क्या साई स्पोर्ट्स साइंस डिवीजन ने शूटिंग और आर्चरी कोचों के लिए खास वर्कशॉप आयोजित की?

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क्या साई स्पोर्ट्स साइंस डिवीजन ने शूटिंग और आर्चरी कोचों के लिए खास वर्कशॉप आयोजित की?

सारांश

नई दिल्ली में आयोजित चार दिवसीय वर्कशॉप, जहां कोचों को आधुनिक तकनीकों से प्रशिक्षित किया गया, एथलीटों के प्रदर्शन को बेहतर बनाने का लक्ष्य रखती है। क्या यह वर्कशॉप एथलीटों के लिए नई संभावनाएं खोलेगी?

Key Takeaways

  • कोचों को आधुनिक तकनीकों से प्रशिक्षित किया जाएगा।
  • वर्कशॉप में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को शामिल किया गया है।
  • इससे एथलीटों के प्रदर्शन में सुधार होगा।
  • कोच और स्पोर्ट्स साइंटिस्ट मिलकर प्रशिक्षण में सिद्धांतों को लागू कर सकेंगे।
  • इसका उद्देश्य विश्वस्तरीय समर्थन प्रदान करना है।

नई दिल्ली, 27 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (साई) ने शूटिंग और आर्चरी के कोचों के लिए एक विशेष चार दिवसीय स्पोर्ट्स साइंस वर्कशॉप का आयोजन किया। यह वर्कशॉप नई दिल्ली के इंदिरा गांधी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में साई स्पोर्ट्स साइंस डिवीजन द्वारा शुरू की गई। वर्कशॉप का मुख्य उद्देश्य कोचों को आधुनिक निगरानी उपकरणों और वैज्ञानिक विधियों से सुसज्जित करना है, ताकि वे प्रशिक्षण और प्रतियोगिता में एथलीट के प्रदर्शन को और बेहतर बना सकें।

साई के डायरेक्टर जनरल और खेल सचिव हरि रंजन राव ने वर्कशॉप के पहले दिन कहा कि मंत्रालय और सरकार स्पोर्ट्स साइंस की पहल को हर संभव सहायता देंगे, लेकिन यह महत्वपूर्ण है कि संसाधनों का समझदारी से निवेश किया जाए और स्पोर्ट्स साइंस का सही उपयोग कर परिणाम प्राप्त किए जाएं। एथलीटों का समर्थन करने के लिए स्पोर्ट्स साइंस का प्रभावी उपयोग होना चाहिए, खासकर उन खेलों में जहां मामूली फायदे जीत और हार के बीच का अंतर तय करते हैं।

उन्होंने कहा कि अच्छी ट्रेनिंग, चोट से सुरक्षा और एथलीट के करियर की लंबी उम्र सुनिश्चित करने में स्पोर्ट्स साइंस की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। साई केंद्रों की संख्या बढ़ाकर और राष्ट्रीय कैंप और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के तहत एथलीट सपोर्ट सिस्टम को मजबूत करके देश भर में स्पोर्ट्स साइंस का समर्थन बढ़ाया जाएगा।

साई स्पोर्ट्स साइंस डिवीजन के डायरेक्टर-कम-हेड ब्रिगेडियर (डॉ.) बिभु कल्याण नायक ने बताया कि इस तरह के फोकस्ड एंगेजमेंट से कोच और स्पोर्ट्स साइंटिस्ट मिलकर रोजाना प्रशिक्षण में सिद्धांतों को लागू कर सकते हैं। इससे एथलीट की तकनीकी दक्षता बढ़ती है और चोट का खतरा कम होता है। उन्होंने कहा कि यह पहल एथलीट-केंद्रित, कोच-नेतृत्व और स्पोर्ट्स साइंस द्वारा समर्थित मॉडल को मजबूत करती है।

वर्कशॉप में आईजीएससी नई दिल्ली, एनएसएससी बेंगलुरु, सोनीपत, कोलकाता, गांधीनगर और एनएसएनआईएस पटियाला के विशेषज्ञों के साथ ही एनआरएआई और उससे जुड़े संस्थानों के क्षेत्रीय विशेषज्ञ शामिल हैं। यह कार्यक्रम पहले आयोजित कोच सेंसिटाइजेशन वर्कशॉप की श्रृंखला का हिस्सा है, जो हॉकी, बॉक्सिंग, रेसलिंग, जूडो, एथलेटिक्स, शूटिंग और आर्चरी जैसे खेलों में कोचिंग क्षमता बढ़ाने के लिए आयोजित की जा रही है।

वर्कशॉप का मकसद कोचिंग में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को जोड़ना है। इसमें फिजियोलॉजी, रिकवरी साइंसेज, स्पोर्ट्स साइकोलॉजी, स्पोर्ट्स मेडिसिन, न्यूट्रिशन, हाइड्रेशन, चोट प्रबंधन, योग आधारित रिकवरी और भावनात्मक नियंत्रण जैसे विषय शामिल हैं। कोचों को न्यूरोफीडबैक, विजुअलाइजेशन, पहनने योग्य तकनीक, डेटा ट्रैकिंग और एआई-आधारित प्रदर्शन फीडबैक के आधुनिक टूल्स के व्यावहारिक उपयोग से परिचित कराया जा रहा है।

यह वर्कशॉप कोच, स्पोर्ट्स साइंटिस्ट, मेडिकल एक्सपर्ट और परफॉर्मेंस स्पेशलिस्ट को एक साथ लाकर पारंपरिक कोचिंग समझ को वैज्ञानिक आधार पर लागू करने का अवसर देती है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक एथलीट को, चाहे वह किसी भी खेल में हो, वर्ल्ड-क्लास स्तर का समर्थन मिले।

Point of View

जो कोचों को नवीनतम तकनीकों से सुसज्जित कर एथलीटों के प्रदर्शन को बेहतर बनाने में सहायक होगी। इस प्रकार की पहलों से भारतीय खेलों में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता बढ़ेगी।
NationPress
07/02/2026

Frequently Asked Questions

इस वर्कशॉप का उद्देश्य क्या है?
इस वर्कशॉप का उद्देश्य कोचों को आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक विधियों से सुसज्जित करना है, ताकि वे एथलीटों के प्रदर्शन को बेहतर बना सकें।
वर्कशॉप में कौन-कौन से विषय शामिल हैं?
वर्कशॉप में फिजियोलॉजी, स्पोर्ट्स साइकोलॉजी, न्यूट्रिशन, और चोट प्रबंधन जैसे विषय शामिल हैं।
यह वर्कशॉप कब आयोजित की गई?
यह वर्कशॉप 27 जनवरी को नई दिल्ली में आयोजित की गई।
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