क्या सीतामढ़ी विधानसभा जानकी मंदिर के कारण बिहार की राजनीति में बदलाव ला सकती है?

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क्या सीतामढ़ी विधानसभा जानकी मंदिर के कारण बिहार की राजनीति में बदलाव ला सकती है?

Key Takeaways

  • सीतामढ़ी की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्वता
  • माता जानकी के मंदिर का शिलान्यास
  • स्थानीय समस्याएं: जलभराव और रोजगार
  • जातिगत समीकरण का सियासी प्रभाव
  • भाजपा और राजद के बीच सीधी टक्कर

नई दिल्ली, 29 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। बिहार में होने वाले इस वर्ष के विधानसभा चुनाव में सीतामढ़ी सीट धार्मिक और सियासी चर्चाओं का मुख्य केंद्र बन चुकी है। यह सीट नेपाल की सीमा से सटी हुई है, जहां माता सीता की जन्मस्थली पुनौरा धाम स्थित है। यह न केवल अपनी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत के लिए जानी जाती है, बल्कि इस बार माता जानकी के भव्य मंदिर का शिलान्यास इसे बिहार की अन्य विधानसभा सीटों की तुलना में विशेष बनाता है।

इस सीट को यूपी की अयोध्या से जोड़ा जा रहा है, जहां भगवान राम के मंदिर ने राष्ट्रीय स्तर पर हिंदुत्व और विकास के एजेंडे को नई दिशा दी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में माता सीता के मंदिर का शिलान्यास एक महत्वपूर्ण सियासी कदम माना जा रहा है।

वहीं दूसरी ओर, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और तेजस्वी यादव की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ और माता जानकी मंदिर में दर्शन ने इस सीट पर सॉफ्ट हिंदुत्व की प्रतिस्पर्धा को और तेज कर दिया है।

नेपाल की निकटता, मिथिला संस्कृति और वैश्य-यादव-मुस्लिम मतदाताओं का जातिगत समीकरण इस सीट को और रोचक बनाते हैं।

सीतामढ़ी और नेपाल के बीच सांस्कृतिक समानताएं, जैसे मधुबनी पेंटिंग और मैथिली भाषा, दोनों क्षेत्रों को जोड़ती हैं। छठ पूजा जैसे लोकपर्व में सीतामढ़ी और नेपाल के लोग एक साथ भाग लेते हैं।

इस सीट का विकास वर्षों से चर्चा में है, लेकिन स्थानीय लोगों का मानना है कि यहां विकास की कमी रही है।

5 लाख से अधिक जनसंख्या वाले इस क्षेत्र में जाम और जलभराव की समस्याएं लंबे समय से चर्चा का विषय बनी हुई हैं। स्थानीय लोग सोशल मीडिया पर अक्सर विधायक की अनुपस्थिति और समस्याओं के समाधान न होने की शिकायत करते हैं। इसके साथ ही, रोजगार और अपराध भी बड़े मुद्दे हैं। हाल की कुछ घटनाएं सीतामढ़ी को फिर से चर्चा में ले आई हैं।

इस विधानसभा क्षेत्र में वैश्य, ब्राह्मण, यादव और मुस्लिम मतदाताओं का एक विविध मिश्रण है, जिसके परिणामस्वरूप यहां की राजनीति में जातिगत समीकरण और सामाजिक गतिशीलता हमेशा चर्चा में रहती है।

सीतामढ़ी विधानसभा में कुल जनसंख्या 5,08,713 है। चुनाव आयोग के डाटा (जनवरी 2024) के अनुसार, कुल वोटर 3,10,237 हैं, जिसमें पुरुष मतदाता 1,64,057, महिलाएं मतदाता 1,46,161 और थर्ड जेंडर 19 हैं।

इस सीट पर राजद और भाजपा के बीच खुली चुनौती देखने को मिलती रही है। 2020 के विधानसभा चुनाव में जब नीतीश कुमार ने भाजपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ा, तब भाजपा की टिकट पर मिथिलेश कुमार ने जीत हासिल की। राजद को यहां हार का सामना करना पड़ा। हालांकि, 2015 में जब नीतीश कुमार ने भाजपा से अलग होकर चुनाव लड़ा, तब यहां राजद के उम्मीदवार को जीत मिली।

भाजपा इस बार फिर से जीत हासिल करना चाहेगी, जबकि राजद पिछली हार का बदला लेने के इरादे से मैदान में उतरेगी।

स्थानीय लोगों का मानना है कि वर्तमान भाजपा विधायक के प्रति नाराजगी है। लोग कहते हैं कि विधायक कभी भी क्षेत्र में नहीं आते हैं, और जलनिकासी, जो एक महत्वपूर्ण समस्या है, के लिए कोई काम नहीं हो रहा है।

Point of View

जो धार्मिक धरोहर और सियासी समीकरणों का संगम है, यह दर्शाता है कि कैसे स्थानीय मुद्दों, सांस्कृतिक पहचान और जातिगत समीकरण चुनावी राजनीति को प्रभावित करते हैं। यह चुनाव केवल एक सीट नहीं, बल्कि बिहार की राजनीतिक दिशा का निर्धारण करेगा।
NationPress
30/08/2025

Frequently Asked Questions

सीतामढ़ी विधानसभा में कौन से प्रमुख मुद्दे हैं?
सीतामढ़ी विधानसभा में जलभराव, रोजगार और विकास की कमी जैसे प्रमुख मुद्दे हैं।
क्या सीतामढ़ी का चुनावी समीकरण बदलने वाला है?
हां, माता जानकी मंदिर का शिलान्यास और स्थानीय मुद्दे चुनावी समीकरण को प्रभावित कर सकते हैं।
सीतामढ़ी विधानसभा की कुल जनसंख्या कितनी है?
सीतामढ़ी विधानसभा की कुल जनसंख्या 5,08,713 है।
सीतामढ़ी की राजनीति में जातिगत समीकरण का क्या महत्व है?
यहां वैश्य, ब्राह्मण, यादव और मुस्लिम मतदाता हैं, जो राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
सीतामढ़ी में किन दलों के बीच मुकाबला है?
सीतामढ़ी में मुख्य मुकाबला राजद और भाजपा के बीच है।