क्या सर्दियों में पैरों की देखभाल जरूरी है? आयुर्वेद से जानें कारण और उपाय
सारांश
Key Takeaways
- पैरों की साफ-सफाई
- गुनगुने पानी से स्नान
- हल्का तेल लगाना
- नीलगिरी या लैवेंडर का तेल
- सूती मोजे पहनना
नई दिल्ली, 8 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। सर्दियों में ठंडी हवा और फर्श की ठंडक सीधे शरीर के अंदर तक पहुँचती है, और इसका सबसे अधिक प्रभाव पैरों पर पड़ता है। यदि पैरों को गर्म और स्वच्छ नहीं रखा जाता है, तो नींद में दिक्कत, पैरों की जकड़न, ऐंठन और दर्द जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
आयुर्वेद के अनुसार, पैरों में लगभग 72,000 नाड़ियां होती हैं, जो शरीर के अन्य अंगों और मस्तिष्क से जुड़ी होती हैं। इस कारण पैरों की ठंडक केवल पैरों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यह पूरे शरीर और मानसिक स्थिति को प्रभावित करती है।
सर्दियों में ठंड, रुखापन, और भारीपन वात दोष को बढ़ाते हैं। जब वात असंतुलित होता है, तो नसों में जकड़न, शरीर में थकान, नींद की कमी, और कभी-कभी पाचन संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए, आयुर्वेद में पैरों को गर्म और रिलैक्स रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
घर पर एक सरल उपाय है कि रात को सोने से पहले पैरों को गुनगुने पानी में 5-10 मिनट तक डालें। इस पानी में सेंधा नमक या तिल/सरसों का तेल डालने से नसों को गर्माहट मिलती है, रक्त संचार बढ़ता है, और शरीर और मन दोनों शांत हो जाते हैं।
पैर धोने के बाद हल्का तेल या घी लगाना फायदेमंद होता है। यह न केवल एड़ियों को फटने से बचाता है, बल्कि पैरों की त्वचा को नरम और मुलायम भी बनाता है। यदि थकान या तनाव अधिक हो, तो पानी में 1-2 बूंद नीलगिरी या लैवेंडर का तेल डालें। इसकी खुशबू सीधे मस्तिष्क के लिम्बिक सिस्टम पर असर डालती है और मानसिक तनाव को कम करती है। नियमित रूप से ऐसा करने से नींद जल्दी आती है, दिनभर की थकान कम होती है, और सर्दियों में पैरों की ठंडक से जुड़ी समस्याएं दूर रहती हैं।
पैरों की देखभाल केवल शरीर को गर्म रखने के लिए नहीं, बल्कि नींद, मानसिक शांति और समग्र स्वास्थ्य के लिए भी आवश्यक है। छोटे-छोटे उपाय जैसे गुनगुना पानी, हल्का तेल, और सूती मोजे पहनना आपकी रातों को आरामदायक बना सकते हैं और सर्दियों में शरीर और मन दोनों को मजबूत रखते हैं।