13 अक्टूबर 2026
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शांतिपूर्ण विरोध पर CM शिवकुमार का बड़ा बयान: 'दोहरा मापदंड नहीं चलेगा, ज़्यादती हुई तो जवाबदेही तय होगी'

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शांतिपूर्ण विरोध पर CM शिवकुमार का बड़ा बयान: 'दोहरा मापदंड नहीं चलेगा, ज़्यादती हुई तो जवाबदेही तय होगी'

सारांश

कर्नाटक के CM शिवकुमार ने एक्स पर साफ कहा — दिल्ली में विरोध का अधिकार माँगो और बेंगलुरु में रोको, यह नहीं चलेगा। बेंगलुरु में पुलिस के कथित बल प्रयोग के बाद उन्होंने जाँच के आदेश दिए और ज़्यादती साबित होने पर जवाबदेही का वादा किया।

मुख्य बातें

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने 13 अक्टूबर 2026 को एक्स पर पोस्ट कर शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार का समर्थन किया।
उन्होंने कहा कि बेंगलुरु में प्रदर्शनकारियों और मीडियाकर्मियों के बीच हुई घटना की पूरी रिपोर्ट मांगी गई है।
पुलिस द्वारा अनावश्यक बल प्रयोग या ज़्यादती साबित होने पर जवाबदेही तय करने का आश्वासन दिया।
कांग्रेस (INC) राष्ट्रीय स्तर पर चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध कर रही है; नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की है।
शिवकुमार ने कहा — 'कोई दोहरा मापदंड नहीं चलेगा; कर्नाटक को उन्हीं लोकतांत्रिक मानकों का पालन करना होगा जो हम देश से चाहते हैं।'

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार लोकतंत्र का मूलभूत स्तंभ है और इस मामले में किसी भी प्रकार का दोहरा मापदंड स्वीकार्य नहीं होगा। यह बयान बेंगलुरु में एक विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों और मीडियाकर्मियों के बीच हुई झड़प तथा पुलिस द्वारा कथित बल प्रयोग की घटना के बाद आया है।

मुख्यमंत्री का पूरा बयान

शिवकुमार ने एक्स पर लिखा, 'शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार हमारे लोकतंत्र का अहम हिस्सा है। हम दिल्ली में तो अपने लिए यह अधिकार मांगें और बेंगलुरु में दूसरों को इससे रोकें, ऐसा नहीं हो सकता।' उन्होंने आगे कहा कि उन्होंने सोमवार को प्रदर्शनकारियों और मीडियाकर्मियों के बीच हुई घटना पर ध्यान दिया है और उन परिस्थितियों की पूरी रिपोर्ट मांगी है जिनकी वजह से पुलिस को कार्रवाई करनी पड़ी।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी: 'अगर बल का अनावश्यक इस्तेमाल या ज़्यादती हुई है, तो जवाबदेही तय की जाएगी।' यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें उन्होंने अपनी ही सरकार की पुलिस कार्रवाई पर जाँच का आश्वासन दिया।

लोकतांत्रिक मानकों पर कर्नाटक की प्रतिबद्धता

शिवकुमार ने अपनी पोस्ट में यह भी जोड़ा कि 'चुनाव आयोग से असहमति, मेरी सरकार से असहमति या मुझसे व्यक्तिगत रूप से असहमति होने पर भी शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात कहने का अधिकार कम नहीं हो जाता।' उन्होंने कहा कि कर्नाटक को उन लोकतांत्रिक मानकों का पालन करना चाहिए जिनकी उम्मीद देश के बाकी हिस्सों से की जाती है।

विरोध प्रदर्शन की पृष्ठभूमि

यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) राष्ट्रीय स्तर पर चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रही है। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर वोट चोरी का आरोप लगाते हुए सर्वोच्च न्यायालय में याचिका भी दायर की है।

गौरतलब है कि इसी पृष्ठभूमि में विपक्ष ने कर्नाटक सरकार पर सवाल उठाए थे — अगर दिल्ली में विरोध का अधिकार माँगा जा रहा है, तो बेंगलुरु में उसे क्यों रोका जा रहा है? यह वही दोहरे मापदंड का आरोप है जिसका जवाब शिवकुमार ने अपनी एक्स पोस्ट में दिया।

