राहुल गांधी पहले दलित महिला बर्बरता पर दें जवाब, SIR पर आपत्ति है तो कोर्ट जाएं: BJP प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने 14 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन पर नैरेटिव की लड़ाई लड़ने और सोशल मीडिया को हथियार बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनाव आयोग के कामकाज पर सवाल उठाने वालों को न्यायालय का रास्ता अपनाने की सलाह दी, साथ ही कांग्रेस कार्यालय में एक दलित महिला के साथ हुई कथित बर्बरता पर राहुल गांधी से सीधे जवाब माँगा।
एसआईआर पर विवाद और कोर्ट का रास्ता
भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'देश के हर नागरिक को अपनी याचिकाओं के साथ हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट जाने का अधिकार है। अगर किसी को एसआईआर या चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर आपत्ति है तो वह निश्चित रूप से कोर्ट जा सकता है।' उन्होंने यह भी बताया कि एसआईआर को लेकर देश में पहले ही कई याचिकाएँ दायर की जा चुकी हैं और सुनवाई के बाद न्यायालय इस मामले पर अपनी राय व्यक्त कर चुका है।
दलित महिला बर्बरता पर राहुल गांधी से जवाब की माँग
त्रिपाठी ने राहुल गांधी के 'नफरत का जवाब मोहब्बत से देने' के नारे को लेकर तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को पहले यह बताना चाहिए कि कांग्रेस कार्यालय के भीतर एक दलित महिला को पीटे जाने की जो कथित घटना सामने आई, वह 'नफरत थी या मोहब्बत।' भाजपा प्रवक्ता के अनुसार, यह सवाल राहुल गांधी की अपनी पार्टी की जवाबदेही से जुड़ा है।
पंचायत चुनाव और हाई कोर्ट के आदेश पर उत्तर प्रदेश सरकार का रुख
पंचायत चुनाव तीन महीने के भीतर कराने संबंधी हाई कोर्ट के आदेश पर त्रिपाठी ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार कानून के राज का पूरी तरह पालन करती है। उन्होंने कहा, 'हाई कोर्ट ने जो भी आदेश दिया है, हम उसका अध्ययन करेंगे और उसके अनुपालन के लिए कानूनी विशेषज्ञों से सलाह लेंगे।' सरकार ने शीघ्र उचित निर्णय लेने का आश्वासन दिया।
मेरठ हत्याकांड में मौत की सजा पर भाजपा की प्रतिक्रिया
मेरठ की अदालत द्वारा मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल को पति सौरभ की हत्या के मामले में मृत्युदंड सुनाए जाने पर त्रिपाठी ने इसे 'बदलते उत्तर प्रदेश' का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा कि इस जघन्य अपराध में जाँच के बाद बहुत कम समय में ट्रायल पूरा किया गया और राज्य सरकार ने सज़ा दिलाना सुनिश्चित किया। उनके अनुसार, यूपी पुलिस यह सुनिश्चित करेगी कि प्रदेश की सीमा में होने वाले हर अपराध को उसके अंजाम तक पहुँचाया जाए।
राजनीतिक संदर्भ और आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब SIR प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों और सत्तापक्ष के बीच तनातनी चल रही है। भाजपा की ओर से यह बयान स्पष्ट रूप से विपक्ष पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा प्रतीत होता है। आने वाले दिनों में दलित महिला बर्बरता के आरोप और SIR विवाद, दोनों मामलों पर राजनीतिक बहस और तेज़ होने की संभावना है।