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राहुल गांधी पर उत्तराखंड एफआईआर के विरोध में कांग्रेस का चंडीगढ़ में प्रदर्शन, हुड्डा बोले- 'हम नहीं डरते'

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राहुल गांधी पर उत्तराखंड एफआईआर के विरोध में कांग्रेस का चंडीगढ़ में प्रदर्शन, हुड्डा बोले- 'हम नहीं डरते'

सारांश

राहुल गांधी के खिलाफ उत्तराखंड में एफआईआर दर्ज होने पर कांग्रेस ने चंडीगढ़ में विरोध प्रदर्शन किया। हुड्डा से लेकर शिवकुमार तक, देशभर के नेताओं ने BJP पर निशाना साधा। विवाद की जड़ में है हल्द्वानी में खड़गे की रैली के बाद कथित 'शुद्धिकरण' अनुष्ठान।

मुख्य बातें

1 सितंबर को चंडीगढ़ में कांग्रेस ने राहुल गांधी पर दर्ज उत्तराखंड एफआईआर के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।
विवाद की शुरुआत हल्द्वानी में मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद BJP कार्यकर्ताओं द्वारा कथित 'शुद्धिकरण' अनुष्ठान से हुई।
राहुल गांधी ने SC-ST अधिनियम के तहत कार्रवाई की मांग की थी, जिसके बाद उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।
हरियाणा विपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा — 'न राहुल गांधी डरते हैं, न हम।' कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने एफआईआर को 'पूरी तरह राजनीतिक' करार दिया।
पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने दोषियों को सजा मिलने तक रोजाना प्रदर्शन की घोषणा की।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ उत्तराखंड में दर्ज एफआईआर के विरोध में कांग्रेस ने 1 सितंबर को चंडीगढ़ स्थित हरियाणा कांग्रेस कार्यालय के बाहर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में हरियाणा में विपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा, सांसद करमवीर सिंह बौद्ध, विधायक गीता भुक्कल और कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए, जिन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर तीखे हमले बोले।

विवाद की पृष्ठभूमि

यह पूरा विवाद हल्द्वानी, उत्तराखंड में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की जनसभा के बाद उस स्थल पर कथित तौर पर BJP कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए 'शुद्धिकरण' अनुष्ठान से जुड़ा है। राहुल गांधी ने इस घटना पर SC-ST अधिनियम के तहत कार्रवाई की मांग की थी, जिसके बाद उत्तराखंड में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।

नेताओं की प्रतिक्रिया

भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा, 'हम ऐसी चीजों से डरते नहीं हैं। न तो राहुल गांधी और न ही हम डरते हैं। राहुल गांधी ने मांग की थी कि हल्द्वानी में हुई घटना पर एफआईआर दर्ज की जाए, जहाँ हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष खड़गे ने एक जनसभा की थी और कुछ भाजपा कार्यकर्ताओं ने शुद्धिकरण की रस्म निभाई थी। यह एक जायज मांग थी, क्योंकि संविधान का उल्लंघन नहीं होना चाहिए। लेकिन इसके बजाय, उन्होंने राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी।'

सांसद करमवीर सिंह बौद्ध ने कहा, 'देश संविधान से चलेगा, मनुस्मृति से नहीं।' उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी कोई वरिष्ठ नेता दलितों, पिछड़े वर्गों और आदिवासियों की आवाज उठाता है, तो सत्ता पक्ष एफआईआर का सहारा लेता है। उनके अनुसार, यह रवैया 'बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है।'

विधायक गीता भुक्कल ने कहा कि भारत इस समय एक दुर्भाग्यपूर्ण दौर से गुजर रहा है, जहाँ आवाज उठाने वाले हर व्यक्ति को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा, 'यह हैरान करने वाली बात है कि जब हमारे नेता आवाज उठाते हैं, तो उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाती है।'

देशभर में कांग्रेस नेताओं की आवाज़

बेंगलुरु में कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज एफआईआर 'पूरी तरह से राजनीतिक' है। उन्होंने कहा, 'वह युवा पीढ़ी और देश के लिए लड़ रहे हैं। यह उनका संवैधानिक अधिकार है। हम सब उनके साथ खड़े हैं।'

