3 अक्टूबर 2026
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सनातन धर्म से भारत में सहिष्णुता और सह-अस्तित्व — भाजपा प्रवक्ता विनुशा ने मोहन भागवत के बयान का समर्थन किया

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सनातन धर्म से भारत में सहिष्णुता और सह-अस्तित्व — भाजपा प्रवक्ता विनुशा ने मोहन भागवत के बयान का समर्थन किया

सारांश

BJP प्रवक्ता विनुशा ने कुरनूल में RSS प्रमुख मोहन भागवत के उस बयान का समर्थन किया जिसमें कहा गया था कि धर्म संकट में होगा तो देश भी संकट में होगा। उन्होंने सनातन धर्म को भारत की सहिष्णुता और सह-अस्तित्व की परंपरा का आधार बताया और पड़ोसी देशों से तुलना कर अपनी बात रखी।

मुख्य बातें

BJP प्रवक्ता विनुशा ने 3 अक्टूबर 2026 को कुरनूल में RSS प्रमुख मोहन भागवत के बयान का समर्थन किया।
विनुशा ने कहा कि सनातन धर्म के मूल्य — सहिष्णुता, प्रकृति का सम्मान, सह-अस्तित्व — भारत की सामाजिक संरचना की नींव हैं।
यहूदी और पारसी समुदायों का उदाहरण देते हुए कहा कि उत्पीड़ित समुदायों को भारत में सुरक्षित आश्रय मिला।
अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिंदू आबादी के घटने का उल्लेख कर भारत से तुलना की।
विनुशा ने कहा कि देश की रक्षा के लिए सनातन धर्म के मूल्यों की रक्षा करना आवश्यक है।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) की प्रवक्ता विनुशा ने 3 अक्टूबर 2026 को कुरनूल में कहा कि सनातन धर्म के मूल्य ही भारत की सामाजिक और सांस्कृतिक व्यवस्था की नींव हैं और देश की रक्षा के लिए धर्म की रक्षा अनिवार्य है। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के उस बयान का समर्थन किया जिसमें भागवत ने कहा था कि अगर धर्म संकट में होगा तो देश भी संकट में होगा।

भागवत के बयान पर विनुशा की प्रतिक्रिया

विनुशा ने कहा कि मोहन भागवत की यह बात तथ्यात्मक रूप से सही है। उनके अनुसार, भारत ने सदियों से सनातन परंपराओं का पालन किया है, जिनमें सहिष्णुता, प्रकृति के सम्मान और सभी समुदायों के प्रति आदर की भावना निहित है। उन्होंने कहा कि इन्हीं मूल्यों के कारण भारत में विभिन्न धर्मों और समुदायों के लोग सम्मान के साथ रह सके।

यहूदी और पारसी समुदाय का उदाहरण

विनुशा ने यहूदी और पारसी समुदायों का उल्लेख करते हुए कहा कि जिन समुदायों ने दुनिया के अन्य हिस्सों में ऐतिहासिक उत्पीड़न झेला, उन्हें भारत में सुरक्षित वातावरण मिला। उन्होंने आगे कहा कि आज भी बौद्ध, सिख, ईसाई और मुस्लिम समुदाय भारत में रहते हैं और देश की विविधता इसका जीवंत प्रमाण है।

पड़ोसी देशों से तुलना

विनुशा ने अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश का उदाहरण देते हुए कहा कि ये तीनों देश कभी भारतीय उपमहाद्वीप का हिस्सा रहे हैं, लेकिन वर्तमान में वहाँ हिंदू आबादी अत्यंत कम रह गई है। उन्होंने इन देशों की मौजूदा परिस्थितियों को भारत से भिन्न बताते हुए कहा कि वहाँ शांति, सुरक्षा और विकास से जुड़ी गंभीर चुनौतियाँ मौजूद हैं।

संविधान, लोकतंत्र और धार्मिक विविधता

विनुशा ने कहा कि भारत में संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था के साथ-साथ धार्मिक विविधता भी मौजूद है, और इसे सनातन परंपरा से अलग नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार, भारत की संस्कृति में सहिष्णुता, प्रकृति के सम्मान और मिलकर रहने की भावना को बनाए रखना आवश्यक है, क्योंकि इन्हीं मूल्यों से देश की सामाजिक विविधता और सह-अस्तित्व की परंपरा मजबूत हुई है।

राजनीतिक परिप्रेक्ष्य

गौरतलब है कि मोहन भागवत का मूल बयान राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है, और BJP नेताओं द्वारा उसका समर्थन इस बहस को और व्यापक बना रहा है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब सनातन धर्म को लेकर राजनीतिक विमर्श तेज हो रहा है। आने वाले समय में विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया इस चर्चा को नई दिशा दे सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी पुनरावृत्ति संकेत देती है कि यह विमर्श चुनावी दृष्टि से अभी भी प्रासंगिक माना जा रहा है। पड़ोसी देशों का उदाहरण तथ्यात्मक रूप से आंशिक सत्य है — हिंदू अल्पसंख्यकों की स्थिति चिंताजनक अवश्य है, लेकिन उसे भारत की आंतरिक धार्मिक नीति का औचित्य बनाना एक सरलीकरण है। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूकती है वह यह है कि सनातन-सहिष्णुता की यही दलील विपक्षी आलोचकों द्वारा उन घटनाओं के संदर्भ में चुनौती दी जाती है जहाँ अल्पसंख्यक समुदायों ने असुरक्षा महसूस की है — इस अंतर्विरोध पर खुली बहस ही लोकतंत्र की असली कसौटी होगी।
RashtraPress
3 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

BJP प्रवक्ता विनुशा ने मोहन भागवत के किस बयान का समर्थन किया?
विनुशा ने RSS प्रमुख मोहन भागवत के उस बयान का समर्थन किया जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर धर्म संकट में होगा तो देश भी संकट में होगा। विनुशा ने इसे सही ठहराते हुए कहा कि सनातन धर्म के मूल्यों से ही भारत में सहिष्णुता और सह-अस्तित्व की परंपरा कायम है।
विनुशा ने सनातन धर्म को भारत की सहिष्णुता से कैसे जोड़ा?
विनुशा ने कहा कि सनातन परंपराओं में सहिष्णुता, प्रकृति का सम्मान और सभी के प्रति आदर की भावना निहित है। उन्होंने यहूदी और पारसी समुदायों का उदाहरण देते हुए कहा कि उत्पीड़न का सामना करने वाले इन समुदायों को भारत में सुरक्षित वातावरण मिला।
विनुशा ने पड़ोसी देशों का उल्लेख क्यों किया?
विनुशा ने अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश का उदाहरण देते हुए कहा कि ये देश कभी भारतीय उपमहाद्वीप का हिस्सा थे, लेकिन अब वहाँ हिंदू आबादी बहुत कम रह गई है। उन्होंने इन देशों की परिस्थितियों को भारत से भिन्न बताते हुए सनातन धर्म की भूमिका को रेखांकित किया।
क्या यह बयान किसी राजनीतिक विवाद से जुड़ा है?
मोहन भागवत का मूल बयान राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है और BJP नेताओं का समर्थन इसे और व्यापक बना रहा है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब सनातन धर्म को लेकर राजनीतिक विमर्श तेज हो रहा है।
विनुशा के अनुसार भारत में धार्मिक विविधता की स्थिति कैसी है?
विनुशा ने कहा कि भारत में संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था के साथ-साथ बौद्ध, सिख, ईसाई और मुस्लिम समेत सभी समुदाय सम्मान से रहते हैं। उनके अनुसार यह विविधता सनातन परंपरा की सहिष्णुता का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
राष्ट्र प्रेस
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