2022 से 2026 तक संघर्षों की वृद्धि: यूक्रेन-गाजा के साथ पूरे पश्चिम एशिया में मौत और विस्थापन का संकट
सारांश
Key Takeaways
- संघर्षों के कारण लाखों लोगों की जानें जा रही हैं।
- यूक्रेन और गाजा में संकट गहरा है।
- मानवाधिकारों का उल्लंघन बढ़ रहा है।
- विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं।
- बच्चों पर इस संकट का सबसे बुरा असर पड़ रहा है।
नई दिल्ली, 5 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। विश्व के अनेक देश संघर्षों के चक्रव्यूह में फंसे हुए हैं। शासन की लड़ाई में मानवाधिकारों का उल्लंघन किया जा रहा है। निर्दोषों की जानें जा रही हैं, और इन आंकड़ों में लगातार वृद्धि चिंताजनक स्थिति पैदा कर रही है।
2022 से 2026 के बीच कई देशों में आपसी टकराव होते रहे। इनकी कुछ संख्याएँ बेहद दिल दहला देने वाली हैं। संयुक्त राष्ट्र और उसकी एजेंसियों के अनुसार, यूक्रेन, गाजा, लेबनान, ईरान सहित पूरे पश्चिम एशिया में लाखों लोगों की जान गई है और करोड़ों को विस्थापन का सामना करना पड़ा है।
हाल ही में डब्ल्यूएचओ की एक अधिकारी ने ईरान संघर्ष से जुड़े आंकड़े प्रस्तुत किए। संघर्ष के प्रारंभिक हफ्तों में ही लगभग 3,300 लोग आसमान से गिरते गोले के शिकार बने, और 43 लाख से अधिक लोग दर-ब-दर हो गए। यह रूह कंपाने वाली सच्चाई विश्व स्वास्थ्य संगठन की ईस्टर्न मेडिटेरेनियन क्षेत्रीय निदेशक, हनान बाल्खी, ने ईरान संघर्ष के प्रारंभिक हफ्तों के प्रभाव का अवलोकन करते हुए बताई।
बाल्खी ने एक मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि इस लड़ाई ने हाल के दशकों में सबसे "बड़े संकटों" में से एक को जन्म दिया है, जिसके परिणाम भयानक हैं। 3,300 से अधिक लोगों की जान गई है, 30,000 से अधिक लोग घायल हुए हैं और 4.3 मिलियन (43 लाख) से ज्यादा बेघर हुए हैं। इतना ही नहीं, इस दौरान स्वास्थ्य केंद्रों पर 116 हमले भी किए गए। इसके अलावा, कई औद्योगिक इकाइयों, आपातकालीन सेवाओं और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों को भी निशाना बनाया गया।
हाल ही में, डब्ल्यूएचओ की एक रिपोर्ट के अनुसार, मानव समाज पर सबसे व्यापक प्रभाव रूस-यूक्रेन संघर्ष का देखा गया है, जो फरवरी 2022 में शुरू हुआ। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय (ओएचसीएचआर) के अनुसार, 2022 से 2024 के बीच 11,000 से अधिक लोगों की जान गई, जबकि 20,000 से अधिक लोग घायल हुए।
यूक्रेन में यूएन ह्यूमन राइट्स मॉनिटरिंग मिशन (एचआरएमएमयू) ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया कि 2022 के बाद 2025 यूक्रेन में नागरिकों के लिए सबसे खतरनाक वर्ष साबित हुआ।
एचआरएमएमयू ने स्पष्ट रूप से कहा कि 2025 में, यूक्रेन में 2,514 आम नागरिकों की मृत्यु हुई और 12,142 घायल हुए। 2025 में मारे गए और घायल नागरिकों की कुल संख्या 2024 (2,088 मारे गए; 9,138 घायल) की तुलना में 31 प्रतिशत अधिक थी और 2023 (1,974 मारे गए; 6,651 घायल) की तुलना में 70 प्रतिशत अधिक थी।
2025 में भी वृद्धि देखी गई। 2025 में यूएनएचसीआर के अनुसार, 2023 तक 60 लाख से अधिक लोग देश छोड़ चुके थे, जबकि लगभग 50 लाख लोग आंतरिक रूप से विस्थापित हुए। इस प्रकार, यह संघर्ष एक करोड़ से अधिक लोगों के विस्थापन का कारण बना है।
