8 अक्टूबर 2026
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महिला पुलिसकर्मी से धक्का-मुक्की पर BJP के आरपी सिंह का विपक्ष पर कड़ा हमला

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महिला पुलिसकर्मी से धक्का-मुक्की पर BJP के आरपी सिंह का विपक्ष पर कड़ा हमला

सारांश

जंतर-मंतर पर इंडिया ब्लॉक के प्रदर्शन के दौरान महिला पुलिसकर्मी से कथित धक्का-मुक्की पर BJP प्रवक्ता आरपी सिंह ने विपक्ष की कड़ी आलोचना की। उन्होंने 'अघोषित आपातकाल' के आरोप को खारिज किया और राहुल गांधी के राजघाट धरने पर भी सवाल उठाए।

मुख्य बातें

BJP प्रवक्ता आरपी सिंह ने 8 अक्टूबर 2026 को जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान महिला पुलिसकर्मी से कथित धक्का-मुक्की को अस्वीकार्य बताया।
उन्होंने प्रियंका गांधी वाड्रा के कथित व्यवहार का भी हवाला दिया और विपक्ष पर 'खुद को कानून से ऊपर समझने' का आरोप लगाया।
विपक्ष के 'अघोषित आपातकाल' के दावे को सिंह ने 1975-77 के 19 महीने के वास्तविक आपातकाल से तुलना करते हुए खारिज किया।
42 पूर्व न्यायाधीशों के पत्र को उन्होंने गंभीर बताया और राहुल गांधी से इस पर विचार करने की उम्मीद जताई।
PM मोदी के 'लीकेज रोकने' वाले बयान का समर्थन किया; मतदाता सूची शुद्धिकरण को लोकतंत्र के लिए जरूरी बताया।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता आरपी सिंह ने 8 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और इंडिया ब्लॉक पर कड़ा हमला बोला। उनका यह बयान जंतर-मंतर पर चुनाव आयोग के विरोध में हुए प्रदर्शन के दौरान एक महिला पुलिसकर्मी के साथ कथित धक्का-मुक्की की घटना के बाद आया। सिंह ने इस व्यवहार को अस्वीकार्य और विपक्ष की 'गलत मानसिकता' का प्रतीक बताया।

महिला पुलिसकर्मी से कथित धक्का-मुक्की पर प्रतिक्रिया

आरपी सिंह ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान किसी महिला पुलिसकर्मी पर हाथ उठाने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष को किसी मुद्दे पर आवाज़ उठानी है, तो उन्हें अपनी महिला कार्यकर्ताओं के माध्यम से बात रखनी चाहिए। सिंह ने प्रियंका गांधी वाड्रा के प्रदर्शन के दौरान एक पुलिस अधिकारी के साथ कथित व्यवहार का भी हवाला दिया और आरोप लगाया कि विपक्ष खुद को कानून से ऊपर समझता है। उन्होंने कहा कि सुरक्षाकर्मियों के साथ इस तरह का व्यवहार किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं होना चाहिए।

विपक्ष के 'अघोषित आपातकाल' के आरोप पर पलटवार

इंडिया ब्लॉक के नेताओं द्वारा देश में 'अघोषित आपातकाल' होने के दावे को सिंह ने सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि विपक्षी नेता आज खुलकर संसद में बोल रहे हैं, प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे हैं और टेलीविज़न पर अपने विचार रख रहे हैं — यह आपातकाल की स्थिति नहीं है। उन्होंने अपने व्यक्तिगत अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि 1975-77 के आपातकाल में 19 महीने तक बड़ी संख्या में राजनीतिक कार्यकर्ता जेलों में रहे और उन्हें यातनाएँ सहनी पड़ीं। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों की तुलना उस दौर से करना उचित नहीं है।

42 पूर्व न्यायाधीशों के पत्र पर टिप्पणी

चुनाव आयोग और अन्य संवैधानिक संस्थाओं को लेकर 42 पूर्व न्यायाधीशों द्वारा उठाई गई चिंता के संदर्भ में सिंह ने कहा कि यह एक गंभीर विषय है। उनके अनुसार, देश के वरिष्ठ पूर्व न्यायाधीशों ने संस्थाओं को कमज़ोर करने के प्रयासों पर चिंता जताई है और उन्होंने उम्मीद जताई कि राहुल गांधी इस पर गंभीरता से विचार करेंगे।

