15 जुलाई 2026
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राम मंदिर चढ़ावा चोरी: एसआईटी जांच में दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई, केजीएमयू नॉन-वेज बैन को मंत्री धर्मपाल सिंह का समर्थन

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राम मंदिर चढ़ावा चोरी: एसआईटी जांच में दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई, केजीएमयू नॉन-वेज बैन को मंत्री धर्मपाल सिंह का समर्थन

सारांश

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में यूपी मंत्री धर्मपाल सिंह ने साफ कहा — एसआईटी जांच पूरी होने पर हर दोषी पर कड़ी कार्रवाई होगी। साथ ही केजीएमयू हॉस्टल में नॉन-वेज बैन को सही ठहराया और अखिलेश यादव पर तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगाया।

मुख्य बातें

यूपी मंत्री धर्मपाल सिंह ने 15 जुलाई को कहा कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एसआईटी निष्पक्ष जांच कर रही है और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले की जानकारी मिलते ही तत्काल एसआईटी का गठन किया था।
मंत्री ने अखिलेश यादव पर आरोप लगाया कि उन्होंने इस मुद्दे को सबसे पहले उठाया, इसलिए उनके सूचना स्रोत की भी एसआईटी जांच होगी।
केजीएमयू हॉस्टल मेस में नॉन-वेज बैन को मंत्री ने विद्यार्थियों के स्वास्थ्य और कल्याण के हित में उचित बताया।
ज्ञानवापी विवाद में सर्वोच्च न्यायालय का फैसला सर्वमान्य होगा — मंत्री ने न्यायिक प्रक्रिया के सम्मान पर जोर दिया।

उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री धर्मपाल सिंह ने 15 जुलाई को लखनऊ में स्पष्ट किया कि राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले में जांच कर रही विशेष जांच दल (एसआईटी) जो भी दोषी पाएगी, उसके विरुद्ध बिना किसी भेदभाव के कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के हॉस्टल मेस में नॉन-वेज भोजन पर लगाई गई रोक को भी उचित ठहराया और ज्ञानवापी विवाद में न्यायालय के फैसले को सर्वोपरि बताया।

राम मंदिर चढ़ावा चोरी: एसआईटी जांच की स्थिति

मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि जैसे ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को इस मामले की जानकारी मिली, उन्होंने तत्काल एसआईटी का गठन किया। उनके अनुसार एसआईटी पूरी गंभीरता, निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ जांच कर रही है और इसका उद्देश्य सच्चाई सामने लाना है। उन्होंने कहा, 'दूध का दूध और पानी का पानी' करने की दिशा में जांच आगे बढ़ रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

अखिलेश यादव पर निशाना: राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप

समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा इस मामले को सार्वजनिक रूप से उठाए जाने पर मंत्री ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव कभी अयोध्या जाकर रामलला के दर्शन करने नहीं गए, यहाँ तक कि जब कई विधायक दर्शन के लिए गए तब भी सपा नेता वहाँ नहीं पहुँचे। मंत्री ने यह भी कहा कि यदि अखिलेश यादव ने इस मामले को सबसे पहले सार्वजनिक रूप से उठाया, तो यह भी जांच का विषय होना चाहिए कि उन्हें इसकी जानकारी किस माध्यम से सबसे पहले मिली — और एसआईटी इस पहलू की भी पड़ताल करेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष की चिंता चढ़ावे की कथित चोरी नहीं, बल्कि एक वर्ग विशेष के वोटों को साधने की राजनीति है।

केजीएमयू हॉस्टल में नॉन-वेज बैन: सरकार का रुख

केजीएमयू के हॉस्टल मेस में नॉन-वेज भोजन पर प्रतिबंध का समर्थन करते हुए धर्मपाल सिंह ने कहा कि सरकार विद्यार्थियों के स्वास्थ्य और कल्याण को प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने दूध, दही, घी, मक्खन और पनीर जैसे खाद्य पदार्थों को स्वास्थ्य के लिए लाभकारी बताया और कहा कि देशी गाय का दूध अमृत के समान है। उनके अनुसार नियमित पौष्टिक भोजन से विद्यार्थियों का शारीरिक और मानसिक विकास बेहतर होगा। उन्होंने विपक्ष पर समाज को धार्मिक आधार पर बाँटने की कोशिश का आरोप लगाया।

