सेवा संकल्प यात्रा का 18वाँ दिन: 6 राज्यों के 20 मार्गों पर मोदी के सेवा संदेश की गूँज
सारांश
मुख्य बातें
सेवा संकल्प यात्रा रविवार, 4 अक्टूबर 2026 को अपने 18वें दिन में प्रवेश कर गई, और देशभर में इसकी जनभागीदारी नई ऊँचाइयों को छू रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्षों के समर्पित सार्वजनिक जीवन से प्रेरित यह यात्रा, 'सेवा' की भावना को जन-आंदोलन का स्वरूप देते हुए सेवा, जिम्मेदारी और राष्ट्र निर्माण का संदेश देश के विभिन्न समुदायों तक पहुँचा रही है। आज यह यात्रा एक साथ 6 राज्यों में 20 मार्गों पर सक्रिय रही।
मुख्य घटनाक्रम: कहाँ-कहाँ पहुँची यात्रा
आज की यात्रा निम्नलिखित राज्यों में आगे बढ़ी — मध्य प्रदेश में 1 मार्ग, राजस्थान में 7 मार्ग, छत्तीसगढ़ में 1 मार्ग, उत्तर प्रदेश में 6 मार्ग, झारखंड में 2 मार्ग और गुजरात में 3 मार्ग। हर बीतते दिन के साथ जनसंपर्क और जनसहभागिता और अधिक मज़बूत होती जा रही है।
यात्रा के प्रत्येक पड़ाव पर सेवा यात्री अपने संकल्प को सार्थक कार्यों में बदल रहे हैं — स्वच्छता अभियान, वृक्षारोपण, जल संरक्षण, गौ सेवा, वरिष्ठ नागरिकों की सेवा और समुदाय-केंद्रित गतिविधियाँ इसके प्रमुख अंग हैं।
जनप्रतिनिधियों की सहभागिता
इस यात्रा में कई प्रमुख जनप्रतिनिधि सम्मिलित हुए। इनमें केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी, सांसद अशोक रावत, छत्तीसगढ़ के मंत्री रामविचार नेताम, मंत्री रमेश भाई कटारा, सांसद जसवंत सिंह भाभोर और लोकसभा सांसद वीडी शर्मा सहित अन्य प्रमुख जनप्रतिनिधि शामिल रहे। उनकी उपस्थिति ने सामूहिक सेवा की भावना को और अधिक बल दिया तथा सेवा यात्रियों को नई ऊर्जा प्रदान की।
भाजयुमो अध्यक्ष का संदेश
भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के राष्ट्रीय अध्यक्ष हेमंग जोशी ने कहा, 'हमारे सेवा यात्रियों की ऊर्जा हर गुजरते दिन के साथ और बढ़ रही है। इस यात्रा के 18 दिन पूरे होने के बाद भी उनका उत्साह पहले दिन जितना ही मजबूत है, क्योंकि वे केवल किसी मार्ग पर आगे नहीं बढ़ रहे, बल्कि उस सेवा के संकल्प को आगे लेकर चल रहे हैं, जिसने पीएम नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन को परिभाषित किया है।'
जोशी ने आगे कहा कि 'हर पड़ाव पर लोगों की मुस्कान, सहभागिता और स्नेह हमारे युवा सेवा यात्रियों को और अधिक सेवा करने तथा विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने की प्रेरणा दे रहा है।'
यात्रा का प्रतीकात्मक महत्त्व
यह यात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वडनगर से राष्ट्रीय पटल तक की जीवन-यात्रा को प्रतिबिंबित करती है। वडनगर उन मूल्यों, संघर्षों और प्रारंभिक संस्कारों का प्रतीक है जिन्होंने उनके व्यक्तित्व को आकार दिया, जबकि वाराणसी उनके सार्वजनिक जीवन और राष्ट्र सेवा के एक महत्वपूर्ण अध्याय का प्रतिनिधित्व करता है।
इन गतिविधियों के माध्यम से 'सेवा परमो धर्मः' अर्थात् सेवा ही सर्वोच्च कर्तव्य है — इस व्यापक भावना को व्यावहारिक रूप दिया जा रहा है। स्थानीय समुदायों के साथ सीधे जुड़कर और उनकी आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए यात्रा इस विश्वास को पुष्ट कर रही है कि राष्ट्र निर्माण की शुरुआत समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना से होती है।
आगे क्या
जैसे-जैसे सेवा संकल्प यात्रा आगे बढ़ रही है, सेवा यात्रियों का उत्साह और मार्गों पर बढ़ती जनसहभागिता इसके मूल संदेश को नई ताकत प्रदान कर रही है। यात्रा का संकल्प और मज़बूत होता जा रहा है, और प्रत्येक पड़ाव के साथ 'विकसित भारत' का विज़न और स्पष्ट होता दिख रहा है।