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राहुल गांधी पर उत्तराखंड एफआईआर: प्रियांक खड़गे बोले 'राजनीतिक साजिश', भाजपा ने किया पलटवार

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राहुल गांधी पर उत्तराखंड एफआईआर: प्रियांक खड़गे बोले 'राजनीतिक साजिश', भाजपा ने किया पलटवार

सारांश

उत्तराखंड में राहुल गांधी पर दर्ज एफआईआर ने दलित अस्मिता की राजनीति को केंद्र में ला दिया है। एक तरफ विपक्ष इसे संवैधानिक सवाल बता रहा है, दूसरी तरफ भाजपा इसे सांस्कृतिक भावनाओं के अपमान से जोड़ रही है — यह टकराव आने वाले दिनों में और तीखा होने के आसार हैं।

मुख्य बातें

उत्तराखंड में वाल्मीकि समुदाय के एक व्यक्ति ने राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई, जब उन्होंने 'शुद्धिकरण यज्ञ' को दलित-विरोधी बताया।
कर्नाटक मंत्री प्रियांक खड़गे ने एफआईआर को राजनीतिक मकसद से प्रेरित बताया और कहा कि मामला शुद्धिकरण करने वालों पर दर्ज होना चाहिए था।
जेएमएम प्रवक्ता मनोज पांडे ने इसे दलित समाज का अपमान करार देते हुए भाजपा की आलोचना की।
भाजपा सांसद अनंत नायक ने राहुल गांधी के बयान को भारतीय संस्कृति की अज्ञानता और दलित-विरोधी बताया।
मंत्री दिलीप घोष ने चेतावनी दी कि कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश पर कार्रवाई होगी।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ उत्तराखंड में दर्ज एफआईआर ने राष्ट्रीय राजनीति में नया तूफान खड़ा कर दिया है। वाल्मीकि समुदाय के एक व्यक्ति ने यह मामला तब दर्ज कराया जब राहुल गांधी ने एक कार्यक्रम स्थल पर किए गए तथाकथित 'शुद्धिकरण यज्ञ' को दलित-विरोधी करार दिया था। इस घटनाक्रम पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है।

प्रियांक खड़गे का पलटवार

कर्नाटक सरकार के मंत्री प्रियांक खड़गे ने इस एफआईआर को सीधे तौर पर राजनीति से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा, 'यह सब राजनीतिक मकसद से किया गया है। उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के बजाय जिन्होंने 'शुद्धिकरण' का काम किया और पूरे शहर में घूम-घूमकर बताया कि उन्होंने उस जगह को शुद्ध कर दिया है क्योंकि वहां एक दलित नेता ने भाषण दिया था, उनके खिलाफ मामला दर्ज होना चाहिए। आप उस व्यक्ति के खिलाफ केस दर्ज कर रहे हैं जिसने इस गैरकानूनी काम की आलोचना की और सवाल उठाया कि संविधान का उल्लंघन कैसे हो रहा है।'

गौरतलब है कि जिस कार्यक्रम स्थल की चर्चा है, वह कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के कार्यक्रम से जुड़ा था। प्रियांक खड़गे के अनुसार, एफआईआर उस व्यक्ति पर होनी चाहिए थी जिसने यह कृत्य किया, न कि उस नेता पर जिसने इसकी आलोचना की।

जेएमएम का तीखा बयान

झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के प्रवक्ता मनोज पांडे ने इस पूरे प्रकरण को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की 'गंदी मानसिकता' का परिचायक बताया। उन्होंने कहा, 'एक दलित का बेटा, देश के वरिष्ठ और अनुभवी नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के कार्यक्रम स्थल का शुद्धिकरण करवा कर, क्योंकि वो एक दलित थे। क्या दलित होना गुनाह है? आप हरिजन को क्या समझते हैं? इस तरह की कृति वहां देखी गई और उन पर एफआईआर करने के लिए आवेदन पड़ा हुआ है, लेकिन एफआईआर उन पर नहीं हुआ। प्रतिपक्ष के नेता को कहीं न कहीं प्रताड़ित किया गया, अपमानित किया गया।'

