क्या 'प्रगति' नए भारत की कार्यसंस्कृति का प्रतीक है? यूपी बना इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रोथ इंजन: मुख्यमंत्री योगी

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क्या 'प्रगति' नए भारत की कार्यसंस्कृति का प्रतीक है? यूपी बना इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रोथ इंजन: मुख्यमंत्री योगी

सारांश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रगति मॉडल की सराहना की, जो नए भारत की कार्यसंस्कृति का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि यूपी अब देश का प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रोथ इंजन बन गया है। जानिए इस मॉडल की विशेषताएँ और उत्तर प्रदेश में इसके प्रभाव।

Key Takeaways

  • प्रगति मॉडल ने प्रशासनिक प्रक्रियाओं को तेज किया है।
  • उत्तर प्रदेश में इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की संख्या बढ़ी है।
  • डिजिटल गवर्नेंस के माध्यम से पारदर्शिता सुनिश्चित की गई है।
  • मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण की सराहना की है।
  • प्रगति ने रोजगार सृजन में मदद की है।

लखनऊ, 13 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि प्रो-एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इम्प्लीमेंटेशन (प्रगति) महज बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की समीक्षा का मंच नहीं है, बल्कि नए भारत की नई कार्यसंस्कृति और परिणामोन्मुख शासन का एक मजबूत उदाहरण है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इंटेंट, टेक्नोलॉजी और अकाउंटेबिलिटी के समन्वय से शासन में ठोस और समयबद्ध परिणाम सुनिश्चित हो रहे हैं। मंगलवार को आयोजित एक विशेष प्रेस वार्ता में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रगति उस प्रशासनिक मॉडल का विस्तार है, जिसकी नींव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए रखी थी और वर्ष 2014 के बाद इसे राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती दी गई।

उन्होंने कहा कि डिजिटल गवर्नेंस और कोऑपरेटिव फेडरलिज्म को सशक्त बनाते हुए प्रगति ने जटिल परियोजनाओं और प्रशासनिक अड़चनों के समाधान को सरल और तेज बनाया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रगति केवल एक रिव्यू मैकेनिज्म नहीं, बल्कि एक व्यापक गवर्नेंस रिफॉर्म है, जिसने शासन को फाइल-केंद्रित संस्कृति से निकालकर फील्ड-आधारित परिणामों की दिशा में अग्रसर किया है। इसके माध्यम से निर्णय प्रक्रिया में तेजी आई है, समय और लागत की बर्बादी रुकी है और केंद्र व राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय के साथ स्पष्ट जवाबदेही सुनिश्चित हुई है।

उन्होंने बताया कि प्रगति मॉडल की अवधारणा वर्ष 2003 में गुजरात में ‘स्वागत’ (स्टेट वाइड अटेंशन ऑन गवर्नेंस बाई एप्लिकेशन) के रूप में शुरू हुई थी, जिसका उद्देश्य नागरिक शिकायतों के त्वरित निस्तारण में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना था। यही मॉडल आगे चलकर प्रगति के राष्ट्रीय स्वरूप के रूप में विकसित हुआ।

राष्ट्रीय स्तर पर प्रगति के प्रभाव का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके माध्यम से अब तक 86 लाख करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को गति मिली है। इनमें 377 प्रमुख परियोजनाओं की प्रत्यक्ष समीक्षा प्रधानमंत्री द्वारा की जाती है, जबकि 3162 में से 2958 मुद्दों का समाधान किया जा चुका है।

उत्तर प्रदेश के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रगति मॉडल राज्य के लिए एक गेम-चेंजर साबित हुआ है। आज उत्तर प्रदेश देश के प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रोथ इंजन के रूप में उभर रहा है। एक्सप्रेसवे नेटवर्क, देश का सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क, सर्वाधिक शहरों में मेट्रो सेवाएं, एयर कनेक्टिविटी, देश की पहली रैपिड रेल, अंतर्देशीय जलमार्ग और रोपवे परियोजनाओं को समयबद्ध ढंग से आगे बढ़ाने में प्रगति की अहम भूमिका रही है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश के पास 10.48 लाख करोड़ रुपये की लागत की 330 इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं का पोर्टफोलियो है, जो देश में सबसे बड़ा है। इनमें से 2.37 लाख करोड़ रुपये की 128 परियोजनाएं (करीब 39 प्रतिशत) पूरी होकर कमीशन हो चुकी हैं, जबकि 8.11 लाख करोड़ रुपये की 202 परियोजनाएं निर्धारित समय-सीमा के भीतर प्रगति पर हैं। सरकार की प्राथमिकता गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करते हुए सभी प्रशासनिक और तकनीकी अड़चनों का समाधान करना है, ताकि परियोजनाएं तय समय में धरातल पर उतर सकें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रगति पोर्टल के माध्यम से प्रदेश में इंटर-एजेंसी बाधाओं का प्रभावी समाधान हुआ है। राजस्व, वन, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नगर विकास, पंचायती राज सहित सभी संबंधित विभाग एक ही मंच पर समन्वय के साथ निर्णय ले रहे हैं, जिससे हाईवे, रेलवे, पावर और टेलीकॉम जैसी परियोजनाओं में तेजी आई है।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में प्रगति के तहत 515 मुद्दों में से 494 का समाधान किया जा चुका है, जो लगभग 96 प्रतिशत है। वहीं, 287 परियोजनाओं में से 278 परियोजनाओं का समाधान सुनिश्चित किया गया है, जिसकी समाधान दर 97 प्रतिशत है। प्रगति जैसे तकनीक-आधारित प्लेटफॉर्म के कारण उत्तर प्रदेश आज बॉटलनेक स्टेट से निकलकर ब्रेकथ्रू स्टेट में परिवर्तित हो चुका है। अब राज्य सरकार केवल फैसिलिटेटर नहीं, बल्कि एक्सेलेरेटर की भूमिका में विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ा रही है। समयबद्ध परियोजनाएं रोजगार सृजन के साथ-साथ राज्य की आर्थिक गति को भी तेज करती हैं और इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी विजन के प्रति प्रदेशवासियों की ओर से आभार व्यक्त किया।

Point of View

यह स्पष्ट है कि योगी आदित्यनाथ का प्रगति मॉडल न केवल उत्तर प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में तेजी लाने में मदद कर रहा है, बल्कि यह पूरे देश में शासन की नई कार्यसंस्कृति का भी प्रतीक है। यह समय की मांग है कि अन्य राज्य भी इस मॉडल से सीखें और अपने विकास को त्वरित बनाएं।
NationPress
10/03/2026

Frequently Asked Questions

प्रगति मॉडल क्या है?
प्रगति मॉडल एक प्रशासनिक प्रणाली है जो बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की समीक्षा और कार्यान्वयन में मदद करती है।
उत्तर प्रदेश में प्रगति के क्या लाभ हैं?
उत्तर प्रदेश में प्रगति ने 330 इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को गति देने में सहायता की है।
क्या प्रगति मॉडल केवल यूपी के लिए है?
नहीं, प्रगति मॉडल का विकास राष्ट्रीय स्तर पर किया गया है और अन्य राज्यों में भी लागू किया जा सकता है।
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