क्या शिबू सोरेन को वह सम्मान नहीं मिल रहा, जिसके वे हकदार हैं?

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क्या शिबू सोरेन को वह सम्मान नहीं मिल रहा, जिसके वे हकदार हैं?

सारांश

झारखंड के दिवंगत आदिवासी नेता शिबू सोरेन को पद्म भूषण मिलने के संदर्भ में इरफान अंसारी की प्रतिक्रिया पर चर्चा। क्या उन्हें वास्तव में वह सम्मान मिला, जिसके वे हकदार हैं?

Key Takeaways

  • शिबू सोरेन का योगदान आदिवासी अधिकारों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
  • झारखंड में उनकी राजनीतिक पहचान गहरी है।
  • पद्म भूषण सम्मान से उनकी उपलब्धियों की मान्यता होती है।

रांची/जामताड़ा, 26 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। दिवंगत आदिवासी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन को पद्म भूषण मिलने पर झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन ने एक तरफ स्वागत किया है, वहीं उनकी सरकार के मंत्री इरफान अंसारी का कहना है कि उन्हें वह सम्मान नहीं मिल रहा है, जिसके वे हकदार हैं।

जामताड़ा में मीडिया से बातचीत के दौरान इरफान अंसारी ने कहा, "मुझे लगता है कि हमारे नेता शिबू सोरेन को वह सम्मान नहीं मिल रहा है, जिसके वे हकदार हैं। उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया जाना चाहिए। यहां तक कि धर्मेंद्र को भी हमारे नेता से ऊपर रखा गया है, जो निराशाजनक है। भाजपा हमारे नेता के बलिदानों और योगदानों का अपमान कर रही है।"

रांची में वरिष्ठ भाजपा नेता अर्जुन मुंडा ने कहा, "यह सम्मान उनके संघर्ष और स्वयं भारत के लिए सम्मान है। सम्मान का मापन आकार से नहीं होता, बल्कि उसके वास्तविक स्वरूप से होता है। सरकार ने सच्चे सम्मान के माध्यम से इन भावनाओं को बरकरार रखा है। यह कार्य अत्यंत गौरवपूर्ण है।"

केंद्र सरकार ने 25 जनवरी को दिशाेम गुरु और झारखंड के पूर्व सीएम शिबू सोरेन को पद्म भूषण सम्मान देने की घोषणा की थी। इस पर उनके पुत्र और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया पर लिखा कि हम सबके प्रिय, सम्माननीय और आदरणीय दिशाेम गुरुजी शिबू सोरेन को पद्म भूषण सम्मान देने के लिए, झारखंड की समस्त जनता की ओर से मैं केंद्र सरकार को हार्दिक आभार और धन्यवाद देता हूं।

उन्होंने आगे लिखा था कि गुरुजी का जीवन राजनीतिक सीमाओं से कहीं परे, अनंत तक जाता है। उनका संपूर्ण जीवन समता, समावेशी और सामाजिक न्याय, अस्मिता, आदिवासी पहचान, शिक्षा, महिला सशक्तीकरण तथा शोषित-वंचित वर्गों के हक और अधिकारों के लिए किए गए विराट संघर्ष का साक्षी रहा है। यही संघर्ष था, जिसने दशकों की सामाजिक और राजनीतिक लड़ाई के बाद झारखंड को उसका अपना राज्य दिलाया और झारखंडवासियों को झारखंडी होने का गर्व।

उन्होंने यह भी लिखा कि झारखंड की जनता के हृदय और विचारों में और लद्दाख से केरल तक, राजस्थान से असम तक देश के आदिवासी समाज के बीच, भारत मां के सच्चे सपूत, बाबा दिशाेम गुरु शिबू सोरेन भारत रत्न थे, हैं और सदैव रहेंगे।

Point of View

बल्कि समाज में योगदान से भी होती है। शिबू सोरेन का योगदान महत्वपूर्ण है, और उन्हें उचित मान्यता मिलनी चाहिए।
NationPress
09/02/2026

Frequently Asked Questions

शिबू सोरेन को कब और क्यों पद्म भूषण मिला?
शिबू सोरेन को 25 जनवरी को उनके समर्पण और योगदान के लिए पद्म भूषण सम्मान दिया गया।
इरफान अंसारी ने इस संदर्भ में क्या कहा?
इरफान अंसारी ने कहा कि शिबू सोरेन को वह सम्मान नहीं मिल रहा है, जिसके वे हकदार हैं।
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