राहुल गांधी पर एफआईआर के विरोध में कर्नाटक कांग्रेस का बेंगलुरु में प्रदर्शन, शिवकुमार बोले — जेल से नहीं डरते
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) ने बुधवार, 2 सितंबर को बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ उत्तराखंड में दर्ज कथित 'दुर्भावनापूर्ण' एफआईआर के विरोध में बड़ी रैली आयोजित की। प्रदर्शन का नेतृत्व केपीसीसी अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद ने किया और इसमें पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की व्यापक भागीदारी रही।
मुख्य घटनाक्रम
विरोध प्रदर्शन में पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया — जो कांग्रेस कार्य समिति (CWC) के सदस्य भी हैं — के अलावा अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के सचिव गोपीनाथ पलानियप्पन, केपीसीसी अभियान समिति के अध्यक्ष विनय कुमार सोराके, राज्य के मंत्री, विधायक और अनेक कांग्रेस नेता शामिल हुए। फ्रीडम पार्क में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता जुटे।
शिवकुमार की प्रतिक्रिया
सभा को संबोधित करते हुए कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि कांग्रेस न धमकियों से डरती है, न जेल से। उन्होंने कहा, 'हम जेल से नहीं डरते। हम धमकियों का सामना करने के लिए तैयार हैं। आप हमारी आवाज को उठने से नहीं रोक सकते। संविधान द्वारा गारंटीकृत मौलिक अधिकारों के लिए आवाज उठाना विपक्षी दलों का कर्तव्य है।'
शिवकुमार ने आगे कहा, 'यह ब्रिटिश राज नहीं है। कांग्रेस पार्टी ने ही देश को संविधान दिया, आज़ादी दिलाई और बोलने का अधिकार सुरक्षित किया। सैकड़ों नेता इन सबका सामना करने के लिए तैयार हैं। खड़गे और राहुल गांधी इसका सामना करेंगे।'
खड़गे के खिलाफ कार्रवाई की निंदा
शिवकुमार ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के खिलाफ की गई कार्रवाई की भी कड़ी निंदा की। उन्होंने इसे 'देश के सामाजिक ताने-बाने का बहुत बड़ा अपमान' करार दिया और कहा, 'ऐसा नहीं होना चाहिए था। उन्हें इसे तुरंत वापस ले लेना चाहिए। उन्हें सिर्फ मल्लिकार्जुन खड़गे से ही नहीं, बल्कि देश से भी माफी माँगनी चाहिए।'
कर्नाटक के नगर प्रशासन मंत्री एचसी बालकृष्ण ने भी खड़गे के खिलाफ कथित कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने सवाल उठाया, 'मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ जो किया है... क्या हमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ भी वैसा ही करना चाहिए? अगर वे ऐसी हरकतें करते रहेंगे, तो हमें भी वैसा ही करना होगा।'
आम जनता और विपक्ष पर असर
कांग्रेस नेताओं ने अधिकारियों पर विपक्ष के वरिष्ठ नेताओं को निशाना बनाने का आरोप लगाया। यह ऐसे समय में आया है जब देश भर में विपक्षी नेताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाइयों को लेकर राजनीतिक बहस तेज़ हो रही है। गौरतलब है कि राहुल गांधी पहले भी मानहानि मामले में दोषसिद्धि और बाद में राहत का सामना कर चुके हैं, जिससे यह प्रकरण उस लंबी कड़ी का हिस्सा बनता दिखता है।
आगे क्या होगा
कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि पार्टी असहमति को दबाने और संवैधानिक अधिकारों को कमज़ोर करने की कोशिशों के खिलाफ अपना विरोध जारी रखेगी। केपीसीसी के नेतृत्व ने संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में और प्रदर्शन हो सकते हैं।