भाजपा का पक्ष

सत्तारूढ़ दल की ओर से सांसद अनंत नायक ने राहुल गांधी के बयान को पूरी तरह गलत ठहराया। उन्होंने कहा, 'राहुल गांधी को भारत की संस्कृति की सही जानकारी नहीं है। जिस जगह पर हवन हो रहा था, वहां ऐसी बातें कहना दलितों का अपमान है, क्योंकि भारत की संस्कृति, सनातन संस्कृति और हिंदू संस्कृति में सभी शामिल हैं — आदिवासी, दलित और सभी समुदाय। हवन सनातन संस्कृति का एक अहम हिस्सा है। राहुल गांधी जो कह रहे हैं, वह पूरी तरह गलत है और दलितों का अपमान है।'

मंत्री दिलीप घोष ने इस विवाद पर संयमित रुख अपनाते हुए कहा, 'कहीं भी जाने पर कोई रोक नहीं है, लेकिन अगर कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश की गई, तो निश्चित रूप से कार्रवाई की जाएगी।'

विवाद की जड़ क्या है

यह विवाद तब शुरू हुआ जब उत्तराखंड में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के बाद उस स्थल पर 'शुद्धिकरण यज्ञ' किए जाने की खबरें आईं, जहाँ कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भाषण दिया था। राहुल गांधी ने इस कृत्य को दलित-विरोधी और असंवैधानिक बताया। इसके बाद वाल्मीकि समुदाय के एक व्यक्ति ने राहुल गांधी के बयान को लेकर एफआईआर दर्ज कराई।

आगे क्या होगा

यह मामला अब कानूनी और राजनीतिक — दोनों मोर्चों पर आगे बढ़ने की संभावना है। विपक्ष इसे दलित अस्मिता और संवैधानिक अधिकारों का सवाल बता रहा है, जबकि सत्ता पक्ष राहुल गांधी के बयान को सांस्कृतिक भावनाओं पर आघात करार दे रहा है। आने वाले दिनों में इस विवाद के संसद के भीतर और बाहर गूँजने की पूरी संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

भाजपा का यह कहना कि हवन सनातन संस्कृति का अंग है और उस पर टिप्पणी अपमानजनक है, इस बहस को धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान की जमीन पर ले जाता है। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूकती है वह यह है कि इस पूरे प्रकरण में दलित समुदाय की आवाज़ — जो वास्तव में इस विवाद के केंद्र में होनी चाहिए — सबसे कम सुनाई दे रही है।
RashtraPress
16 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राहुल गांधी के खिलाफ उत्तराखंड में एफआईआर क्यों दर्ज हुई?
राहुल गांधी ने एक कार्यक्रम स्थल पर किए गए तथाकथित 'शुद्धिकरण यज्ञ' को दलित-विरोधी और असंवैधानिक बताया था। इसके बाद वाल्मीकि समुदाय के एक व्यक्ति ने उनके बयान को लेकर एफआईआर दर्ज कराई।
शुद्धिकरण यज्ञ विवाद क्या है?
उत्तराखंड में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के एक कार्यक्रम के बाद उस स्थल पर 'शुद्धिकरण यज्ञ' किए जाने की खबरें आईं। विपक्ष का आरोप है कि यह इसलिए किया गया क्योंकि खड़गे दलित हैं, जो संवैधानिक मूल्यों का उल्लंघन है।
प्रियांक खड़गे ने एफआईआर पर क्या कहा?
कर्नाटक मंत्री प्रियांक खड़गे ने एफआईआर को राजनीतिक मकसद से प्रेरित बताया। उनका कहना है कि मामला शुद्धिकरण करने वालों पर दर्ज होना चाहिए था, न कि उस नेता पर जिसने इस कृत्य की आलोचना की।
भाजपा का इस मामले पर क्या रुख है?
भाजपा सांसद अनंत नायक ने राहुल गांधी के बयान को सनातन संस्कृति और दलित समाज दोनों का अपमान बताया। मंत्री दिलीप घोष ने कहा कि कानून-व्यवस्था बिगाड़ने पर कार्रवाई होगी।
जेएमएम ने इस विवाद पर क्या कहा?
झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रवक्ता मनोज पांडे ने इसे भाजपा की 'गंदी मानसिकता' का परिचायक बताया। उन्होंने कहा कि दलित नेता के कार्यक्रम स्थल का शुद्धिकरण करना दलित समाज का सीधा अपमान है और इस पर कार्रवाई होनी चाहिए थी।
राष्ट्र प्रेस
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