लखनऊ में कांग्रेस के उत्तर प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने भी BJP पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी 'संविधान और कानून में विश्वास नहीं करती।' उन्होंने यह भी बताया कि जब खड़गे ने राज्यसभा में 'शुद्धिकरण' का मुद्दा उठाया, तब BJP अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा था कि वे ऐसी किसी भी हरकत की निंदा करते हैं।

पंजाब कांग्रेस एससी विभाग के इंचार्ज सुधीर चौधरी ने कहा कि पार्टी पंजाब के राज्यपाल को ज्ञापन सौंपेगी और यह विरोध प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा जब तक दोषियों को सजा नहीं मिल जाती।

आगे क्या होगा

पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष राजकुमार वेरका ने स्पष्ट किया कि पार्टी इन दोनों मामलों — 'शुद्धिकरण' की घटना और राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर — पर रोजाना विरोध प्रदर्शन करेगी। गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब हरियाणा में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियाँ जोरों पर हैं, और दलित मतदाता राज्य की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक तापमान और बढ़ने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जब वे खुद किसी घटना पर कार्रवाई की मांग कर रहे थे, प्रक्रियागत विरोधाभास पैदा करता है जिसे अदालत में चुनौती दी जा सकती है। गौरतलब है कि हरियाणा में चुनावी माहौल गर्म है और दलित मतदाताओं की संख्या राज्य में निर्णायक है — ऐसे में यह मुद्दा सड़क से विधानसभा तक जाने की पूरी क्षमता रखता है। जेपी नड्डा की राज्यसभा में निंदा और उत्तराखंड पुलिस की एफआईआर के बीच का अंतर्विरोध BJP के लिए भी असहज सवाल खड़े करता है।
RashtraPress
1 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राहुल गांधी के खिलाफ उत्तराखंड में एफआईआर क्यों दर्ज हुई?
राहुल गांधी ने हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद BJP कार्यकर्ताओं द्वारा कथित 'शुद्धिकरण' अनुष्ठान पर SC-ST अधिनियम के तहत कार्रवाई की मांग की थी। इसके जवाब में उत्तराखंड में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।
हल्द्वानी 'शुद्धिकरण' विवाद क्या है?
कांग्रेस का आरोप है कि उत्तराखंड के हल्द्वानी में मल्लिकार्जुन खड़गे की जनसभा के बाद BJP कार्यकर्ताओं ने उस स्थल पर 'शुद्धिकरण' अनुष्ठान किया। कांग्रेस इसे दलित विरोधी और संविधान का उल्लंघन बताती है, जबकि BJP अध्यक्ष जेपी नड्डा ने राज्यसभा में ऐसी किसी भी हरकत की निंदा की थी।
चंडीगढ़ विरोध प्रदर्शन में कौन-कौन शामिल थे?
1 सितंबर को चंडीगढ़ में हरियाणा कांग्रेस कार्यालय के बाहर हुए प्रदर्शन में हरियाणा विपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा, सांसद करमवीर सिंह बौद्ध, विधायक गीता भुक्कल और पंजाब कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए।
कांग्रेस आगे क्या कदम उठाएगी?
पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने घोषणा की है कि वह पंजाब के राज्यपाल को ज्ञापन सौंपेगी और दोषियों को सजा मिलने तक रोजाना विरोध प्रदर्शन जारी रखेगी। देशभर में पार्टी के नेता इस मुद्दे पर एकजुट होकर आवाज उठा रहे हैं।
BJP ने 'शुद्धिकरण' घटना पर क्या कहा?
BJP अध्यक्ष जेपी नड्डा ने राज्यसभा में कहा था कि वे ऐसी किसी भी हरकत की निंदा करते हैं। हालाँकि, कांग्रेस का कहना है कि इस बयान और उत्तराखंड में राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज एफआईआर के बीच विरोधाभास स्पष्ट है।
राष्ट्र प्रेस
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