ज्ञानवापी विवाद: न्यायालय का फैसला होगा सर्वमान्य

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा ज्ञानवापी विवाद में दोनों पक्षों को आपसी बातचीत से समाधान तलाशने की सलाह दिए जाने के प्रश्न पर मंत्री ने कहा कि दोनों पक्ष न्यायालय की प्रक्रिया का सम्मान कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस संवेदनशील मामले में अदालत का फैसला सर्वोपरि है और जो भी निर्णय न्यायालय करेगा, वही सभी के लिए मान्य होगा। आगे की कार्रवाई उसी के अनुरूप होगी।

आगे क्या होगा

एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में कानूनी प्रक्रिया की दिशा तय होगी। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में कई धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच टकराव तेज हो रहा है। केजीएमयू के नॉन-वेज बैन को लेकर भी विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्र समुदाय की प्रतिक्रिया आने वाले दिनों में महत्त्वपूर्ण होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि जांच की रिपोर्ट कब और किस रूप में सार्वजनिक होती है। अखिलेश यादव के सूचना स्रोत की जांच की बात एक राजनीतिक पलटवार अधिक लगती है, जो मूल मुद्दे — मंदिर प्रशासन में जवाबदेही — से ध्यान भटका सकती है। केजीएमयू में नॉन-वेज बैन को स्वास्थ्य के तर्क से जोड़ना एक विवादास्पद दृष्टिकोण है, क्योंकि पोषण विशेषज्ञ मांसाहारी भोजन को प्रोटीन का वैध स्रोत मानते हैं। ज्ञानवापी पर न्यायालय को सर्वोपरि मानने का बयान संतुलित है, पर यह देखना होगा कि राजनीतिक दबाव न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करता है या नहीं।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एसआईटी जांच की क्या स्थिति है?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा गठित एसआईटी पूरी गंभीरता और निष्पक्षता के साथ जांच कर रही है। यूपी मंत्री धर्मपाल सिंह के अनुसार जांच पूरी होने पर दोषी पाए गए सभी व्यक्तियों के विरुद्ध बिना भेदभाव के कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
अखिलेश यादव के सूचना स्रोत की जांच क्यों होगी?
मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि यदि अखिलेश यादव ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मामले को सबसे पहले सार्वजनिक रूप से उठाया, तो यह जांच का विषय है कि उन्हें यह जानकारी किस माध्यम से सबसे पहले मिली। उन्होंने यह भी कहा कि एसआईटी इस पहलू की भी पड़ताल करेगी।
केजीएमयू हॉस्टल में नॉन-वेज बैन क्यों लगाया गया?
केजीएमयू प्रशासन ने हॉस्टल मेस में नॉन-वेज भोजन पर रोक लगाई है। यूपी मंत्री धर्मपाल सिंह ने इसे विद्यार्थियों के स्वास्थ्य और कल्याण के हित में उचित बताया और कहा कि पौष्टिक शाकाहारी भोजन से शारीरिक व मानसिक विकास बेहतर होता है।
ज्ञानवापी विवाद में सरकार का क्या रुख है?
मंत्री धर्मपाल सिंह ने स्पष्ट किया कि ज्ञानवापी विवाद में सर्वोच्च न्यायालय का फैसला सर्वोपरि और सर्वमान्य होगा। उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष न्यायालय की प्रक्रिया का सम्मान कर रहे हैं और आगे की कार्रवाई न्यायालय के निर्णय के अनुरूप होगी।
मंत्री धर्मपाल सिंह ने विपक्ष पर क्या आरोप लगाए?
धर्मपाल सिंह ने कहा कि विपक्ष के पास विकास से जुड़े कोई ठोस मुद्दे नहीं हैं, इसलिए वह धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर राजनीति कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी की चिंता चढ़ावे की चोरी नहीं, बल्कि एक वर्ग विशेष के वोटों को साधने की राजनीति है।
राष्ट्र प्रेस
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