तमिलनाडु चुनाव में सीमान का नामांकन: 'मुफ्तखोरी की संस्कृति' पर कड़ा प्रहार
सारांश
Key Takeaways
- सीमान ने कराईकुडी से नामांकन भरा।
- उन्होंने 'मुफ्तखोरी की संस्कृति' पर तीखी आलोचना की।
- जनता की वास्तविक जरूरतों पर जोर दिया।
- गुणवत्तापूर्ण बुनियादी ढांचे की मांग की।
- राज्य बजट के घाटे पर चिंता व्यक्त की।
कराईकुडी, 30 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। नाम तमिलार काची (एनटीके) के प्रमुख समन्वयक सीमान ने सोमवार को आगामी तमिलनाडु चुनाव के लिए कराईकुडी विधानसभा क्षेत्र से अपना नामांकन प्रस्तुत किया।
वह अपने परिवार के सदस्यों के साथ देवकोट्टई उप कलेक्टर कार्यालय में चुनाव कार्यालय पहुंचे।
उन्होंने नामांकन पत्र पेश करने से पहले मां का आशीर्वाद लिया। इस महत्वपूर्ण क्षण को पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने देखा, जो बड़ी संख्या में कार्यालय के बाहर एकत्रित हुए थे।
नामांकन प्रक्रिया में, उनकी पत्नी कायलविझी के नाम पर भी एक अन्य कागजात का सेट प्रस्तुत किया गया, जिन्हें वैकल्पिक उम्मीदवार के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
यह एक मानक चुनावी प्रक्रिया है जिससे किसी भी अप्रत्याशित अयोग्यता या नाम वापसी की स्थिति में निरंतरता सुनिश्चित हो सके।
अपना नामांकन दाखिल करने के तुरंत बाद, सीमान ने मीडिया से बात की और तमिलनाडु में द्रविड़ पार्टियों द्वारा बढ़ावा दी जा रही 'मुफ्तखोरी की संस्कृति' की तीखी आलोचना की।
उन्होंने सवाल उठाया कि मिक्सर, ग्राइंडर और वॉशिंग मशीन जैसी उपभोक्ता वस्तुएं वितरित करने के पीछे क्या तर्क है।
उनके अनुसार, ऐसी नीतियों ने लोगों को संरचनात्मक सुधारों की मांग करने के बजाय भौतिक मुफ्त उपहारों पर निर्भर बना दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि जनता की असली जरूरतें कहीं और हैं।
जन परिवहन का उल्लेख करते हुए सीमान ने कहा कि लोग केवल मुफ्त बस सेवाओं की मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि वे गुणवत्तापूर्ण बुनियादी ढांचे और विश्वसनीय प्रणालियों की भी मांग कर रहे हैं।
उन्होंने टिप्पणी की, "क्या किसी ने मुफ्त बसों की मांग की है, या वे बेहतर बसों की मांग कर रहे हैं?"
सीमान ने बताया कि राज्य का बजट अक्सर घाटे में चला जाता है, जिससे इस प्रकार की कल्याणकारी योजनाओं की स्थिरता पर सवाल उठता है।
उन्होंने पूछा, "हर बजट में घाटा दिखता है तो फिर इस तरह की मुफ्त योजनाओं की घोषणा क्यों जारी रखी जाए?"
उन्होंने शासन के प्रति अधिक जिम्मेदार और विकासोन्मुखी दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया।