भारत फ्रांस या अल्बानिया नहीं, लोकतंत्र और गवर्नेंस अटल: सांसद संतोष पांडे
सारांश
मुख्य बातें
राजनांदगांव (छत्तीसगढ़) से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद संतोष पांडे ने 20 अक्टूबर 2026 को कवर्धा में कहा कि भारत न फ्रांस है, न अल्बानिया, न श्रीलंका और न बांग्लादेश — यहाँ लोकतंत्र और शासन व्यवस्था बेहद मज़बूत है। उन्होंने यह वक्तव्य राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत की उस टिप्पणी के समर्थन में दिया, जो फ्रांस और अल्बानिया में हुई हिंसक घटनाओं के संदर्भ में की गई थी।
भागवत की टिप्पणी पर सांसद का समर्थन
सांसद पांडे ने कहा कि आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने जो बात कही, वह सत्य है। उनके अनुसार, भारत न अल्बानिया है, न फ्रांस, न श्रीलंका का कोलंबो और न ही नेपाल का काठमांडू — और निश्चित रूप से बांग्लादेश जैसी स्थिति भारत में संभव नहीं। उन्होंने कहा, "यहाँ की सुरक्षा व्यवस्था और गुड गवर्नेंस पर कोई उंगली नहीं उठा सकता।" पांडे ने जोड़ा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की अर्थव्यवस्था निरंतर आगे बढ़ रही है।
उन्होंने कथित तौर पर विदेशी फंडिंग से चलने वाले उन तत्वों को चेतावनी दी, जो भारत में दंगे जैसी स्थिति का सपना देख रहे हैं। उनके अनुसार, ऐसे लोगों को यह भ्रम छोड़ देना चाहिए।
कांग्रेस पर बैठक बहिष्कार का आरोप
सांसद पांडे ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस / INC) पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, "जब भी बैठक बुलाई जाती है तो कभी बहिष्कार करते हैं, कभी अनुपस्थित रहते हैं, बैठक की उपेक्षा और अवहेलना करते हैं। वास्तव में जब बैठक हो तो उसमें आना चाहिए।" पांडे के अनुसार कांग्रेस लंबे समय से कई महत्वपूर्ण बैठकों की अवहेलना करती आई है।
यह आरोप ऐसे समय में आया है जब विपक्ष और सत्ताधारी दल के बीच संसदीय प्रक्रियाओं को लेकर तनाव पहले से बना हुआ है।
भारत न्यूज़ीलैंड मुक्त व्यापार समझौते पर प्रतिक्रिया
भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच लागू हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर पांडे ने कहा कि शून्य प्रतिशत ड्यूटी के प्रावधान से दोनों देशों के बीच व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। उन्होंने इसे दोनों राष्ट्रों के परस्पर हित में बताया।
विजयादशमी पर संदेश
विजयादशमी के अवसर पर सांसद पांडे ने भगवान राम को सदाचार की अत्याचार पर विजय का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा, "रावण कितना भी बलवान, धनवान और विद्या में निपुण क्यों न हो, यदि चरित्र न हो तो सब व्यर्थ है।" उन्होंने अपने क्षेत्रवासियों को विजयादशमी पर्व की शुभकामनाएँ दीं।
गौरतलब है कि यह बयान विजयादशमी के दिन कवर्धा में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान दिया गया, जो आरएसएस की स्थापना और उसके वार्षिक उत्सव के लिहाज़ से भी प्रतीकात्मक महत्व रखता है। आने वाले दिनों में इन बयानों पर विपक्ष की प्रतिक्रिया राजनीतिक बहस को और तेज़ कर सकती है।