मध्य पूर्व में गाजा की स्थिति भी कम भयावह नहीं है! अक्टूबर 2023 से जारी इस युद्ध में 2026 तक 75,000 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, 2024 तक गाजा की लगभग 85 से 90 प्रतिशत आबादी, अर्थात 18 से 19 लाख लोग, अपने घरों से विस्थापित हो चुके थे। इसे आधुनिक समय के सबसे बड़े मानवता संकटों में से एक माना जा रहा है।
संयुक्त राष्ट्र ने 1 नवंबर 2024 से 31 अक्टूबर 2025 के बीच (ओएचसीएचआर की निगरानी और सरकारी स्रोतों, अन्य यूएन एजेंसियों और गैर-सरकारी संगठनों से मिली जानकारी के आधार पर) की स्थिति एक रिपोर्ट के जरिए प्रकाशित की।
गाजा स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि इस अवधि में 25,594 फिलिस्तीनी मारे गए और 68,837 घायल हुए। ओएचसीएचआर ने इसकी पुष्टि भी की। यूएन के अनुसार, इजरायल पर हमास के हमलों के बाद (7 अक्टूबर 2023) से 68,800 फिलिस्तीनी मारे गए और 1,70,664 घायल हुए (नवंबर 2024 से अक्टूबर 2025 के बीच)।
इसी क्षेत्र में इजरायल-हिज्बुल्लाह विवाद के कारण लेबनान भी गंभीर संकट का सामना कर रहा है। 2023 से 2026 के बीच 2,000 से अधिक लोगों की जान गई है, जबकि 10 से 12 लाख लोग विस्थापित हुए हैं। यूनीसेफ ने चेतावनी दी है कि इस संघर्ष का सबसे अधिक प्रभाव बच्चों पर पड़ रहा है।
दक्षिण एशिया में पाकिस्तान- अफगानिस्तान सीमा विवाद भी तनाव का केंद्र बना हुआ है। 2023 से 2026 के बीच सीमा पर झड़पों में 200 से 300 लोगों की जान गई है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, 2026 में ही लगभग एक लाख लोग विस्थापित हुए। 26 फरवरी की देर शाम से लेकर 5 मार्च 2026 तक, यूएनएएमए ने अफगानिस्तान में अप्रत्यक्ष गोलीबारी और हवाई हमलों के कारण कुल 185 नागरिकों की मृत्यु की पुष्टि की।
इन मारे गए लोगों में अधिकांश (55 प्रतिशत) महिलाएं और बच्चे थे। इसके अलावा, 27 फरवरी को पक्तिका प्रांत के बरमल जिले में हवाई हमलों में 14 नागरिक (चार महिलाएं, दो लड़कियां, पांच लड़के और तीन पुरुष) मारे गए और छह अन्य (दो महिलाएं, एक लड़की, दो लड़के और एक पुरुष) घायल हुए।
यूएन की रिपोर्ट के अनुसार, हाल ही में सीमा पार हुई सशस्त्र झड़पों में मारे गए नागरिकों की संख्या, 10-17 अक्टूबर 2025 के बीच अफगानिस्तान-पाकिस्तान के बीच हुई झड़प से कहीं अधिक है। यूएनएएमए ने बताया कि तब 47 नागरिक मारे गए थे और 456 घायल हुए थे।
2025 के अंतिम तीन महीनों में, यूएनएएमए ने अफगानिस्तान में 70 नागरिकों की मृत्यु और 478 के घायल होने की जानकारी दी। इसके अतिरिक्त, 1 जनवरी से 22 फरवरी 2026 के बीच, नांगरहार प्रांत में हवाई हमलों और सीमा पार गोलाबारी में 13 नागरिकों के मारे जाने और 12 के घायल होने की सूचना है।
वैश्विक स्तर पर स्थिति और भी चिंताजनक है। यूएनएचसीआर के 2024-2025 के आंकड़ों के अनुसार, दुनिया भर में 117 मिलियन (11.7 करोड़) से अधिक लोग जबरन विस्थापित हैं। यह संख्या इस बात को रेखांकित करती है कि आधुनिक संघर्षों में सबसे अधिक कीमत आम आदमी को चुकानी पड़ रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि 2022 के बाद के संघर्षों में एक स्पष्ट बदलाव देखा गया है—शहरी क्षेत्रों में लड़ाई और क्षेत्रीय युद्धों के विस्तार ने मानवीय संकट को और जटिल बना दिया है। संयुक्त राष्ट्र ने तत्काल संघर्षविराम, मानवीय सहायता और कूटनीतिक समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया है, लेकिन इस दिशा में ध्यान कम ही दिया जा रहा है।