15 जुलाई 2026
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राम मंदिर चढ़ावा चोरी: SIT जांच 'लीपापोती' — राकेश सिन्हा ने माँगी उच्चस्तरीय न्यायिक जांच

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राम मंदिर चढ़ावा चोरी: SIT जांच 'लीपापोती' — राकेश सिन्हा ने माँगी उच्चस्तरीय न्यायिक जांच

सारांश

झारखंड कांग्रेस नेता राकेश सिन्हा ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी की SIT जांच को 'लीपापोती' करार देते हुए उच्चस्तरीय न्यायिक जांच की माँग की — साथ ही KGMU नॉनवेज विवाद, मतदाता सूची, पासपोर्ट और इथेनॉल पेट्रोल पर सरकार को घेरा।

मुख्य बातें

झारखंड कांग्रेस नेता राकेश सिन्हा ने 15 जुलाई 2026 को राम मंदिर चढ़ावा चोरी में SIT जांच को 'लीपापोती' बताया।
सिन्हा ने माँग की कि इस मामले की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कराई जाए, क्योंकि SIT प्रमुख पर स्वयं भ्रष्टाचार के आरोप हैं।
KGMU हॉस्टल में नॉनवेज भोजन पर रोक को उन्होंने राज्यपाल की व्यक्तिगत प्राथमिकता थोपने का प्रयास बताया।
पासपोर्ट को केवल यात्रा दस्तावेज मानने के विदेश मंत्रालय के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा — आधार, मतदाता पहचान पत्र और पासपोर्ट नागरिकता के प्रमाण हैं।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी पर आरोप — इथेनॉल उद्योग में पारिवारिक हित के कारण इथेनॉल मिश्रित ईंधन को बढ़ावा दिया जा रहा है।

झारखंड कांग्रेस नेता राकेश सिन्हा ने 15 जुलाई 2026 को राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण में विशेष जांच दल (SIT) की अंतिम रिपोर्ट को 'लीपापोती' करार देते हुए उच्चस्तरीय न्यायिक जांच की माँग की। उन्होंने यह भी कहा कि SIT का नेतृत्व ऐसे अधिकारी के हाथ में है जिन पर स्वयं भ्रष्टाचार के आरोप लग चुके हैं, इसलिए निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं की जा सकती। सिन्हा ने इसके साथ ही केजीएमयू हॉस्टल में नॉनवेज भोजन पर रोक, मतदाता सत्यापन, पासपोर्ट की कानूनी स्थिति और इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल सहित कई मुद्दों पर केंद्र व राज्य सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए।

राम मंदिर चढ़ावा चोरी और SIT पर सवाल

सिन्हा ने कहा कि यह मामला केवल चढ़ावा चोरी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह करोड़ों सनातनियों की आस्था और विश्वास से जुड़ा विषय है। उनके अनुसार, जब SIT का नेतृत्व करने वाले अधिकारी पर भ्रष्टाचार के पूर्व आरोप हों, तो ऐसी जांच की विश्वसनीयता स्वतः संदिग्ध हो जाती है। उन्होंने माँग की कि इस प्रकरण की जांच किसी उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में कराई जाए। गौरतलब है कि राम मंदिर से जुड़े चढ़ावे की चोरी के आरोप सामने आने के बाद से यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक विवाद का केंद्र बना हुआ है।

केजीएमयू हॉस्टल में नॉनवेज पर रोक का विरोध

कांग्रेस नेता ने किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के छात्रावास में नॉनवेज भोजन पर लगाई गई रोक को अनुचित बताया। उन्होंने तर्क दिया कि ऐसा कोई स्थापित नियम नहीं है जो छात्रावास मेस में मांसाहारी भोजन पर प्रतिबंध लगाता हो। सिन्हा ने आरोप लगाया कि राज्यपाल के व्यक्तिगत शाकाहारी दृष्टिकोण को छात्रों पर थोपने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि जब देश के प्रधानमंत्री अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत को बड़े मांस-उत्पादक देशों में शामिल बताते हैं और सत्तारूढ़ दल के नेता स्वयं मांसाहार करते हैं, तो छात्रों को इस अधिकार से वंचित करना विरोधाभासी है।

मतदाता सत्यापन और चुनाव आयोग पर चिंता

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के दौरान बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) को मानदेय दिए जाने के प्रश्न पर सिन्हा ने कहा कि मेहनत करने वाले कर्मचारियों को उचित पारिश्रमिक मिलना चाहिए। हालाँकि उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि इससे भी अधिक ज़रूरी यह है कि जिन वास्तविक मतदाताओं का सत्यापन हो चुका है, उनके नाम किसी राजनीतिक दबाव में मतदाता सूची से न हटाए जाएँ। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि वास्तविक मतदाताओं के नाम काटे गए, तो केवल मानदेय देना पर्याप्त नहीं होगा।

