सेंसेक्स 77,000 से नीचे लुढ़का: आईटी सेक्टर और महंगे कच्चे तेल ने तीन सत्रों में डुबोया बाजार
सारांश
Key Takeaways
- सेंसेक्स 24 अप्रैल को 1,007 अंक यानी 1.30%25 गिरकर 76,656 पर आया — 77,000 का स्तर टूटा।
- निफ्टी 278 अंक यानी 1.15%25 की गिरावट के साथ 23,895 पर — यह लगातार तीसरे सत्र की गिरावट है।
- निफ्टी आईटी इंडेक्स 4%25 से अधिक टूटा — इन्फोसिस और HCL टेक के कमजोर नतीजे मुख्य कारण।
- FII ने गुरुवार को लगातार चौथे दिन 3,200 करोड़ रुपए+ की इक्विटी बेची।
- इंडिया VIX 3.50%25 उछलकर 19.24 पर — बाजार में अनिश्चितता और डर का माहौल।
- हॉर्मुज स्ट्रेट पर तनाव और ईरान-अमेरिका वार्ता की अनिश्चितता से वैश्विक बाजारों पर दबाव।
मुंबई, 24 अप्रैल: भारतीय शेयर बाजार में लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में भारी बिकवाली का दबाव बना रहा और सेंसेक्स 77,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे आ गया। शुक्रवार, 24 अप्रैल को दोपहर 12:50 बजे सेंसेक्स 1,007 अंक यानी 1.30 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,656 पर और निफ्टी 278 अंक यानी 1.15 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 23,895 पर कारोबार कर रहा था। आईटी सेक्टर की कमजोरी, महंगे कच्चे तेल और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की निरंतर बिकवाली इस गिरावट की मुख्य वजह बनी हैं।
चौतरफा बिकवाली — लार्जकैप से स्मॉलकैप तक सब लाल
बाजार में किसी एक सेगमेंट में नहीं बल्कि लार्जकैप, मिडकैप और स्मॉलकैप तीनों श्रेणियों में एकसाथ बिकवाली देखी गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 728.65 अंक यानी 1.22 प्रतिशत की गिरावट के साथ 59,219 पर था। वहीं निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 200 अंक यानी 1.13 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 17,520 पर आ गया।
यह व्यापक बिकवाली संकेत देती है कि बाजार में केवल सेक्टर-विशेष नहीं बल्कि समग्र निवेशक धारणा कमजोर पड़ी है। जब बाजार की चौड़ाई (Market Breadth) इस तरह नकारात्मक हो, तो यह आमतौर पर गहरी संरचनात्मक चिंता का संकेत होता है।
आईटी सेक्टर की बड़ी चोट — इन्फोसिस और HCL टेक के कमजोर नतीजे
निफ्टी आईटी इंडेक्स 4 प्रतिशत से अधिक टूट गया, जो इस गिरावट का सबसे बड़ा इंजन बना। इन्फोसिस और HCL टेक जैसी दिग्गज कंपनियों के तिमाही नतीजे बाजार की उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे, जिससे पूरे सेक्टर में निराशा फैल गई।
गौरतलब है कि भारतीय आईटी उद्योग अमेरिका में मंदी की आशंका और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के कारण बदलती मांग के दोहरे दबाव में है। अमेरिकी बाजार में खर्च में कटौती की प्रवृत्ति भारतीय आईटी कंपनियों की आय वृद्धि पर सीधा असर डाल रही है, और यह प्रवृत्ति अगली कुछ तिमाहियों तक बनी रह सकती है।
कच्चा तेल और भू-राजनीतिक तनाव — दोहरा दबाव
कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारतीय बाजार के लिए हमेशा से एक नकारात्मक कारक रही हैं। महंगा तेल न केवल कंपनियों की उत्पादन लागत बढ़ाता है, बल्कि खुदरा महंगाई को भी ऊपर धकेलता है, जिससे रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के लिए ब्याज दरें घटाने की गुंजाइश सीमित हो जाती है।
ईरान-अमेरिका शांति वार्ता पर छाई अनिश्चितता और हॉर्मुज स्ट्रेट पर तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को अस्थिर किए रखा है। हॉर्मुज स्ट्रेट से विश्व का लगभग 20 प्रतिशत तेल व्यापार गुजरता है — इसलिए यहां कोई भी व्यवधान वैश्विक बाजारों को तत्काल प्रभावित करता है। भारत अपनी 80 प्रतिशत से अधिक तेल जरूरत आयात से पूरी करता है, इसलिए यह जोखिम भारत के लिए और भी गंभीर है।
FII की लगातार बिकवाली — चौथे दिन भी नहीं रुके विदेशी निवेशक
विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) गुरुवार को लगातार चौथे दिन शुद्ध विक्रेता रहे और उन्होंने 3,200 करोड़ रुपए से अधिक की इक्विटी बेची। यह निरंतर बहिर्वाह बाजार पर भारी दबाव बना रहा है।
विश्लेषकों के अनुसार, डॉलर की मजबूती और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उतार-चढ़ाव के चलते उभरते बाजारों से पूंजी निकासी की प्रवृत्ति देखी जा रही है। भारत अकेला नहीं है — एशिया के अन्य बाजारों में भी इसी तरह का दबाव है। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) कुछ हद तक इस दबाव को संतुलित कर रहे हैं।
इंडिया VIX में उछाल — बाजार में अनिश्चितता का संकेत
बाजार में डर और अस्थिरता का पैमाना माने जाने वाला इंडिया VIX 3.50 प्रतिशत की तेजी के साथ 19.24 पर पहुंच गया। जब भी VIX इस तरह ऊपर जाता है, बाजार में गिरावट की आशंका बढ़ जाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि VIX का 19 से ऊपर रहना यह दर्शाता है कि निवेशक निकट भविष्य में बाजार की दिशा को लेकर अनिश्चित हैं। ऐसे माहौल में हेजिंग की मांग बढ़ती है और रिटेल निवेशक सतर्क रुख अपनाते हैं।
आगे क्या — निवेशकों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
अगले सप्ताह प्रमुख आईटी और बैंकिंग कंपनियों के तिमाही नतीजे आने वाले हैं, जो बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। इसके अलावा अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों पर नजर रखना जरूरी होगा। विश्लेषकों का कहना है कि जब तक FII बिकवाली नहीं रुकती और भू-राजनीतिक तनाव कम नहीं होता, बाजार में दबाव बना रह सकता है।