खान सर विवाद पर पप्पू यादव का पलटवार: 'शिक्षकों की गरिमा पर हमला बर्दाश्त नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने बुधवार, 17 जून को सहरसा में पत्रकारों से बातचीत में पूर्व मंत्री नीरज कुमार सिंह 'बबलू' द्वारा खान सर को 'फ्रॉड' कहे जाने की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि शिक्षकों के प्रति न्यूनतम सम्मान बनाए रखना समाज की जिम्मेदारी है और नेताओं द्वारा इस विवाद को हवा देना बिहार के असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश है।
मीडिया और विवाद पर पप्पू यादव का रुख
पप्पू यादव ने कहा कि टीवी और यूट्यूब ने मिलकर एक शिक्षक को फैजल खान और दूसरे को रौशन यादव के रूप में स्थापित किया। उनके अनुसार, बच्चों के बीच जो माहौल बन रहा है, वह चिंताजनक है और इसका समाज पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों शिक्षकों का अपना-अपना सम्मान है — एक को वैश्विक स्तर पर पहचान मिली है, जबकि दूसरे ने छात्रों में उम्मीद और विश्वास जगाने का काम किया है।
कोचिंग माफिया पर सीधा हमला
सांसद यादव ने कोचिंग माफिया को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस देश में कोचिंग माफिया ने 80 से अधिक प्रश्नपत्र लीक किए हैं। उन्होंने कहा कि बिहार में अब सकारात्मक बदलाव आया है और 80 प्रतिशत छात्र अब अपने राज्य में रहकर ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।
नेताओं पर साजिश का आरोप
पप्पू यादव ने आरोप लगाया कि नेताओं और बिचौलियों ने मिलकर दोनों शिक्षकों की गरिमा पर प्रहार करने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि नेता इस विवाद में 'आग में घी डालने' का काम कर रहे हैं और यादव समुदाय के प्रति अचानक जागा 'प्रेम' संदेहास्पद है, क्योंकि ऐसा पहले कभी नहीं देखा गया। उन्होंने दोनों शिक्षकों से अपील की कि वे सामने आकर इस विवाद को समाप्त करें।
रौशन यादव के भाई प्रिंस की मौत पर सवाल
पप्पू यादव ने रौशन यादव के भाई प्रिंस की मौत को 'सिस्टम की विफलता' बताया। उन्होंने सवाल उठाया कि रौशन को इतनी जल्दी जेल भेजने की क्या आवश्यकता थी और क्या वे कोई अपराधी थे। उनके अनुसार, यह पूरा विवाद बिहार के जरूरी मुद्दों — जैसे रोजगार, शिक्षा व्यवस्था और पेपर लीक — से जनता का ध्यान हटाने का माध्यम बन गया है।
आगे क्या
पप्पू यादव ने घोषणा की कि वे स्वयं अपने बच्चों को शिक्षकों का सम्मान करने की सीख देंगे। इस विवाद के शांत होने तक बिहार की शिक्षा राजनीति में तनाव बना रहने की संभावना है, और दोनों शिक्षकों की भूमिका सार्वजनिक विमर्श के केंद्र में रहेगी।