हल्द्वानी 'शुद्धिकरण' विवाद पर संदीप दीक्षित का हमला, नीट-पीजी सिस्टम पर भी उठाए सवाल
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता संदीप दीक्षित ने 30 अगस्त को हल्द्वानी में हुए कथित 'शुद्धिकरण' विवाद और जयपुर में नीट-पीजी 2026 परीक्षा के दौरान बिजली गुल होने की घटना पर सरकार को आड़े हाथों लिया। दीक्षित ने दोनों मुद्दों को केंद्र सरकार की नीतिगत विफलताओं से जोड़ते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी।
हल्द्वानी 'शुद्धिकरण' विवाद पर कांग्रेस का रुख
संदीप दीक्षित ने कहा कि यह मुद्दा कांग्रेस लंबे समय से उठाती रही है। उन्होंने 'संकल्प सभा' कार्यक्रम का हवाला दिया, जिसमें एक व्यक्ति ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से इस विषय पर सवाल किया था। दीक्षित ने कहा, 'जब खड़गे ने जवाब दिया, तो उनकी आवाज में गहरा दर्द था। उन्होंने ज्यादा कुछ नहीं कहा, लेकिन उनके भीतर से दर्द की एक गहरी भावना झलक रही थी।'
दीक्षित ने उत्तराखंड के सत्तारूढ़ दल के नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि वे सफाई दे रहे हैं और दावा कर रहे हैं कि कुछ नारे लगाए जाने के कारण 'शुद्धिकरण' किया गया। उन्होंने कहा, 'यह 'शुद्धिकरण' शब्द — हर कोई जानता है कि इसे किस संदर्भ में इस्तेमाल किया जा रहा है।' आलोचकों का कहना है कि इस तरह की घटनाएँ सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा देती हैं।
नीट-पीजी परीक्षा प्रणाली पर सवाल
जयपुर में नीट-पीजी 2026 परीक्षा के दौरान बिजली जाने से परीक्षार्थियों को हुई परेशानी पर दीक्षित ने कहा कि बिजली जाना या प्रबंधन की खामी मुख्य समस्या नहीं है। उन्होंने कहा, 'मुद्दा यह है कि हम पूरे नीट सिस्टम पर ही सवाल उठा रहे हैं। पहले तो सब कुछ सेंट्रलाइज कर दिया गया है।'
दीक्षित ने अपने स्वयं के अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने लगभग दस कॉलेजों का दौरा कर अपना मेडिकल कॉलेज चुना था और उन्हें उस तरह का संघर्ष नहीं करना पड़ा जैसा आज के छात्रों को करना पड़ता है। उन्होंने कहा, 'आप बच्चों को ऐसा सिस्टम दे रहे हैं जिसमें वे परेशान होकर भटक रहे हैं।'
भरोसे का संकट
दीक्षित ने चेतावनी दी कि चिकित्सा शिक्षा में प्रवेश की मौजूदा प्रक्रिया पर अब 'किसी को भरोसा नहीं है।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब नीट परीक्षाओं को लेकर पूरे देश में विवाद चल रहा है और विपक्ष इसे केंद्रीकृत शिक्षा नीति की विफलता के रूप में प्रस्तुत कर रहा है। गौरतलब है कि नीट-यूजी पेपर लीक विवाद के बाद से परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पहले से ही दबाव में है।
आगे क्या
हल्द्वानी 'शुद्धिकरण' प्रकरण पर कांग्रेस के और नेता भी आने वाले दिनों में अपना रुख स्पष्ट कर सकते हैं। नीट-पीजी परीक्षा में हुई तकनीकी खामियों की जाँच की माँग भी तेज़ होने की संभावना है। विपक्ष इन दोनों मुद्दों को मिलाकर सरकार पर राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है।