क्या सर्दियों में बहती नाक आपको परेशान कर रही है? जानें आयुर्वेद से समाधान

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क्या सर्दियों में बहती नाक आपको परेशान कर रही है? जानें आयुर्वेद से समाधान

सारांश

सर्दियों में बहती नाक की समस्या आम है, लेकिन आयुर्वेदिक उपायों से राहत पाई जा सकती है। जानें कैसे।

मुख्य बातें

सर्दियों में बहती नाक की समस्या आम है।
आयुर्वेदिक उपायों से राहत मिल सकती है।
प्रतिमर्श नस्य एक सरल और प्रभावी उपाय है।
हल्दी वाला दूध पीने से लाभ होता है।
यदि समस्या गंभीर हो, तो चिकित्सक से परामर्श करें।

नई दिल्ली, 23 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। जैसे ही सर्दियों का मौसम शुरू होता है, कई लोग बहती नाक की समस्या का सामना करते हैं। ठंडी और सूखी हवा नाक की झिल्ली को सूखा कर देती है, जिससे शरीर अधिक बलगम का उत्पादन करने लगता है ताकि नाक को नम रखा जा सके। इससे नाक बहने लगती है। इस स्थिति के कारण न केवल सांस लेने में समस्या आती है बल्कि यह असहजता भी पैदा करती है।

सर्दियों में, वायरस भी तेजी से फैलते हैं, जिससे सर्दी-जुकाम या एलर्जी बहती नाक का कारण बन सकते हैं। भारत सरकार का आयुष मंत्रालय आयुर्वेद के सरल और प्राकृतिक उपायों को अपनाने की सलाह देता है, जो न केवल राहत देते हैं बल्कि नासिका मार्ग को भी स्वस्थ बनाए रखते हैं।

आयुर्वेद के अनुसार, सर्दियों में बहती नाक मुख्यतः वात दोष के असंतुलन के कारण होती है। ठंडी हवा को फेफड़ों तक पहुँचने से पहले नाक में गर्म और नम होना चाहिए, लेकिन सूखी हवा नाक की झिल्ली को परेशान करती है और अधिक म्यूकस उत्पन्न करने लगती है। कभी-कभी एलर्जी जैसे धूल या पालतू जानवरों के बाल भी इसके लिए जिम्मेदार होते हैं। अगर यह समस्या लंबे समय तक बनी रहती है तो यह साइनस या अन्य सांस संबंधी समस्याएं भी पैदा कर सकती है।

मंत्रालय के अनुसार, प्रतिमर्श नस्य एक सरल और प्रभावी उपाय है। यह नस्य कर्म का हल्का रूप है, जिसे रोजाना घर पर किया जा सकता है। सुबह और शाम, नाक के छिद्रों में तिल का तेल, नारियल का तेल या शुद्ध घी की एक-एक बूंद डालें। इससे नाक की झिल्ली नम रहती है, बलगम कम बनता है और सांस लेना आसान हो जाता है। यह उपाय न केवल बहती नाक को नियंत्रित करता है, बल्कि सिरदर्द, साइनस और मानसिक स्पष्टता के लिए भी लाभकारी है।

यह उपाय सर्दियों के साथ-साथ अन्य मौसमों में भी नियमित रूप से किया जा सकता है। इससे इम्यूनिटी मजबूत होती है और सर्दी-जुकाम का खतरा कम होता है। नास्या के अलावा आयुर्वेद में बहती नाक के लिए कई अन्य घरेलू उपाय भी मौजूद हैं। सबसे पहले भाप लें; गर्म पानी में अजवाइन, तुलसी की पत्तियां या लौंग डालकर भाप लेने से नाक खुलती है और कफ पतला होकर बाहर निकलता है।

नाक बहने की समस्या में हल्दी वाला दूध पीना भी बेहद फायदेमंद होता है, क्योंकि हल्दी में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो संक्रमण से लड़ने में मदद करते हैं। अदरक, काली मिर्च और पिप्पली से बना त्रिकटु चूर्ण या काढ़ा पीने से संतुलन बना रहता है और जुकाम जल्दी ठीक होता है। तुलसी की पत्तियां चबाना या शहद के साथ लेना इम्यूनिटी बढ़ाता है। गर्म पानी अधिक पीने से नाक सूखने से बचती है।

ये आयुर्वेदिक उपाय न केवल लक्षणों को दूर करते हैं बल्कि शरीर के दोषों को संतुलित कर मूल कारण को ठीक करते हैं। अगर समस्या गंभीर हो, तो आयुर्वेदिक चिकित्सक से सलाह अवश्य लें।

संपादकीय दृष्टिकोण

लोग खुद को स्वस्थ रख सकते हैं।
RashtraPress
15 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सर्दियों में बहती नाक का क्या कारण होता है?
सर्दियों में ठंडी और सूखी हवा नाक की झिल्ली को सूखा देती है, जिससे शरीर अधिक बलगम बनाता है।
क्या आयुर्वेदिक उपाय प्रभावी हैं?
जी हां, आयुर्वेदिक उपाय न केवल राहत देते हैं बल्कि नासिका मार्ग को भी स्वस्थ बनाए रखते हैं।
प्रतिमर्श नस्य क्या है?
प्रतिमर्श नस्य एक सरल और प्रभावी उपाय है जिसमें नाक के छिद्रों में तेल की एक-एक बूंद डाली जाती है।
क्या हल्दी वाला दूध पीना फायदेमंद है?
हाँ, हल्दी में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो संक्रमण से लड़ने में मदद करते हैं।
क्या मुझे डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए?
यदि समस्या गंभीर हो, तो अवश्य किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से सलाह लें।
राष्ट्र प्रेस
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