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कर्नाटक स्टिंग विवाद: कांग्रेस विधायक गनिगा रवि का दावा — एक हफ्ते में जारी करेंगे CCTV, ऑडियो सबूत

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कर्नाटक स्टिंग विवाद: कांग्रेस विधायक गनिगा रवि का दावा — एक हफ्ते में जारी करेंगे CCTV, ऑडियो सबूत

सारांश

कर्नाटक स्टिंग विवाद में नया मोड़ — कांग्रेस विधायक गनिगा रवि ने दावा किया कि दिल्ली की एक एजेंसी ने एक केंद्रीय मंत्री और कर्नाटक के भाजपा नेता के इशारे पर यह ऑपरेशन चलाया। अब सात दिनों में CCTV फुटेज और ऑडियो वीडियो सबूत जारी करने का वादा — लेकिन नाम अभी भी अनजाने।

मुख्य बातें

कांग्रेस विधायक गनिगा रवि ने 9 अक्टूबर 2026 को मांड्या में दावा किया कि वे 7 दिनों के भीतर स्टिंग ऑपरेशन विवाद के सबूत जारी करेंगे।
उनके पास कथित तौर पर दस्तावेज़, सीसीटीवी फुटेज और ऑडियो वीडियो रिकॉर्डिंग मौजूद हैं।
रवि ने आरोप लगाया कि दिल्ली की एक एजेंसी ने एक केंद्रीय मंत्री और कर्नाटक के भाजपा नेता के कहने पर यह स्टिंग कराया।
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने एक दिन पहले दावा किया था कि उन्हें पद संभालने के बाद स्टिंग से फँसाने की कोशिश हुई और उनके पास तस्वीरें हैं।
रवि के आरोपों की स्वतंत्र रूप से अभी तक पुष्टि नहीं हो सकी; आरोपी व्यक्तियों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए।

कांग्रेस विधायक गनिगा रवि ने 9 अक्टूबर 2026 को मांड्या में पत्रकारों से बात करते हुए दावा किया कि वे कर्नाटक के चर्चित स्टिंग ऑपरेशन विवाद के पीछे की कथित साजिश को बेनकाब करने के लिए सात दिनों के भीतर सबूत जारी करेंगे। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के करीबी सहयोगी माने जाने वाले रवि ने एक पेन ड्राइव दिखाते हुए कहा कि उनके पास दस्तावेज़, सीसीटीवी फुटेज और ऑडियो वीडियो रिकॉर्डिंग मौजूद हैं।

क्या है रवि का दावा

रवि ने आरोप लगाया कि यह स्टिंग ऑपरेशन दिल्ली की एक एजेंसी ने एक केंद्रीय मंत्री और कर्नाटक के एक भाजपा नेता के कहने पर अंजाम दिया, ताकि राज्य के मंत्रियों को फँसाकर कांग्रेस सरकार को शर्मिंदा किया जा सके। उन्होंने कहा, "यह हिट एंड रन का मामला नहीं होगा। मेरे पास सबूत हैं जिनसे उस एजेंसी की पहचान हो सकती है जो इसमें शामिल थी — साथ ही उन लोगों की भी जो इस ऑपरेशन के पीछे थे, कितनी रकम दी गई, किन मंत्रियों से मुलाकात हुई और कौन कौन से नेताओं के पर्सनल असिस्टेंट वहाँ मौजूद थे।"

रवि के अनुसार, कथित एजेंसी के लिए बेंगलुरु के एक होटल में ठहरने का इंतज़ाम किया गया था। हालाँकि, उन्होंने बयान के समय आरोपी व्यक्तियों के नाम सार्वजनिक नहीं किए और न ही कोई सबूत उस वक्त जारी किया। उनके आरोपों की स्वतंत्र रूप से अभी तक पुष्टि नहीं हो सकी है।

मंत्रियों की भूमिका पर सफाई

रवि ने स्पष्ट किया कि राज्य के मंत्री किसी भी गलत काम में शामिल नहीं थे और वे कथित जाल में नहीं फँसे। उन्होंने इस विवाद को मुख्यमंत्री शिवकुमार की उस चेतावनी से भी जोड़ा, जो उन्होंने अपने कैबिनेट सहयोगियों को सावधानी बरतने के लिए दी थी। रवि के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने मंत्रियों को इसलिए आगाह किया था क्योंकि साजिश के बारे में सबूत पहले से मौजूद थे।

