क्या संजय निषाद ने समाजवादी पार्टी को लेकर बड़ा दावा किया?
सारांश
Key Takeaways
- भाजपा में साधारण कार्यकर्ता भी राष्ट्रीय अध्यक्ष बन सकते हैं
- साधु-संत को सांसारिक सुख से दूर रहना चाहिए
- कांग्रेस की राजनीति को विभाजनकारी माना गया
- भारत-बांग्लादेश संबंधों में सुधार की आवश्यकता है
- समाजवादी पार्टी को भविष्य की चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा
लखनऊ, 21 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की नियुक्ति, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े मुद्दे, कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के बयान, भारत-बांग्लादेश संबंध और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव की टिप्पणियों पर अपनी राय प्रस्तुत की।
संजय निषाद ने नितिन नबीन को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने पर बधाई देते हुए कहा कि भाजपा एक ऐसा संगठन है, जहां एक साधारण व्यक्ति और कार्यकर्ता भी राष्ट्रीय अध्यक्ष बन सकता है। इसे लोकतंत्र की असली ताकत बताते हुए उन्होंने कहा कि यह पार्टी के संगठनात्मक ढांचे की मजबूती को दर्शाता है।
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच संगम घाट पर हुई तनातनी पर टिप्पणी करते हुए संजय निषाद ने कहा कि साधु-संत को सांसारिक सुख-सुविधाओं से दूर रहना चाहिए। साधु कभी पालकी में चलते हैं तो कभी पैदल, यह उनकी साधना का एक हिस्सा है। समाज को उनके तप और त्याग से सीख लेनी चाहिए।
कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हमेशा मानवता की सेवा में लगा रहा है, जबकि कांग्रेस देश को बांटने वाली राजनीति करती है। अगर कांग्रेस को आरएसएस से समस्या है, तो उसे अपने लिए कोई और स्थान खोजना चाहिए।
भारत-बांग्लादेश संबंधों पर संजय निषाद ने कहा कि दोनों देशों के बीच लंबे समय से अच्छे रिश्ते रहे हैं, लेकिन 'गलत शासक' के आने पर मित्र भी दुश्मन नजर आने लगते हैं।
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि बांग्लादेश के निर्माण में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका थी, फिर भी वहां भारत के प्रति विरोध और कट्टरपंथी सोच सामने आ रही है, जो स्वीकार्य नहीं है। भारत इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करेगा।
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के बयान पर संजय निषाद ने कहा कि 2027 में भी अखिलेश यादव को '37 से हार' का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि '27' में '37' का घमंड टूटेगा। समाजवादी पार्टी भ्रम फैलाने वाली और मुद्दाविहीन पार्टी है।
2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी (सपा) ने उत्तर प्रदेश में ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए कुल 37 सीटें जीती थीं।