सहारनपुर में दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर का स्वागत, युवाओं ने कहा- 'यात्रा होगी आसान'
सारांश
Key Takeaways
- यात्रा का समय कम होगा।
- स्थानीय विकास को बढ़ावा मिलेगा।
- वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
- बुनियादी ढांचे में सुधार होगा।
- आर्थिक अवसर बढ़ेंगे।
सहारनपुर, 14 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। 12,000 करोड़ रुपए से अधिक की अनुमानित लागत से निर्मित, हाल ही में आरंभ हुए दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर को सहारनपुर के युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों द्वारा शानदार प्रतिक्रिया मिली है। उनका मानना है कि यह प्रोजेक्ट यात्रा को काफी सरल बनाएगा और विकास को आगे बढ़ाएगा, साथ ही वन्यजीवों की सुरक्षा को भी सुनिश्चित करेगा।
स्थानीय निवासियों ने इस कॉरिडोर को एक ऐसे परिवर्तनकारी कदम के रूप में देखा है, जिससे न केवल यात्रा का समय कम होगा, बल्कि कनेक्टिविटी भी बेहतर होगी और उत्तराखंड तथा राष्ट्रीय राजधानी में आर्थिक विकास के नए दरवाजे खुलेंगे।
भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती पर आरंभ की गई इस परियोजना को व्यापक रूप से एक प्रमुख जन कल्याणकारी पहल के रूप में सराहा गया है। स्थानीय लोगों का मानना है कि बेहतर कनेक्टिविटी से युवाओं को शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य सेवाओं के अधिक अवसर मिलेंगे, जिससे उनके बीच एक सकारात्मक संदेश जाएगा।
इसके अलावा, 'मां शाकंभरी कॉरिडोर' और 'सरसावा एयर टर्मिनल' जैसी अन्य बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं के विकास ने इस परियोजना के प्रभाव को और भी बढ़ा दिया है।
निवासियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया और इस परियोजना को अपने क्षेत्र के लिए एक 'ऐतिहासिक उपहार' बताया।
विशेष रूप से युवाओं ने यात्रा के समय में होने वाली बचत के फायदों पर जोर दिया। एक छात्र ने राष्ट्र प्रेस को बताया, "पहले पढ़ाई के लिए दिल्ली या देहरादून जाने में चार से छह घंटे लगते थे, जो काफी थकाने वाला था। अब इस नए कॉरिडोर से यात्रा बेहद तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक हो जाएगी।"
कई लोगों ने यह भी बताया कि सड़कों के बेहतर बुनियादी ढांचे से दुर्घटनाओं में काफी कमी आने की उम्मीद है। सड़कों की बेहतर स्थिति और सुव्यवस्थित यातायात व्यवस्था के चलते, रोजाना सफर करने वाले लोग अब अधिक भरोसेमंद और तनाव-मुक्त यात्रा की आशा कर रहे हैं।
यह कॉरिडोर इस कारण से भी चर्चित है क्योंकि इसे एशिया के सबसे बड़े 'वन्यजीव कॉरिडोर' के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य जानवरों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना है। स्थानीय लोगों ने बताया कि पहले जंगली जानवर अक्सर सड़कों (हाईवे) पर आ जाते थे, जिससे दुर्घटनाएं होती थीं और जानवरों की जान भी चली जाती थी।
एक युवा ने कहा, "मेरे लिए सबसे बड़ी खुशी की बात यह है कि प्रधानमंत्री मोदी ने न केवल इंसानों के बारे में सोचा है, बल्कि जानवरों के बारे में भी विचार किया है। पहले सड़क पार करते समय जानवरों के साथ अक्सर दुर्घटनाएं हो जाती थीं। अब वे बिना किसी खतरे के आजादी से घूम सकेंगे।"
बुजुर्ग नागरिकों और महिलाओं ने भी इस परियोजना का स्वागत किया। उन्होंने अतीत में लंबी यात्रा और बार-बार होने वाले ट्रैफिक जाम के कारण झेली गई कठिनाइयों को याद किया। उन्होंने बताया कि मेडिकल इमरजेंसी के दौरान, ट्रैफिक जाम की वजह से होने वाली देरी अक्सर जानलेवा साबित होती थी।
एक स्थानीय निवासी ने कहा, "पहले देहरादून पहुंचने में कई घंटे लग जाते थे और दुर्घटनाएं होना आम बात थी। इमरजेंसी के समय, देरी की वजह से कई बार मरीजों की जान भी चली जाती थी। अब यह एक्सप्रेसवे यात्रा को तेज और अधिक आरामदायक बना देगा।"
एक सेवानिवृत्त सैनिक ने भी मॉनसून के मौसम में होने वाली मुश्किलों के बारे में बताया। उन्होंने कहा, "कभी-कभी भारी बारिश के दौरान, देहरादून के लोग एक तरफ फंस जाते थे, जबकि सहारनपुर के लोग दूसरी तरफ अटके रह जाते थे। भूस्खलन से सड़कें बंद हो जाती थीं, जिससे आवाजाही नामुमकिन हो जाती थी।"
इस कॉरिडोर के चालू होने से, यहां के लोगों को विश्वास है कि अब ऐसी चुनौतियां अतीत की बात बन जाएंगी। उनका मानना है कि यह प्रोजेक्ट आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो पर्यावरण से संबंधित चिंताओं का भी ध्यान रखता है।
दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर से न केवल क्षेत्रीय कनेक्टिविटी में बदलाव आने की संभावना है, बल्कि यह उत्तरी भारत में पर्यटन, व्यापार और कुल मिलाकर सामाजिक-आर्थिक प्रगति के लिए एक उत्प्रेरक साबित होगा।