पुलिस कार्रवाई पर जाँच का आदेश

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उन्होंने बेंगलुरु पुलिस से उन सभी हालात की पूरी रिपोर्ट माँगी है जिनकी वजह से प्रदर्शनकारियों और मीडियाकर्मियों के बीच झड़प हुई। प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग के आरोपों की जाँच कर जवाबदेही तय करने का आश्वासन दिया गया है।

राजनीतिक संदर्भ और आगे का रास्ता

शिवकुमार का यह बयान केवल एक घटना की प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि एक व्यापक राजनीतिक संदेश भी है। यह ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठा रही है। आलोचकों का कहना है कि राज्य सरकारों को विपक्षी दलों के प्रति वही रवैया अपनाना चाहिए जो वे केंद्र से अपने लिए चाहती हैं। पुलिस जाँच रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि सरकार जवाबदेही के अपने वादे पर कितनी दूर तक अमल करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा पुलिस जाँच के नतीजे और उन पर की जाने वाली कार्रवाई होगी। गौरतलब है कि सत्ताधारी दल से जुड़े नेताओं के नेतृत्व में हुए विरोधों पर पुलिस का रवैया प्रायः नरम रहता है, जबकि विपक्षी प्रदर्शनों में बल प्रयोग की शिकायतें देश भर में आम हैं। 'जवाबदेही तय होगी' की घोषणा बिना स्वतंत्र जाँच तंत्र के महज़ आश्वासन ही रहती है। अगर कर्नाटक वास्तव में लोकतांत्रिक मानक स्थापित करना चाहता है, तो रिपोर्ट सार्वजनिक करनी होगी और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई दिखानी होगी।
RashtraPress
13 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

CM शिवकुमार ने शांतिपूर्ण विरोध पर क्या कहा?
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार लोकतंत्र का अहम हिस्सा है और इसमें कोई दोहरा मापदंड नहीं चलेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार, चुनाव आयोग या उनसे व्यक्तिगत असहमति होने पर भी शांतिपूर्ण अभिव्यक्ति का अधिकार नहीं छिना जा सकता।
बेंगलुरु में किस घटना के बाद यह बयान आया?
बेंगलुरु में एक विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों और मीडियाकर्मियों के बीच झड़प हुई, जिसमें पुलिस पर कथित तौर पर अनावश्यक बल प्रयोग के आरोप लगे। इसी घटना के बाद शिवकुमार ने एक्स पर अपना बयान जारी किया और पूरी रिपोर्ट तलब की।
क्या पुलिस कार्रवाई की जाँच होगी?
हाँ, मुख्यमंत्री शिवकुमार ने कहा है कि उन्होंने उन परिस्थितियों की पूरी रिपोर्ट माँगी है जिनकी वजह से पुलिस को कार्रवाई करनी पड़ी। अगर बल का अनावश्यक इस्तेमाल या ज़्यादती साबित होती है, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
कांग्रेस और चुनाव आयोग विवाद का इस घटना से क्या संबंध है?
कांग्रेस इन दिनों राष्ट्रीय स्तर पर चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रही है और लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। इस संदर्भ में विपक्ष ने कर्नाटक सरकार पर सवाल उठाए थे कि दिल्ली में विरोध का अधिकार माँगते हुए बेंगलुरु में प्रदर्शन रोकना दोहरा मापदंड है।
शिवकुमार ने 'दोहरे मापदंड' का ज़िक्र क्यों किया?
विपक्ष ने आरोप लगाया था कि कांग्रेस केंद्र में विरोध का अधिकार माँगती है, लेकिन अपने शासित राज्य कर्नाटक में प्रदर्शनकारियों पर पुलिस बल का इस्तेमाल होता है। शिवकुमार ने इसी आरोप का जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि कर्नाटक में कोई दोहरा मापदंड नहीं अपनाया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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