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रूस ने बहरीन के प्रस्ताव पर यूएन में लगाया वीटो, अमेरिका का अगला कदम क्या होगा?

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रूस ने बहरीन के प्रस्ताव पर यूएन में लगाया वीटो, अमेरिका का अगला कदम क्या होगा?

सारांश

रूस ने होर्मुज जलडमरूमध्य के संबंध में बहरीन के प्रस्ताव पर वीटो लगाकर एक नई स्थिति उत्पन्न की है। इस घटना से अमेरिका की संभावित सैन्य कार्रवाई पर प्रश्न उठ रहे हैं। क्या अमेरिका अपनी शक्ति का इस्तेमाल करेगा?

मुख्य बातें

रूस ने बहरीन के प्रस्ताव पर वीटो लगाया।
अमेरिका की सैन्य कार्रवाई पर प्रश्न चिन्ह।
फ्रांस और ब्रिटेन का विरोध।
संयुक्त राष्ट्र का अंतरराष्ट्रीय कानून पर प्रभाव।
तेल की कीमतों का बढ़ता दबाव।

नई दिल्ली, 3 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। होर्मुज जलडमरूमध्य के संदर्भ में रूस का दृष्टिकोण हमेशा से ईरान के समर्थन में रहा है। विशेष रूप से, रूस ने इस मुद्दे पर अमेरिका के हस्तक्षेप के खिलाफ अपनी स्थिति स्पष्ट की है। होर्मुज के बंद होने से कई देशों को गंभीर संकट का सामना करना पड़ रहा है। इसी बीच, बहरीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक प्रस्ताव पेश किया है, जिसके तहत देशों को होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित आवागमन करने के लिए सभी आवश्यक बचाव उपायों का उपयोग करने का अधिकार होगा।

हालांकि, रूस ने इस प्रस्ताव को पहले ही वीटो कर दिया है। इस पर, यह सवाल उठता है कि यूएन में इस प्रस्ताव को मंजूरी न मिलने के बाद अमेरिका क्या कदम उठाएगा?

संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव के बिना, अमेरिका के लिए बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई करना अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत चुनौतीपूर्ण होगा। रूस और चीन ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि वे किसी भी एकतरफा सैन्य हस्तक्षेप को अवैध मानेंगे। हालांकि, अमेरिका ऐतिहासिक रूप से 'नेविगेशन की स्वतंत्रता' के नाम पर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में अपने हितों की रक्षा करने के लिए अकेले कदम उठाता रहा है।

बहरीन के प्रस्ताव पर यूएन में रूस के वीटो के बाद, अमेरिका संभवतः अपने सहयोगी देशों को होर्मुज जलडमरूमध्य में सैनिकों की तैनाती और कार्रवाई के लिए प्रेरित कर सकता है। हालांकि, फ्रांस और ब्रिटेन समेत कई देशों ने शुरू से ही होर्मुज जलडमरूमध्य में अपने युद्धपोत भेजने या किसी भी तरह से अपनी शक्ति को इस संघर्ष में झोंकने से इनकार कर दिया है।

फ्रांस का कहना है कि यह युद्ध अमेरिका ने शुरू किया है, इसलिए उसे खुद ही इस मामले में शामिल होना चाहिए। अमेरिका के लिए यह स्थिति काफी गंभीर है। एक ओर, तेल की बढ़ती कीमतों के कारण अमेरिका पर वैश्विक दबाव बन रहा है और दूसरी ओर, ट्रंप प्रशासन के लिए पीछे हटना इस संघर्ष में हार मानने जैसा होगा।

अमेरिका तमाम रोकथाम के बावजूद भी ईरान के खिलाफ हमले जारी रखे हुए है। अमेरिका में किसी भी देश पर हमला करने से पहले कांग्रेस में इस पर चर्चा की जाती है और सहमति बनने के बाद ही अमेरिका किसी देश पर हमला कर सकता है। अमेरिकी कांग्रेस में यह आरोप लगाया गया है कि ट्रंप प्रशासन ने ईरान पर हमले से पहले इस मुद्दे को सीनेट में नहीं रखा।

ट्रंप प्रशासन ने अब तक कानून की अनदेखी करते हुए वही किया, जो उन्हें करना था। ऐसे में, बहरीन के प्रस्ताव पर सहमति न बनने के बावजूद अगर अमेरिका होर्मुज में सैनिक भेजता है, तो यह सीधे तौर पर यूएन की प्रभावशीलता पर प्रश्न चिन्ह लगा देगा। यूएन चार्टर के अनुसार अगर अमेरिका सैनिक भेजता है, तो यह अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर भी गंभीर प्रश्न उठाता है। यह स्थिति न केवल भू-राजनीतिक दृष्टिकोन से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून के लिए भी एक परीक्षा है।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रूस ने बहरीन के प्रस्ताव पर वीटो क्यों लगाया?
रूस का रुख हमेशा से ईरान के समर्थन में रहा है और उसने अमेरिका के हस्तक्षेप के खिलाफ अपना पक्ष रखा है।
अमेरिका का अगला कदम क्या हो सकता है?
अमेरिका अपने सहयोगियों को होर्मुज में सैनिकों की तैनाती के लिए प्रेरित कर सकता है।
क्या अमेरिका बिना यूएन प्रस्ताव के सैन्य कार्रवाई कर सकता है?
बिना यूएन प्रस्ताव के, अमेरिका के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत सैन्य कार्रवाई करना चुनौतीपूर्ण होगा।
फ्रांस और ब्रिटेन का इस मुद्दे पर क्या रुख है?
फ्रांस और ब्रिटेन ने होर्मुज जलडमरूमध्य में अपने युद्धपोत भेजने से इनकार किया है।
ट्रंप प्रशासन के ईरान पर हमले का क्या कानूनी आधार है?
कांग्रेस में चर्चा और सहमति के बिना, अमेरिका किसी देश पर हमला नहीं कर सकता।
राष्ट्र प्रेस
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