राम मंदिर चढ़ावा चोरी: एसआईटी जांच में दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई, केजीएमयू नॉन-वेज बैन को मंत्री धर्मपाल सिंह का समर्थन
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री धर्मपाल सिंह ने 15 जुलाई को लखनऊ में स्पष्ट किया कि राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले में जांच कर रही विशेष जांच दल (एसआईटी) जो भी दोषी पाएगी, उसके विरुद्ध बिना किसी भेदभाव के कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के हॉस्टल मेस में नॉन-वेज भोजन पर लगाई गई रोक को भी उचित ठहराया और ज्ञानवापी विवाद में न्यायालय के फैसले को सर्वोपरि बताया।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी: एसआईटी जांच की स्थिति
मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि जैसे ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को इस मामले की जानकारी मिली, उन्होंने तत्काल एसआईटी का गठन किया। उनके अनुसार एसआईटी पूरी गंभीरता, निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ जांच कर रही है और इसका उद्देश्य सच्चाई सामने लाना है। उन्होंने कहा, 'दूध का दूध और पानी का पानी' करने की दिशा में जांच आगे बढ़ रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
अखिलेश यादव पर निशाना: राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा इस मामले को सार्वजनिक रूप से उठाए जाने पर मंत्री ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव कभी अयोध्या जाकर रामलला के दर्शन करने नहीं गए, यहाँ तक कि जब कई विधायक दर्शन के लिए गए तब भी सपा नेता वहाँ नहीं पहुँचे। मंत्री ने यह भी कहा कि यदि अखिलेश यादव ने इस मामले को सबसे पहले सार्वजनिक रूप से उठाया, तो यह भी जांच का विषय होना चाहिए कि उन्हें इसकी जानकारी किस माध्यम से सबसे पहले मिली — और एसआईटी इस पहलू की भी पड़ताल करेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष की चिंता चढ़ावे की कथित चोरी नहीं, बल्कि एक वर्ग विशेष के वोटों को साधने की राजनीति है।
केजीएमयू हॉस्टल में नॉन-वेज बैन: सरकार का रुख
केजीएमयू के हॉस्टल मेस में नॉन-वेज भोजन पर प्रतिबंध का समर्थन करते हुए धर्मपाल सिंह ने कहा कि सरकार विद्यार्थियों के स्वास्थ्य और कल्याण को प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने दूध, दही, घी, मक्खन और पनीर जैसे खाद्य पदार्थों को स्वास्थ्य के लिए लाभकारी बताया और कहा कि देशी गाय का दूध अमृत के समान है। उनके अनुसार नियमित पौष्टिक भोजन से विद्यार्थियों का शारीरिक और मानसिक विकास बेहतर होगा। उन्होंने विपक्ष पर समाज को धार्मिक आधार पर बाँटने की कोशिश का आरोप लगाया।
ज्ञानवापी विवाद: न्यायालय का फैसला होगा सर्वमान्य
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा ज्ञानवापी विवाद में दोनों पक्षों को आपसी बातचीत से समाधान तलाशने की सलाह दिए जाने के प्रश्न पर मंत्री ने कहा कि दोनों पक्ष न्यायालय की प्रक्रिया का सम्मान कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस संवेदनशील मामले में अदालत का फैसला सर्वोपरि है और जो भी निर्णय न्यायालय करेगा, वही सभी के लिए मान्य होगा। आगे की कार्रवाई उसी के अनुरूप होगी।
आगे क्या होगा
एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में कानूनी प्रक्रिया की दिशा तय होगी। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में कई धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच टकराव तेज हो रहा है। केजीएमयू के नॉन-वेज बैन को लेकर भी विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्र समुदाय की प्रतिक्रिया आने वाले दिनों में महत्त्वपूर्ण होगी।