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राम मंदिर चढ़ावा विवाद: राकेश सिन्हा की माँग — सुप्रीम कोर्ट निगरानी में उच्चस्तरीय जाँच हो

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राम मंदिर चढ़ावा विवाद: राकेश सिन्हा की माँग — सुप्रीम कोर्ट निगरानी में उच्चस्तरीय जाँच हो

सारांश

राम मंदिर चढ़ावा विवाद अब केवल चोरी का मामला नहीं रहा — कांग्रेस ने इसे करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का सवाल बना दिया है। झारखंड कांग्रेस के राकेश सिन्हा ने सुप्रीम कोर्ट निगरानी में जाँच की माँग कर BJP पर दबाव बढ़ाया है।

मुख्य बातें

झारखंड कांग्रेस के मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने 3 जुलाई को राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में उच्चस्तरीय जाँच की माँग की।
आरोपी अविनाश शुक्ला को पुलिस ने रिमांड पर लिया है, लेकिन सिन्हा के अनुसार केवल एसआईटी जाँच पर्याप्त नहीं।
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल के PM मोदी को लिखे पत्र का समर्थन करते हुए सिन्हा ने इसे करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं का प्रतिनिधित्व बताया।
तमिलनाडु विधायक खरीद-फरोख्त मामले पर BJP पर 12 वर्षों में लोकतांत्रिक संस्थाओं को प्रभावित करने का आरोप।
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर सिन्हा ने कहा — भागवत को PM मोदी को पत्र लिखकर विभाजन-पीड़ितों को 'योद्धा' मानने की भावना स्पष्ट करनी चाहिए।
जमशेदपुर घटना पर कहा — राज्य सरकार ने आरोपियों की गिरफ्तारी, पुलिस कार्रवाई और बार लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की।

झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने 3 जुलाई को रांची में राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (BJP) को कड़े शब्दों में घेरा। उन्होंने माँग की कि इस मामले की उच्चस्तरीय और न्यायिक जाँच कराई जाए, क्योंकि यह करोड़ों श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था से जुड़ा प्रश्न है।

मुख्य घटनाक्रम

सिन्हा ने कहा कि पुलिस ने आरोपी अविनाश शुक्ला को रिमांड पर लिया है और जाँच शुरू हो चुकी है, लेकिन महज औपचारिक प्रक्रिया से काम नहीं चलेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है। उनके अनुसार, यदि जाँच केवल एसआईटी तक सीमित रही तो लोगों के मन में सवाल बने रहेंगे।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस कथित चोरी का मास्टरमाइंड कौन है, यह पूरी पारदर्शिता के साथ सामने आना चाहिए और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

कांग्रेस महासचिव के पत्र का समर्थन

कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे गए पत्र का समर्थन करते हुए सिन्हा ने कहा कि यह किसी एक नेता का पत्र नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं की अभिव्यक्ति है। उन्होंने माँग की कि प्रधानमंत्री अपनी नैतिक जिम्मेदारी निभाएँ और सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में निष्पक्ष जाँच सुनिश्चित करें। उनके शब्दों में, यह भगवान श्रीराम की मर्यादा और करोड़ों लोगों की आस्था का सवाल है।

अन्य मुद्दों पर प्रतिक्रिया

तमिलनाडु में कथित विधायक खरीद-फरोख्त के मामले पर सिन्हा ने BJP पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 12 वर्षों में निर्वाचित प्रतिनिधियों को प्रभावित करने की राजनीति की गई है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करती है।

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के उस बयान पर — जिसमें विभाजन के बाद भारत आए लोगों को शरणार्थी नहीं बल्कि संघर्ष के योद्धा बताया गया था — सिन्हा ने कहा कि भागवत को प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर इस भावना को स्पष्ट करना चाहिए। उनके अनुसार BJP नेतृत्व को इस विषय पर अपना स्पष्ट रुख सामने रखना चाहिए।