पासपोर्ट और नागरिकता पहचान का सवाल

विदेश मंत्रालय के उस बयान पर, जिसमें पासपोर्ट को केवल विदेश यात्रा का दस्तावेज बताया गया था, सिन्हा ने आपत्ति जताई। उनका कहना था कि पासपोर्ट भारतीय नागरिकता का एक महत्वपूर्ण प्रमाण-पत्र भी है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि पासपोर्ट, आधार कार्ड और मतदाता पहचान पत्र — तीनों को नागरिकता की पहचान नहीं माना जाएगा, तो नागरिक की पहचान किस आधार पर होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अहंकार में ऐसे फैसले ले रही है।

इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल और गडकरी पर आरोप

इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर चल रही बहस पर सिन्हा ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि इथेनॉल से जुड़े उद्योग में मंत्री के परिवार के हित जुड़े होने के कारण इस ईंधन को प्राथमिकता दी जा रही है। सिन्हा का दावा था कि इथेनॉल मिश्रित ईंधन के उपयोग से आम लोगों की गाड़ियों के इंजन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है और मध्यमवर्गीय परिवारों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने सरकार से माँग की कि इस मुद्दे पर जनता की चिंताओं का समाधान किया जाए, न कि बहस को भटकाया जाए। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार इथेनॉल मिश्रण लक्ष्यों को लेकर आक्रामक नीति अपना रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह बहस का विषय है। राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर न्यायिक जांच की माँग में दम है, क्योंकि जब जांच एजेंसी के प्रमुख की विश्वसनीयता ही संदिग्ध हो, तो निष्कर्ष की स्वीकार्यता स्वतः कमज़ोर पड़ती है। हालाँकि, इथेनॉल नीति पर गडकरी पर लगाए गए आरोप गंभीर हैं और इनके लिए साक्ष्य-आधारित जवाबदेही की माँग होनी चाहिए — केवल राजनीतिक बयानबाज़ी नहीं। मतदाता सूची पर उठाई गई चिंताएँ सबसे व्यापक जनहित की हैं, फिर भी वे इस प्रेस वार्ता में सबसे कम ध्यान पाती हैं।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में SIT जांच पर विवाद क्यों है?
कांग्रेस नेता राकेश सिन्हा के अनुसार, SIT का नेतृत्व ऐसे अधिकारी के पास है जिन पर स्वयं भ्रष्टाचार के आरोप लग चुके हैं, इसलिए इस जांच की निष्पक्षता संदिग्ध है। उन्होंने इसे 'लीपापोती' करार देते हुए उच्चस्तरीय न्यायिक जांच की माँग की है।
KGMU हॉस्टल में नॉनवेज भोजन पर रोक क्यों लगाई गई?
राकेश सिन्हा के अनुसार, यह रोक राज्यपाल के व्यक्तिगत शाकाहारी दृष्टिकोण को छात्रों पर थोपने का प्रयास है। उनका कहना है कि ऐसा कोई स्थापित नियम नहीं है जो छात्रावास मेस में मांसाहारी भोजन पर प्रतिबंध लगाता हो।
पासपोर्ट को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर क्या आरोप लगाए?
सिन्हा ने विदेश मंत्रालय के उस बयान पर आपत्ति जताई जिसमें पासपोर्ट को केवल विदेश यात्रा का दस्तावेज बताया गया। उनका कहना है कि पासपोर्ट, आधार और मतदाता पहचान पत्र तीनों भारतीय नागरिकता के प्रमाण हैं और इन्हें नकारना अनुचित है।
इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर नितिन गडकरी पर क्या आरोप लगाए गए?
सिन्हा ने आरोप लगाया कि इथेनॉल उद्योग में मंत्री गडकरी के परिवार के हित जुड़े होने के कारण इस ईंधन को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि इथेनॉल मिश्रित ईंधन से आम लोगों की गाड़ियों के इंजन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
मतदाता सूची सत्यापन पर कांग्रेस की क्या चिंता है?
सिन्हा ने कहा कि BLO को मानदेय देने से अधिक ज़रूरी यह सुनिश्चित करना है कि सत्यापित वास्तविक मतदाताओं के नाम किसी राजनीतिक दबाव में मतदाता सूची से न हटाए जाएँ। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसा हुआ तो केवल मानदेय देना पर्याप्त नहीं होगा।
राष्ट्र प्रेस
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