राजघाट पर राहुल गांधी के धरने पर आपत्ति

राहुल गांधी के राजघाट पर बैठने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक इंडिया ब्लॉक का आंदोलन जारी रखने के ऐलान पर आरपी सिंह ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी की समाधि पर जाकर केवल अहिंसा का संदेश दिया जाना चाहिए, और जिस प्रदर्शन में पुलिसकर्मियों के साथ कथित धक्का-मुक्की हो, वह बापू की सीख के विपरीत है।

PM मोदी के 'लीकेज रोकने' वाले बयान का समर्थन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'मुफ्त की कमाई बंद हुई तो चीखते रहेंगे, मैं लीकेज रोकता रहूंगा' वाले बयान का आरपी सिंह ने पूरा समर्थन किया। उन्होंने मनरेगा में कथित अनियमितताओं और फर्जी राशन कार्डों का ज़िक्र करते हुए कहा कि बैंक खाते और आधार से लिंक किए जाने के बाद व्यवस्था में मौजूद कथित 'लीकेज' पर रोक लगी है। उन्होंने कहा कि इससे उन लोगों को असुविधा हुई, जिनका वोट बैंक कथित तौर पर इन खामियों पर टिका था। सिंह ने मतदाता सूची के शुद्धिकरण को भी लोकतंत्र की मज़बूती के लिए अनिवार्य बताया। आने वाले दिनों में यह राजनीतिक बहस और तेज़ होने के आसार हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो BJP उसे 'कानून तोड़ने वाले' के रूप में चित्रित करना चाहती है। महिला पुलिसकर्मी वाला मुद्दा इस रणनीति में सबसे धारदार हथियार है, क्योंकि यह विपक्ष के नारीवादी दावों के साथ सीधे टकराता है। हालाँकि, जंतर-मंतर घटना की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है और दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। 42 पूर्व न्यायाधीशों के पत्र को 'गंभीर' मानना और साथ ही विपक्ष की आलोचना करना BJP की उस रेखा को भी दर्शाता है कि वह संस्थागत आलोचना और राजनीतिक विरोध के बीच फर्क रखने की कोशिश कर रही है।
RashtraPress
8 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जंतर-मंतर पर महिला पुलिसकर्मी से कथित धक्का-मुक्की का मामला क्या है?
चुनाव आयोग के विरोध में इंडिया ब्लॉक के जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान एक महिला पुलिसकर्मी के साथ कथित धक्का-मुक्की की घटना सामने आई। BJP प्रवक्ता आरपी सिंह ने इसे गंभीर बताते हुए कहा कि ड्यूटी पर तैनात महिला सुरक्षाकर्मी के साथ ऐसा व्यवहार किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है।
आरपी सिंह ने 'अघोषित आपातकाल' के आरोप पर क्या कहा?
आरपी सिंह ने विपक्ष के 'अघोषित आपातकाल' के दावे को पूरी तरह खारिज किया। उन्होंने कहा कि 1975-77 के असली आपातकाल में 19 महीने तक हज़ारों कार्यकर्ता जेलों में रहे और यातनाएँ सहीं, जबकि आज विपक्ष खुलकर संसद, प्रेस और टेलीविज़न पर अपनी बात रख सकता है।
इंडिया ब्लॉक का चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन किस बात को लेकर था?
इंडिया ब्लॉक ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया। राहुल गांधी ने राजघाट पर धरना देते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया।
42 पूर्व न्यायाधीशों के पत्र पर BJP का क्या रुख है?
आरपी सिंह ने इसे गंभीर विषय बताया और कहा कि वरिष्ठ पूर्व न्यायाधीशों ने संवैधानिक संस्थाओं को कमज़ोर करने के प्रयासों पर चिंता जताई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि राहुल गांधी इस पत्र को पढ़कर अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करेंगे।
PM मोदी के 'लीकेज रोकने' वाले बयान का क्या अर्थ है?
PM मोदी ने कहा था कि जब से मुफ्त की सुविधाओं में कथित अनियमितताएँ रोकी गई हैं, कुछ लोग चिल्ला रहे हैं। आरपी सिंह ने इसका समर्थन करते हुए मनरेगा और फर्जी राशन कार्डों में कथित भ्रष्टाचार का हवाला दिया और कहा कि बैंक-आधार लिंकिंग से इस 'लीकेज' पर अंकुश लगा है।
राष्ट्र प्रेस
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