जमशेदपुर की हालिया घटना के संदर्भ में उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने तेज़ी से कार्रवाई की है — पीड़ित परिवार की सहायता, आरोपियों की गिरफ्तारी, संबंधित पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई और बार के लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में राजनीति के बजाय न्याय सुनिश्चित करना प्राथमिकता होनी चाहिए।

संगठनात्मक व चुनावी मसले

पंजाब कांग्रेस की नई समिति में वरिष्ठ नेता मनीष तिवारी को जगह न मिलने पर सिन्हा ने कहा कि किसी भी दल में जिम्मेदारियों का पुनर्वितरण एक सामान्य प्रक्रिया है और इसे किसी की अनदेखी नहीं माना जाना चाहिए।

मुख्य चुनाव आयुक्त की जम्मू-कश्मीर यात्रा पर उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को पूर्णतः स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से काम करना चाहिए, तभी लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता बनी रहेगी।

आगे क्या

सिन्हा ने स्पष्ट किया कि यदि राम मंदिर चढ़ावा मामले में दोषियों के विरुद्ध निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई तो जनता का विश्वास प्रभावित होगा। सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में जाँच की माँग अब कांग्रेस की आधिकारिक माँग बन चुकी है, और आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद तथा सड़क — दोनों पर गूँजने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ BJP के लिए बचाव कठिन है। लेकिन यह भी उतना ही सच है कि विपक्ष की इस माँग में जाँच के ठोस ढाँचे का अभाव है — केवल 'उच्चस्तरीय' कहने से जवाबदेही तय नहीं होती। असली सवाल यह है कि क्या राम मंदिर ट्रस्ट की आंतरिक निगरानी प्रणाली पहले दिन से पर्याप्त थी, और इस पर न कांग्रेस बोल रही है, न BJP। जब तक जाँच का दायरा संस्थागत विफलता तक नहीं पहुँचता, यह विवाद व्यक्तिगत आरोपी तक सिमटा रहेगा और असली जवाबदेही से बचा रहेगा।
RashtraPress
3 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम मंदिर चढ़ावा विवाद क्या है?
राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का यह मामला है, जिसमें आरोपी अविनाश शुक्ला को पुलिस ने रिमांड पर लिया है। कांग्रेस का आरोप है कि मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है और इसकी उच्चस्तरीय न्यायिक जाँच होनी चाहिए।
राकेश सिन्हा ने जाँच की क्या माँग रखी है?
झारखंड कांग्रेस के मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने माँग की है कि यह जाँच केवल एसआईटी तक सीमित न रहे, बल्कि सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में उच्चस्तरीय और न्यायिक जाँच हो। उनके अनुसार इस कथित चोरी के मास्टरमाइंड की पहचान पूरी पारदर्शिता के साथ होनी चाहिए।
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने PM मोदी को पत्र क्यों लिखा?
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर राम मंदिर चढ़ावा मामले में निष्पक्ष जाँच सुनिश्चित करने की माँग की। राकेश सिन्हा ने इस पत्र का समर्थन करते हुए कहा कि यह करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं की अभिव्यक्ति है।
तमिलनाडु विधायक खरीद-फरोख्त मामले पर कांग्रेस का क्या रुख है?
राकेश सिन्हा ने BJP पर आरोप लगाया कि पिछले 12 वर्षों में निर्वाचित प्रतिनिधियों को प्रभावित करने की राजनीति की गई है। उनके अनुसार विधायकों और सांसदों में टूट कराने जैसी घटनाएँ लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा हैं।
जमशेदपुर घटना पर राज्य सरकार ने क्या कार्रवाई की?
राकेश सिन्हा के अनुसार, जमशेदपुर की हालिया घटना के बाद राज्य सरकार ने पीड़ित परिवार की सहायता, आरोपियों की गिरफ्तारी, संबंधित पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई और बार के लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की है।
राष्ट्र प्रेस
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