29 जून 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

क्या शिवाजी महाराज के किलों को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलना भारत के लिए गर्व की बात है?: सुसीबेन शाह

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
क्या शिवाजी महाराज के किलों को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलना भारत के लिए गर्व की बात है?: सुसीबेन शाह

सारांश

छत्रपति शिवाजी महाराज के किलों को यूनेस्को की सूची में शामिल किया गया है, जिससे भारत को गर्व महसूस हो रहा है। शिवसेना नेता सुसीबेन शाह ने इसे एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। जानिए उनकी प्रतिक्रियाएँ और इस पर होने वाली चर्चाएँ।

मुख्य बातें

शिवाजी महाराज के किलों की यूनेस्को में पहचान राष्ट्रीय गर्व का प्रतीक है।
महाराष्ट्र की संस्कृति और भाषा को बढ़ावा मिलता है।
महायुति सरकार ने हमेशा मराठी अस्मिता के लिए लड़ाई लड़ी है।
सभी राजनीतिक बयानों में तथ्यों की आवश्यकता है।
धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर हटाने का निर्णय उचित है।

मुंबई, 12 जुलाई (राष्ट्र प्रेस)। छत्रपति शिवाजी महाराज के 12 किलों को यूनेस्को की सूची में शामिल किए जाने पर व्यापक प्रशंसा हो रही है। शनिवार को शिवसेना नेता सुसीबेन शाह ने इसे एक गर्व की बात बताया।

उन्होंने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा, "शिवाजी महाराज के किलों को अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। यह महाराष्ट्र और देश के लिए गौरव का विषय है। महायुति सरकार ने हमेशा मराठी अस्मिता, भाषा और संस्कृति के लिए लड़ाई लड़ी है। एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में ‘मराठी गीत’ हर सरकारी कार्यक्रम में बजाया गया है। इसके साथ ही मराठी को क्लासिकल भाषा का दर्जा दिलाना भी एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।"

उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत के हालिया बयान पर सुसीबेन शाह ने पलटवार किया। उन्होंने कहा, "संजय राउत अक्सर बिना तथ्यों के आरोप लगाते हैं। उन्होंने कहा कि गुरु पूर्णिमा पर एकनाथ शिंदे ने दिल्ली जाकर अमित शाह की पूजा की, जबकि उस दिन अमित शाह दिल्ली में थे ही नहीं। ऐसे झूठे आरोप साबित करते हैं कि उन्हें इलाज की जरूरत है।"

अहमदाबाद प्लेन क्रैश पर शिवसेना नेता ने कहा, "रिपोर्ट में सामने आया है कि फ्यूल के दोनों स्विच बंद थे, यह कैसे हुआ, तकनीकी गड़बड़ी थी या सॉफ्टवेयर फेलियर, इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यह एक दुखद घटना है, और इसमें राजनीति नहीं होनी चाहिए।"

जन सुरक्षा कानून पर विपक्ष के आरोप को खारिज करते हुए उन्होंने कहा, "यह कानून आम नागरिकों के खिलाफ नहीं है, बल्कि उन संगठनों के लिए है जो देशविरोधी गतिविधियों में शामिल हैं। चंद्रपुर, गडचिरोली जैसे नक्सल प्रभावित इलाकों में विकास के रास्ते में रुकावट डालने वालों पर कार्रवाई आवश्यक है। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जजों की समिति के जरिए फैसला होता है, इसलिए यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है।"

धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर हटाने के फैसले का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा, "बच्चों की पढ़ाई, बुजुर्गों की नींद, सभी पर असर होता है, जब दिन में बार-बार लाउडस्पीकर बजते हैं। सरकार ने सही निर्णय लिया है कि रात 10 बजे के बाद लाउडस्पीकर नहीं बजेंगे। धार्मिक पर्वों पर सरकार से उम्मीद है कि समय सीमा में कुछ लचीलापन होगा, लेकिन आम नागरिकों की सहूलियत भी आवश्यक है।"

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह पूरे देश में सांस्कृतिक गर्व को भी बढ़ाती है।
RashtraPress
29 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या शिवाजी महाराज के किलों को यूनेस्को की सूची में शामिल करने का कोई महत्व है?
हाँ, यह किलों की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्वता को वैश्विक स्तर पर मान्यता देता है।
सुसीबेन शाह ने इस पर क्या कहा?
उन्होंने इसे पूरे महाराष्ट्र और देश के लिए गर्व का विषय बताया है।
क्या इस निर्णय से महाराष्ट्र की संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा?
जी हाँ, यह निर्णय मराठी संस्कृति और पहचान को बढ़ाने में मदद करेगा।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 8 महीने पहले
  2. 10 महीने पहले
  3. 11 महीने पहले
  4. 11 महीने पहले
  5. 11 महीने पहले
  6. 11 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले