शिवपाल यादव का BJP पर करारा तंज: 'राम मंदिर में चढ़ावा चोरी, फिर कैसे मानें सच्चे सनातनी'
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवपाल यादव ने 22 अक्टूबर 2026 को कानपुर में एक कार्यक्रम के दौरान भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं को 'सच्चा सनातनी' मानने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने BJP की केंद्र और राज्य दोनों सरकारों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यूपी विधानसभा चुनाव 2027 'किस्मत बदलने वाला चुनाव' होगा।
मुख्य घटनाक्रम
शिवपाल यादव गुरुवार को कानपुर पहुँचे, जहाँ उन्होंने एक पार्टी कार्यक्रम को संबोधित किया। मीडिया ने उनसे पश्चिम बंगाल के नेता सुवेंदु अधिकारी के सनातन-संबंधी बयान पर प्रतिक्रिया माँगी, जिस पर शिवपाल ने कहा, 'हम लोग सेक्युलर हैं और हमारे पीडीए संगठन के सिद्धांतों पर चल रहे हैं।'
शिवपाल यादव ने BJP की सरकारों को 'झूठी सरकार' बताया और भ्रष्टाचार का सीधा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जब राम मंदिर में चढ़ावा तक चोरी हो गई, तो ऐसे में BJP नेताओं के खुद को 'सनातनी' कहने पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
सनातन विमर्श और चुनावी संदर्भ
यह बयान ऐसे समय में आया है जब 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र सनातन धर्म का राजनीतिक एजेंडा एक बार फिर केंद्र में आ गया है। गौरतलब है कि इससे पहले भी कई विपक्षी नेता BJP के धार्मिक दावों को 'राजनीतिक दिखावा' करार देते रहे हैं। शिवपाल का यह बयान उसी क्रम की एक कड़ी है, जो मतदाताओं को — विशेष रूप से पीडीए (पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक) वर्ग को — सीधे संबोधित करता प्रतीत होता है।
अन्य मुद्दों पर शिवपाल की प्रतिक्रिया
यूपी सरकार में मंत्री संजय निषाद के कार्यकाल को लेकर शिवपाल ने कहा कि जनता ने पाँच साल का काम खुद देखा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि गठबंधन संबंधी निर्णय 'राष्ट्रीय नेतृत्व' के स्तर पर होते हैं।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के यूपी दौरे पर उन्होंने कहा कि यह उनका अधिकार है — सभी दलों के नेता चुनाव से पहले रणनीति बनाने आते हैं और इसमें कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। यूपी मंत्री ओम प्रकाश राजभर के उस बयान पर — जिसमें उन्होंने कहा था कि आजम खान को जेल भिजवाने में अखिलेश यादव की भूमिका थी — शिवपाल ने तल्ख़ी से जवाब दिया, 'राजभर कब क्या बोल देंगे, उनकी बातों पर ज़्यादा ध्यान नहीं देना चाहिए।'
समाजवादी पार्टी की रणनीति
शिवपाल यादव का यह दौरा समाजवादी पार्टी की जमीनी तैयारी का हिस्सा माना जा रहा है। पीडीए फ्रेमवर्क के तहत पार्टी पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक मतदाताओं को एकजुट करने की कोशिश में है। सनातन को लेकर विपक्ष की आक्रामकता इसी रणनीति का विस्तार दिखती है — BJP को उसी के धार्मिक मोर्चे पर घेरने की कोशिश।
आने वाले महीनों में यूपी में सभी दलों की गतिविधियाँ और तेज़ होने की संभावना है, और सनातन बनाम सेक्युलरिज़्म का यह विमर्श चुनावी बहस में केंद्रीय भूमिका निभाता रहेगा।