिस मामले की जाँच कर रही है। आने वाले घंटों में बचाव अभियान के नतीजे स्थिति को और स्पष्ट करेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि त्योहारी विसर्जन के दौरान देशभर में नदी नहर सुरक्षा की पुरानी अनदेखी का नतीजा है। मंत्री खुद स्वीकार कर रहे हैं कि प्रतिबंधित नाव का उपयोग हुआ — यह सवाल उठाता है कि घाट पर तैनात प्रशासन और पुलिस कहाँ थी। हर साल विसर्जन के मौसम में ऐसी दुर्घटनाएँ होती हैं और हर बार दुख जताने के बाद जवाबदेही की बात ठंडी पड़ जाती है। जब तक विसर्जन घाटों पर नाव पात्रता जाँच और जीवन रक्षक उपकरणों की अनिवार्यता को कड़ाई से लागू नहीं किया जाता, ये नुकसान होते रहेंगे।
RashtraPress
21 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोटा नाव हादसा कब और कहाँ हुआ?
यह हादसा 20 अक्टूबर 2026 की शाम कोटा के 80 फीट रोड पर स्टील ब्रिज के पास चंबल नदी की राइट मेन कैनाल में हुआ। दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान नाव नहर के बीच में पलट गई।
कितने लोग लापता हैं और बचाव में कौन जुटा है?
नाव में सवार सात लोगों में से तीन तैरकर सुरक्षित निकल आए, जबकि चार बच्चे अभी भी लापता हैं। SDRF, NDRF, नगर निगम, सिविल डिफेंस और स्थानीय गोताखोर संयुक्त बचाव अभियान चला रहे हैं।
मंत्री मदन दिलावर ने हादसे पर क्या कहा?
मंत्री मदन दिलावर ने घटना पर गहरा दुख जताया और कहा कि विसर्जन के लिए लोग एक प्रतिबंधित असुरक्षित नाव में सवार हुए थे। उन्होंने इसे त्योहार के दिन परिवारों के लिए अत्यंत दुखद बताया।
SP तेजस्विनी गौतम ने बचाव अभियान के बारे में क्या जानकारी दी?
कोटा की SP तेजस्विनी गौतम ने बताया कि नाव में सवार जिन तीन लोगों को तैरना आता था वे खुद बाहर निकल आए, लेकिन बाकी चार को तैरना नहीं आता था। उन्होंने कहा कि SDRF और सिविल डिफेंस की टीमें लगातार खोज में जुटी हैं।
इस हादसे में प्रतिबंधित नाव का उपयोग क्यों हुआ?
मंत्री मदन दिलावर के बयान के अनुसार, विसर्जन के लिए इस्तेमाल की गई नाव असुरक्षित श्रेणी की थी और ऐसी नावों का उपयोग प्रतिबंधित है। बोरखेड़ा पुलिस इस पहलू समेत पूरे मामले की जाँच कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
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