31 अगस्त 2026
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राहुल गांधी पर उत्तराखंड एफआईआर: भाजपा ने बताया 'जाति विभाजन', कांग्रेस बोली — संविधान पर हमला

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राहुल गांधी पर उत्तराखंड एफआईआर: भाजपा ने बताया 'जाति विभाजन', कांग्रेस बोली — संविधान पर हमला

सारांश

राहुल गांधी के 'शुद्धिकरण यज्ञ' वाले बयान पर उत्तराखंड में दर्ज एफआईआर ने राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है — भाजपा इसे जातीय विभाजन का मामला बता रही है, जबकि कांग्रेस इसे संविधान और दलितों पर हमला करार दे रही है। मामला अब अदालत में है।

मुख्य बातें

राहुल गांधी के उत्तराखंड में 'शुद्धिकरण यज्ञ' को दलित विरोधी बताने के बयान पर वाल्मीकि समुदाय के एक सदस्य ने एफआईआर दर्ज कराई।
बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने एफआईआर का समर्थन करते हुए कहा कि राहुल ने जाति और समाज को बाँटने वाला गलत नैरेटिव बनाया।
भाजपा नेता नरोत्तम मिश्रा ने राहुल पर सनातन और संस्कृति पर हमले का आरोप लगाया।
शिवसेना प्रवक्ता शायना एनसी ने कहा कि मामले का फैसला न्यायालय करेगा; SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम का हवाला दिया।
पंजाब कांग्रेस उपाध्यक्ष राजकुमार वेरका ने अमृतसर में एफआईआर को दलितों और संविधान का अपमान करार दिया।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा उत्तराखंड में 'शुद्धिकरण यज्ञ' को दलित विरोधी बताने के बयान के खिलाफ दर्ज एफआईआर ने राष्ट्रीय राजनीति में नई तल्खी पैदा कर दी है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस एफआईआर का समर्थन करते हुए राहुल पर जातीय विभाजन और नफरत फैलाने का आरोप लगाया है, जबकि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) ने इसे दलितों और संविधान के अपमान की संज्ञा दी है।

एफआईआर की पृष्ठभूमि

वाल्मीकि समुदाय के एक सदस्य ने राहुल गांधी के खिलाफ यह शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि राहुल गांधी ने 'शुद्धिकरण यज्ञ' को दलित विरोधी बताकर जाति और समाज को बाँटने वाला गलत नैरेटिव गढ़ा। यह ऐसे समय में आया है जब देश में जाति जनगणना और सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दे राजनीतिक केंद्र में हैं।

भाजपा की प्रतिक्रिया

बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा, 'राहुल गांधी पहले दूसरों के खिलाफ एफआईआर की माँग करते थे, अब उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है। वाल्मीकि समुदाय के एक व्यक्ति ने एफआईआर दर्ज कराई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि राहुल गांधी ने जाति और समाज को बाँटकर गलत नैरेटिव बनाया। राहुल गांधी ने जिस तरह से इस मुद्दे पर बात की है, वह किसी भी स्थिति में सही नहीं है।'

भाजपा नेता नरोत्तम मिश्रा ने और तीखे शब्दों में कहा, 'जातियों को बाँटना उनका काम है। नफरत फैलाना उनका काम है। उनके पास कोई और काम नहीं है। राहुल गांधी ने सनातन और हमारी संस्कृति पर हमला किया है।'

शिवसेना प्रवक्ता शायना एनसी ने संयत स्वर में कहा, 'एफआईआर राजनीतिक बदले की भावना का मामला नहीं है। अगर दलित समुदाय के किसी व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई है, तो न्यायालय ने उस पर संज्ञान लिया है। राहुल गांधी को अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के बारे में पता होना चाहिए। इस पर अब जो फैसला होगा वो न्यायालय का होगा।'

कांग्रेस का पलटवार

पंजाब कांग्रेस के उपाध्यक्ष राजकुमार वेरका ने अमृतसर में कहा, 'मुझे लगता है कि भाजपा घबराई हुई है। राहुल गांधी दलितों की रक्षा कर रहे हैं और देश के संविधान की रक्षा करने की कोशिश कर रहे हैं। उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर दलितों का अपमान है। यह देश के संविधान का अपमान है और हम संविधान के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं करेंगे।'

आम जनता और दलित समुदाय पर असर

गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब दलित अधिकारों और सामाजिक न्याय के सवाल राष्ट्रीय बहस के केंद्र में हैं। एक ओर वाल्मीकि समुदाय के एक वर्ग ने एफआईआर दर्ज कराकर अपनी आपत्ति दर्ज की है, तो दूसरी ओर कांग्रेस का तर्क है कि राहुल गांधी का बयान दलित हितों की रक्षा के लिए था। इस परस्पर विरोधी व्याख्या ने दलित राजनीति के इर्द-गिर्द नई बहस छेड़ दी है।

आगे क्या होगा

मामला अब न्यायालय के समक्ष है और शायना एनसी के अनुसार अंतिम निर्णय अदालत का होगा। राजनीतिक दलों की यह तीखी नोकझोंक आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है, खासकर जब संसद का अगला सत्र नजदीक आएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि कांग्रेस राहुल गांधी को दलित हितों के रक्षक के रूप में प्रस्तुत कर रही है — दोनों ही कथन चुनावी गणित से प्रेरित हैं। असली सवाल यह है कि 'शुद्धिकरण यज्ञ' जैसी धार्मिक-सामाजिक प्रथाओं पर सार्वजनिक बहस की सीमा कहाँ तय होगी — संसद में, अदालत में, या चुनावी मंच पर।
RashtraPress
31 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राहुल गांधी के खिलाफ उत्तराखंड में एफआईआर क्यों दर्ज हुई?
राहुल गांधी ने उत्तराखंड में 'शुद्धिकरण यज्ञ' को दलित विरोधी बताने वाला बयान दिया था। इसके बाद वाल्मीकि समुदाय के एक सदस्य ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई, जिसमें आरोप लगाया गया कि उनके बयान ने जाति और समाज को बाँटने का काम किया।
भाजपा ने इस एफआईआर पर क्या रुख अपनाया?
भाजपा ने एफआईआर का समर्थन किया है। बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि राहुल गांधी का बयान किसी भी स्थिति में सही नहीं है, जबकि नरोत्तम मिश्रा ने उन पर जातीय विभाजन और सनातन संस्कृति पर हमले का आरोप लगाया।
कांग्रेस ने इस एफआईआर का विरोध क्यों किया?
कांग्रेस का कहना है कि राहुल गांधी दलितों और संविधान की रक्षा कर रहे हैं। पंजाब कांग्रेस उपाध्यक्ष राजकुमार वेरका ने इस एफआईआर को दलितों और देश के संविधान का अपमान बताया और कहा कि पार्टी इसे बर्दाश्त नहीं करेगी।
शिवसेना का इस मामले पर क्या कहना है?
शिवसेना प्रवक्ता शायना एनसी ने कहा कि यह एफआईआर राजनीतिक बदले की भावना से नहीं है और मामले का अंतिम फैसला न्यायालय करेगा। उन्होंने SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम का हवाला देते हुए कहा कि राहुल गांधी को इस कानून की जानकारी होनी चाहिए।
यह मामला आगे कहाँ जाएगा?
मामला अब न्यायालय के समक्ष है। शिवसेना ने भी स्पष्ट किया है कि अदालत ही इस पर अंतिम निर्णय देगी। राजनीतिक रूप से यह विवाद आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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