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क्या सिवान में लोजपा-रामविलास नेता अयूब खान के घर पर एसटीएफ ने छापेमारी की?

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क्या सिवान में लोजपा-रामविलास नेता अयूब खान के घर पर एसटीएफ ने छापेमारी की?

सारांश

सिवान में एसटीएफ और जिला पुलिस ने लोजपा के नेता अयूब खान के घर पर छापेमारी कर एके-47, कार्बाइन और अन्य हथियारों के साथ जिंदा कारतूस बरामद किए। क्या यह राजनीतिक प्रभाव का एक नया चेहरा है?

मुख्य बातें

सिवान में की गई एसटीएफ की छापेमारी ने एक बड़े आपराधिक नेटवर्क का पर्दाफाश किया।
अयूब खान और उसके भाई का आपराधिक इतिहास चिंताजनक है।
पुलिस ने बड़ी मात्रा में हथियार और कारतूस बरामद किए।
फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कई टीमें गठित की गई हैं।
यह घटना बिहार की राजनीतिक स्थिति को दर्शाती है।

सिवान, 8 अक्टूबर (राष्ट्र प्रेस)। बिहार विधानसभा चुनाव के आगमन से पहले, सिवान में एक महत्वपूर्ण पुलिस कार्रवाई हुई है। सिसवन थाना क्षेत्र के ग्यासपुर गांव में बुधवार की सुबह, एसटीएफ और जिला पुलिस की एक संयुक्त टीम ने लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेता अयूब खान के निवास पर छापेमारी की। इस दौरान, पुलिस ने एके-47, कार्बाइन, दोनाली बंदूक और बड़ी संख्या में जिंदा कारतूस बरामद किए।

सूत्रों के अनुसार, पुलिस को गुप्त जानकारी मिली थी कि अयूब खान और उसके भाई रईस खान के गिरोह के सदस्य किसी बड़ी आपराधिक घटना की योजना बना रहे हैं। इसी सूचना के आधार पर, रात को एसपी मनोज कुमार तिवारी के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया और तड़के सुबह ग्यासपुर गांव में कई ठिकानों पर छापेमारी की गई।

एसपी मनोज कुमार तिवारी ने बताया कि इस कार्रवाई के दौरान तीन व्यक्तियों, अब्दुल कलाम आजाद, बाबू अली और समीना खातून को गिरफ्तार किया गया। छापेमारी का नेतृत्व अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (सदर-1) अजय कुमार सिंह ने किया। एसटीएफ, जिला आसूचना इकाई और सिसवन थाने की टीम ने इस अभियान को सफल बनाया।

इस छापेमारी के दौरान, अयूब खान और उसके कुछ सहयोगी मौके से भागने में सफल रहे। पुलिस ने आस-पास के खेतों और बागीचों में तलाशी अभियान चलाया, लेकिन अभी तक अयूब खान की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। एसपी ने बताया कि फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कई टीमों का गठन किया गया है और जल्द ही उनकी गिरफ्तारी की संभावना है।

बता दें कि अयूब खान हाल ही में लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) में शामिल हुए थे, जबकि उनका भाई रईस खान रघुनाथपुर सीट से टिकट का दावेदार है।

सूत्रों के अनुसार, राजनीतिक प्रभाव का उपयोग करते हुए इन दोनों भाइयों ने अपने पुराने आपराधिक नेटवर्क को पुनर्जीवित कर लिया था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इतनी बड़ी मात्रा में हथियार कहाँ से आए और क्या इसका संबंध किसी बाहरी हथियार तस्करी गिरोह से है।

पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार तिवारी ने कहा, “यह कार्रवाई सिवान पुलिस और एसटीएफ की एक महत्वपूर्ण सफलता है। हमने बड़े पैमाने पर हथियार और गोला-बारूद बरामद किया है। इस नेटवर्क में शामिल हर व्यक्ति का पता लगाया जाएगा और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। किसी भी राजनीतिक दबाव में आकर हम ढिलाई नहीं बरतेंगे।”

उन्होंने बताया कि रईस खान पहले से ही 52 मामलों में आरोपित है और उस पर हत्या, रंगदारी और अवैध हथियार रखने के गंभीर आरोप हैं। पुलिस को संदेह है कि बरामद हथियार चुनाव से पहले इस क्षेत्र में भय का माहौल उत्पन्न करने के लिए जुटाए गए थे।

--आईएएनस

संपादकीय दृष्टिकोण

जो बिहार की राजनीतिक स्थिति को उजागर करती है। अयूब खान और उनके भाई का आपराधिक इतिहास और चुनावी राजनीति में उनकी भागीदारी, इस बात का संकेत देती है कि राजनीतिक दबाव और आपराधिक गतिविधियों के बीच गहरा संबंध है। यह आवश्यक है कि पुलिस और जांच एजेंसियां सख्त कार्यवाही करें ताकि लोकतंत्र की सुरक्षा हो सके।
RashtraPress
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