राहुल-प्रियंका की हिरासत पर सीएम शिवकुमार का तीखा प्रहार, बोले- 'सच हमारे साथ, हौसला नहीं टूटेगा'
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने 7 अक्टूबर 2026 को दिल्ली पुलिस द्वारा कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और इंडिया गठबंधन के अन्य नेताओं को कथित तौर पर हिरासत में लिए जाने और उनके साथ दुर्व्यवहार किए जाने की कड़ी निंदा की। यह घटना जंतर-मंतर के निकट उस समय हुई जब विपक्षी नेता चुनावी प्रक्रिया — खासकर स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) और वोटर लिस्ट से जुड़े मुद्दों — पर शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन कर रहे थे।
शिवकुमार का बयान: 'सच हमारे साथ है'
शिवकुमार ने कहा, 'सच हमारे साथ है। आप हमारा हौसला नहीं तोड़ सकते।' उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और इंडिया गठबंधन के नेता चुनावी मुद्दों पर जवाबदेही तय करने और सवाल पूछने का अपना लोकतांत्रिक अधिकार इस्तेमाल कर रहे थे। उन्होंने कहा कि 'राजनीतिक मतभेदों के आधार पर निर्वाचित प्रतिनिधियों के खिलाफ कभी भी बल का प्रयोग उचित नहीं है।'
मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से प्रदर्शन के दौरान प्रियंका गांधी और अन्य महिला नेताओं के साथ हुए कथित बर्ताव पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह 'बेहद परेशान करने वाला' है। शिवकुमार ने कहा, 'असहमति को दबाने से लोकतंत्र मजबूत नहीं होता — यह तब मजबूत होता है जब सत्ता में बैठे लोग सुनने और जवाब देने का साहस रखें।'
सिद्धारमैया की कड़ी प्रतिक्रिया
कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस वर्किंग कमिटी के सदस्य सिद्धारमैया ने भी घटना की कड़ी भर्त्सना की। उन्होंने कहा, 'मैं जंतर-मंतर के पास दिल्ली पुलिस द्वारा विपक्ष के नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य नेताओं के साथ की गई शर्मनाक बदसलूकी और उनकी हिरासत की कड़ी निंदा करता हूँ।'
सिद्धारमैया ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के गृह मंत्रालय और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के अधीन काम करती है, इसलिए इस कार्रवाई की राजनीतिक ज़िम्मेदारी सत्ताधारी सरकार की है। उन्होंने कहा कि लगातार दो दिनों से विपक्षी नेताओं को तब रोका गया जब वे चुनाव आयोग (ECI) से SIR, वोटर लिस्ट में गड़बड़ियों और 'वोट चोरी' के बारे में जवाब मांग रहे थे।
विवाद की जड़: SIR और वोटर लिस्ट विवाद
विपक्षी दलों का आरोप है कि स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया के तहत वोटर लिस्ट में बड़े पैमाने पर हेरफेर किया जा रहा है और वैध मतदाताओं के नाम काटे जा रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब कई राज्यों में विधानसभा चुनाव की आहट है और चुनावी पारदर्शिता पर बहस तेज हो चुकी है। गौरतलब है कि यह दूसरे दिन की घटना है — कांग्रेस सहित इंडिया गठबंधन के नेता लगातार दो दिनों से इन्हीं मुद्दों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।
शिवकुमार ने कहा कि SIR, वोटर लिस्ट और हर नागरिक के वोट की सुरक्षा से जुड़े सवालों के लिए 'जबरदस्ती या बदसलूकी नहीं, बल्कि पारदर्शिता और जवाब की ज़रूरत है।' सिद्धारमैया ने भी चुनाव आयोग से अपील की कि वह इन चिंताओं पर खुलकर संवाद करे और चुनावी प्रक्रिया में जनता का भरोसा बहाल करे।
लोकतंत्र और जवाबदेही का सवाल
शिवकुमार ने जोर देकर कहा कि 'हर वोट की पवित्रता और लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोगों के भरोसे की रक्षा की जानी चाहिए।' उनके अनुसार, किसी भी तरह की जबरदस्ती या डराने-धमकाने से उन लोगों का संकल्प नहीं तोड़ा जा सकता जो चुनावी मुद्दों पर जवाब मांग रहे हैं।
यह विवाद आने वाले दिनों में संसदीय और राजनीतिक स्तर पर और तीखा होने के आसार हैं, क्योंकि विपक्षी दल इस मुद्दे को लोकतांत्रिक अधिकारों और चुनावी ईमानदारी की बड़ी लड़ाई के रूप में पेश कर रहे हैं।