शिवकुमार के पुराने बयान से जुड़ाव

यह ऐसे समय में आया है जब एक दिन पहले, 8 अक्टूबर 2026 को, मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने दिल्ली में पत्रकारों से बात करते हुए दावा किया था कि पद संभालने के बाद उन्हें स्टिंग ऑपरेशन के ज़रिए फँसाने की कोशिश की गई थी। शिवकुमार ने कहा था, "मुख्यमंत्री बनने के बाद मुझे फँसाने की कोशिश की गई थी। कुछ लोग मेरे पास आए थे। मेरे पास तस्वीरें हैं। मैं जानता हूँ कि इन स्टिंग ऑपरेशन का मास्टरमाइंड कौन है।"

गौरतलब है कि शिवकुमार ने भी उस समय संबंधित व्यक्ति का नाम सार्वजनिक नहीं किया था। रवि के ताज़ा दावे स्पष्ट रूप से उसी सिलसिले को आगे बढ़ाने का प्रयास हैं।

विपक्ष पर पलटवार

रवि ने विपक्ष के नेताओं पर भी निशाना साधा और आरोप लगाया कि वे जानबूझकर गलत जानकारी फैला रहे हैं, क्योंकि वे मुख्यमंत्री शिवकुमार के नेतृत्व में हो रहे कथित विकास को स्वीकार नहीं कर पा रहे। विपक्ष की ओर से अभी तक इस पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

आगे क्या होगा

रवि के अनुसार, वे सात दिनों के भीतर जाँच अधिकारी को दस्तावेज़ सौंपेंगे और उसके बाद मीडिया के सामने सबूत जारी करेंगे। इस मामले में अब सबकी नज़रें उस साक्ष्य पर टिकी हैं जिसे रवि ने सार्वजनिक करने का वादा किया है — और इससे कर्नाटक की राजनीति में नया मोड़ आ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन दोनों ने ही नाम और दस्तावेज़ सार्वजनिक करने से परहेज़ किया — यह राजनीतिक बयानबाज़ी की एक परिचित लिपि है जिसमें 'सबूत आने वाले हैं' की घोषणा खुद एक हथियार बन जाती है। असली सवाल यह है कि यदि सात दिन बाद भी नाम और दस्तावेज़ सामने नहीं आए, तो क्या जवाबदेही तय होगी? कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के लिए यह विवाद दोधारी तलवार है — स्टिंग की साजिश साबित होती है तो सियासी फायदा, लेकिन सबूत न आए तो विश्वसनीयता पर सवाल।
RashtraPress
9 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक स्टिंग ऑपरेशन विवाद क्या है?
कर्नाटक में एक कथित स्टिंग ऑपरेशन का विवाद है जिसमें राज्य के मंत्रियों को निशाना बनाने और कांग्रेस सरकार को शर्मिंदा करने की साजिश का आरोप है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और कांग्रेस विधायक गनिगा रवि, दोनों ने दावा किया है कि उनके पास इस साजिश के सबूत हैं, हालाँकि अभी तक कोई नाम या दस्तावेज़ सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
गनिगा रवि कौन हैं और उन्होंने क्या दावा किया?
गनिगा रवि कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के करीबी सहयोगी और कांग्रेस विधायक हैं। उन्होंने 9 अक्टूबर 2026 को मांड्या में दावा किया कि दिल्ली की एक एजेंसी ने एक केंद्रीय मंत्री और कर्नाटक के एक भाजपा नेता के निर्देश पर यह स्टिंग ऑपरेशन अंजाम दिया, और वे सात दिनों के भीतर CCTV फुटेज व ऑडियो वीडियो सबूत जारी करेंगे।
डीके शिवकुमार ने स्टिंग ऑपरेशन पर क्या कहा था?
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने 8 अक्टूबर 2026 को दिल्ली में कहा था कि पद संभालने के बाद उन्हें स्टिंग ऑपरेशन के ज़रिए फँसाने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि उनके पास तस्वीरें हैं और वे जानते हैं कि इस ऑपरेशन का मास्टरमाइंड कौन है, लेकिन उन्होंने भी नाम सार्वजनिक नहीं किया।
रवि के अनुसार स्टिंग ऑपरेशन के सबूत कब जारी होंगे?
रवि ने कहा है कि वे सात दिनों के भीतर जाँच अधिकारी को दस्तावेज़ सौंपेंगे और उसके बाद मीडिया के सामने सीसीटीवी फुटेज तथा ऑडियो वीडियो रिकॉर्डिंग जारी करेंगे। हालाँकि उन्होंने 9 अक्टूबर को बयान के समय कोई सबूत सार्वजनिक नहीं किया।
क्या रवि के आरोपों की पुष्टि हुई है?
नहीं। रवि के आरोपों की अभी तक स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। उन्होंने जिन व्यक्तियों पर आरोप लगाए, उनके नाम भी सार्वजनिक नहीं किए हैं। यह मामला अभी राजनीतिक दावे के स्तर पर है और साक्ष्य जारी होने के बाद ही तस्वीर स्पष्ट होगी।
राष्ट्र प्रेस
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