स्टिंग ऑपरेशन विवाद: सिद्दारमैया ने कांग्रेस नेता कृपा अल्वा पर लगाया ब्लैकमेल का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस कार्य समिति (CWC) के सदस्य सिद्दारमैया ने शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को मंगलुरु की पत्रकार एवं कांग्रेस नेता कृपा अल्वा का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने एक अन्य पत्रकार के साथ मिलकर उनके खिलाफ स्टिंग ऑपरेशन की साजिश रची। मैसूरु के सुत्तूर शाखा मठ में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने इसे खुद को ब्लैकमेल करने और झूठे आरोपों के ज़रिए उनकी राजनीतिक छवि धूमिल करने का सुनियोजित प्रयास बताया।
सिद्दारमैया के आरोप: क्या कहा उन्होंने
सिद्दारमैया ने कहा कि इस कथित साजिश की जानकारी उन्हें सितंबर 2026 में हुई, जिसके बाद उन्होंने स्वयं पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। उनके अनुसार, 'एक पत्रकार और मंगलुरु की कृपा अल्वा ने मिलकर इस ऑपरेशन को अंजाम दिया है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि इन आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है और वे पूरी तरह से झूठे हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि अपने खिलाफ जारी बदनामी के अभियान को रोकने के लिए उन्होंने न्यायालय का भी दरवाज़ा खटखटाया है। 'आजकल की राजनीति में इस तरह के ब्लैकमेल के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं' — यह कहते हुए उन्होंने स्वयं को किसी के समर्थन की ज़रूरत से परे बताया।
यतींद्र सिद्दारमैया का बयान: पार्टी के भीतर से साजिश का दावा
कर्नाटक के शहरी विकास मंत्री और सिद्दारमैया के पुत्र यतींद्र सिद्दारमैया ने शुक्रवार सुबह यह आरोप लगाकर मामले को नया मोड़ दे दिया कि यह स्टिंग ऑपरेशन कांग्रेस के ही कुछ नेताओं ने अंजाम दिया। उनके अनुसार, इसका उद्देश्य उनके पिता की 40 साल की राजनीतिक विरासत को नष्ट करना, उनकी छवि बिगाड़ना और उन्हें ब्लैकमेल करना था।
यतींद्र ने कहा कि वीडियो में एक महिला कांग्रेस नेता और एक वरिष्ठ मीडियाकर्मी की संलिप्तता दिखती है। उन्होंने बताया कि उस महिला नेता ने कथित तौर पर पुत्तूर विधानसभा सीट से कांग्रेस का टिकट माँगने की बात कही थी, और प्राथमिक दृष्टि में इसी को स्टिंग ऑपरेशन का संभावित कारण बताया।
जाँच और कानूनी कार्रवाई
सिद्दारमैया ने सरकारी जाँच पर पूरा भरोसा जताते हुए किसी SIT या उच्च-स्तरीय जाँच की ज़रूरत से इनकार किया। उन्होंने कहा, 'जाँच के बाद ही पता चलेगा कि इसमें हमारी अपनी पार्टी के लोग शामिल थे या विपक्ष के।' वहीं, यतींद्र ने स्पष्ट किया कि वे किसी खास व्यक्ति पर संदेह नहीं कर रहे और जाँच से ही असल तथ्य सामने आने चाहिए।
गौरतलब है कि सिद्दारमैया ने दावा किया कि मुख्यमंत्री के रूप में अपने आठ साल के कार्यकाल में कभी ऐसी स्थिति नहीं आई और न ही अपने लंबे राजनीतिक जीवन में उन्हें कभी इस तरह के बेबुनियाद आरोपों का सामना करना पड़ा।
राजनीतिक पृष्ठभूमि और व्यापक असर
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब कर्नाटक में कांग्रेस सरकार पहले से ही कई मोर्चों पर दबाव में है। पार्टी के भीतर से ही नेताओं पर इस तरह के आरोप लगना आंतरिक कलह की ओर संकेत करता है। सिद्दारमैया ने यह भी संकेत दिया कि कुछ लोग इस विवाद से राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं, और उन्हें ऐसा करने की पूरी छूट है।
यतींद्र ने हालाँकि यह सावधानी भी बरती कि किसी एक कार्यकर्ता की संलिप्तता के आधार पर पूरी पार्टी पर साजिश का आरोप नहीं लगाया जा सकता। जाँच की दिशा और उसके निष्कर्ष ही इस मामले में अंतिम स्पष्टता देंगे।