राहुल गांधी के सुरक्षाकर्मियों ने CM शिवकुमार को धक्का दिया, BJP बोली — 'कांग्रेस शैली का अपमान'
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली में एक विरोध मार्च के दौरान लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के सुरक्षाकर्मियों ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को धक्का दे दिया, जिसके बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कांग्रेस नेतृत्व पर तीखा हमला बोला। 13 अक्टूबर 2026 को BJP ने इस घटना को लेकर सवाल उठाया कि अपनी ही पार्टी का हाईकमान एक मौजूदा मुख्यमंत्री को कितना सम्मान देता है।
घटनाक्रम: क्या हुआ विरोध मार्च में
BJP4India ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर इस घटना का एक वीडियो साझा किया, जिसमें मुख्यमंत्री शिवकुमार को धक्का लगता दिखाया गया। पोस्ट में शिवकुमार पर कटाक्ष करते हुए कहा गया कि वे विरोध प्रदर्शन में तो आए, लेकिन 'केतली से भाप की तरह गायब हो गए।' BJP ने अपने पोस्ट में लिखा, "राहुल गांधी एक मौजूदा मुख्यमंत्री के साथ ऐसा व्यवहार करते हैं। कोई सम्मान नहीं, कोई आदर नहीं, बस कांग्रेस शैली का अपमान।"
कर्नाटक BJP अध्यक्ष विजयेंद्र की प्रतिक्रिया
कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष और विधायक विजयेंद्र ने भी यही वीडियो साझा करते हुए कांग्रेस नेतृत्व की आलोचना की। उन्होंने कहा, "आप राज्य में घूम घूम कर जो चाहें कह सकते हैं, लेकिन आपको अपने हाईकमान के गलियारों में कितना सम्मान और गरिमा मिलती है, यह पूरी दुनिया में सार्वजनिक जानकारी का विषय है!" विजयेंद्र ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे किसी कन्नड़ भाषी का अपमान कन्नड़ भाषियों के सामूहिक गौरव का प्रश्न है।
उन्होंने शिवकुमार पर सीधा कटाक्ष करते हुए पूछा, "क्या आपने इतना आत्मसम्मान बचाए रखा है कि आप अपने हाईकमान को इस बारे में बता सकें?" गौरतलब है कि BJP अक्सर कांग्रेस में 'हाईकमान संस्कृति' को निशाना बनाती रही है और यह घटना उसे वैसा ही अवसर देती है।
कांग्रेस सरकार का बचाव: परमेश्वर का जवाब
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने 13 अक्टूबर को बेंगलुरु में पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि बड़े विरोध प्रदर्शनों में सुरक्षा व्यवस्था का प्रबंधन स्वाभाविक रूप से चुनौतीपूर्ण होता है। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी की सुरक्षा सुनिश्चित करना वहाँ तैनात कर्मियों की प्राथमिक जिम्मेदारी है और अनधिकृत पहुँच रोकना सुरक्षा प्रोटोकॉल का हिस्सा है।
परमेश्वर ने कहा, "दुर्भाग्यवश, उस समय मुख्यमंत्री भी वहाँ थे और भीड़ के बीच उन्हें हल्का धक्का लगा।" उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अतीत में विरोध प्रदर्शनों में उन्हें भी ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ा है, और भीड़ को नियंत्रित करना कभी आसान नहीं होता।
आम जनता और राजनीतिक असर
यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में कांग्रेस सरकार पहले से ही कई आंतरिक दबावों का सामना कर रही है। BJP का यह आक्रामक रुख कन्नड़ अस्मिता के प्रश्न को सामने रखकर राज्य में कांग्रेस की छवि को नुकसान पहुँचाने की रणनीति का हिस्सा प्रतीत होता है। यह घटना कांग्रेस की केंद्रीय कमान और राज्य नेतृत्व के बीच तनाव की व्यापक चर्चा को फिर से हवा दे सकती है।
आगे देखें तो शिवकुमार की इस पर प्रतिक्रिया — या चुप्पी — खुद अपना राजनीतिक संदेश देगी।