सनातन धर्म से भारत में सहिष्णुता और सह-अस्तित्व — भाजपा प्रवक्ता विनुशा ने मोहन भागवत के बयान का समर्थन किया
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) की प्रवक्ता विनुशा ने 3 अक्टूबर 2026 को कुरनूल में कहा कि सनातन धर्म के मूल्य ही भारत की सामाजिक और सांस्कृतिक व्यवस्था की नींव हैं और देश की रक्षा के लिए धर्म की रक्षा अनिवार्य है। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के उस बयान का समर्थन किया जिसमें भागवत ने कहा था कि अगर धर्म संकट में होगा तो देश भी संकट में होगा।
भागवत के बयान पर विनुशा की प्रतिक्रिया
विनुशा ने कहा कि मोहन भागवत की यह बात तथ्यात्मक रूप से सही है। उनके अनुसार, भारत ने सदियों से सनातन परंपराओं का पालन किया है, जिनमें सहिष्णुता, प्रकृति के सम्मान और सभी समुदायों के प्रति आदर की भावना निहित है। उन्होंने कहा कि इन्हीं मूल्यों के कारण भारत में विभिन्न धर्मों और समुदायों के लोग सम्मान के साथ रह सके।
यहूदी और पारसी समुदाय का उदाहरण
विनुशा ने यहूदी और पारसी समुदायों का उल्लेख करते हुए कहा कि जिन समुदायों ने दुनिया के अन्य हिस्सों में ऐतिहासिक उत्पीड़न झेला, उन्हें भारत में सुरक्षित वातावरण मिला। उन्होंने आगे कहा कि आज भी बौद्ध, सिख, ईसाई और मुस्लिम समुदाय भारत में रहते हैं और देश की विविधता इसका जीवंत प्रमाण है।
पड़ोसी देशों से तुलना
विनुशा ने अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश का उदाहरण देते हुए कहा कि ये तीनों देश कभी भारतीय उपमहाद्वीप का हिस्सा रहे हैं, लेकिन वर्तमान में वहाँ हिंदू आबादी अत्यंत कम रह गई है। उन्होंने इन देशों की मौजूदा परिस्थितियों को भारत से भिन्न बताते हुए कहा कि वहाँ शांति, सुरक्षा और विकास से जुड़ी गंभीर चुनौतियाँ मौजूद हैं।
संविधान, लोकतंत्र और धार्मिक विविधता
विनुशा ने कहा कि भारत में संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था के साथ-साथ धार्मिक विविधता भी मौजूद है, और इसे सनातन परंपरा से अलग नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार, भारत की संस्कृति में सहिष्णुता, प्रकृति के सम्मान और मिलकर रहने की भावना को बनाए रखना आवश्यक है, क्योंकि इन्हीं मूल्यों से देश की सामाजिक विविधता और सह-अस्तित्व की परंपरा मजबूत हुई है।
राजनीतिक परिप्रेक्ष्य
गौरतलब है कि मोहन भागवत का मूल बयान राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है, और BJP नेताओं द्वारा उसका समर्थन इस बहस को और व्यापक बना रहा है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब सनातन धर्म को लेकर राजनीतिक विमर्श तेज हो रहा है। आने वाले समय में विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया इस चर्चा को नई दिशा दे सकती है।