क्या संजय खान को हिट फिल्मों ने दिलाया 'गोल्डन बॉय ऑफ बॉलीवुड' का टैग?
सारांश
Key Takeaways
- संजय खान का असली नाम शाह अब्बास अली खान है।
- उन्होंने 1964 में फिल्म 'हकीकत' से अपने करियर की शुरुआत की।
- 'दोस्ती' फिल्म से उन्हें पहचान मिली।
- उनकी कई हिट फिल्में हैं जैसे 'दस लाख' और 'नागिन'।
- उन्होंने टेलीविजन में भी उल्लेखनीय कार्य किया।
मुंबई, 2 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। बॉलीवुड अभिनेता संजय खान 60 और 70 के दशक में उन विशेष सितारों में शामिल थे, जिनकी फिल्में लगातार सफलता प्राप्त कर रही थीं। उनकी उच्च कद-काठी, गहरी आवाज और पर्दे पर गंभीरता के कारण उन्हें इंडस्ट्री में एक खास पहचान मिली। इस समय के दौरान, दर्शकों ने उन्हें स्नेह से 'गोल्डन बॉय ऑफ बॉलीवुड' के नाम से पुकारना शुरू कर दिया। यह उपाधि उन्हें बिना वजह नहीं मिली, बल्कि इसके पीछे उनकी फिल्मों की कामयाबी और स्टारडम था।
संजय खान का जन्म 3 जनवरी 1940 को बेंगलुरु में हुआ था। उनका असली नाम शाह अब्बास अली खान था। बचपन से ही उनका झुकाव फिल्मों की ओर था। कहा जाता है कि राज कपूर की फिल्म 'आवारा' देखने के बाद उन्होंने निश्चित कर लिया कि उन्हें फिल्मों में काम करना है। यही निर्णय आगे चलकर उनकी जिंदगी की दिशा बन गया।
उन्होंने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत 1964 में चेतन आनंद की फिल्म 'हकीकत' से की। इस फिल्म में उनका किरदार छोटा था, लेकिन उसी साल रिलीज हुई फिल्म 'दोस्ती' ने उन्हें पहचान दिला दी। 'दोस्ती' न केवल एक सुपरहिट फिल्म रही, बल्कि इसने नेशनल अवॉर्ड भी जीता। इसके बाद संजय खान का करियर तेजी से आगे बढ़ा और उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
60 और 70 के दशक में संजय खान ने कई हिट फिल्में दीं। 'दस लाख', 'एक फूल दो माली', 'इंतकाम', 'उपासना', 'धुंध', 'मेला' और 'नागिन' जैसी फिल्मों में उनकी एक्टिंग को बहुत सराहा गया। इन फिल्मों की सफलता ने उन्हें एक स्टार बना दिया। उस समय दर्शकों को उनकी सादगी, गंभीर अभिनय और हीरो वाली छवि बहुत पसंद आई। यही कारण था कि मीडिया और फैंस उन्हें 'गोल्डन बॉय ऑफ बॉलीवुड' कहने लगे।
संजय खान ने अभिनय के साथ-साथ, निर्देशन और निर्माण में भी हाथ आजमाया। साल 1977 में उन्होंने फिल्म 'चांदी सोना' से बतौर निर्देशक शुरुआत की। इसके बाद 'अब्दुल्ला' जैसी फिल्म बनाई, जिसमें उन्होंने स्वयं अभिनय भी किया। हालांकि, फिल्मों में उनका सफर धीरे-धीरे कम होता गया, और वह टेलीविजन पर नजर आने लगे।
टेलीविजन की दुनिया में संजय खान ने इतिहास रच दिया। 90 के दशक में आया धारावाहिक 'द स्वोर्ड ऑफ टीपू सुल्तान' उस समय का सबसे भव्य और चर्चित शो माना गया। इसके बाद उन्होंने 'जय हनुमान' और '1857 क्रांति' जैसे पौराणिक और ऐतिहासिक सीरियल बनाए। इन शोज ने उन्हें एक सफल टीवी निर्माता और निर्देशक के रूप में स्थापित किया।
अपने करियर के दौरान संजय खान को कई सम्मान और पुरस्कार भी मिले। उन्हें विभिन्न संस्थाओं द्वारा लाइफटाइम अचीवमेंट और एक्सीलेंस अवॉर्ड से नवाजा गया। फिल्मों और टीवी के अलावा, उन्होंने बिजनेस की दुनिया में भी कदम रखा और होटल और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में काम किया।