क्या सोमनाथ: विनाश पर आस्था की विजय की अमर गाथा है, गजनवी के आक्रमण से लेकर पीएम मोदी के आधुनिक विजन तक की विकास यात्रा?

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क्या सोमनाथ: विनाश पर आस्था की विजय की अमर गाथा है, गजनवी के आक्रमण से लेकर पीएम मोदी के आधुनिक विजन तक की विकास यात्रा?

सारांश

सोमनाथ मंदिर की गाथा केवल आस्था की नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति के पुनर्निर्माण का प्रतीक है। गजनवी के आक्रमण से लेकर पीएम मोदी के विकास कार्यों तक, यह स्थल भारतीय आत्मगौरव की पहचान है। जानिए इस अद्भुत इतिहास के बारे में।

Key Takeaways

  • सोमनाथ मंदिर भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण स्थल है।
  • गजनवी के आक्रमण के बाद भी आस्था जीवित रही।
  • 1947 में सरदार पटेल ने इसका पुनर्निर्माण किया।
  • प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में इसका विकास हो रहा है।
  • सोमनाथ अब एक विश्व स्तरीय पर्यटन स्थल है।

गांधीनगर, 8 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता का केंद्र सोमनाथ मंदिर का इतिहास अडिग श्रद्धा और अविरत पुनर्निर्माण की अद्वितीय गाथा है। बारह ज्योतिर्लिंगों में प्रथम यह पवित्र धाम सदियों से भारतीय अस्मिता का रक्षक रहा है।

सोमनाथ मंदिर की भव्यता और समृद्धि ही प्राचीन समय में आक्रांताओं के लिए आकर्षण का कारण बनी थी। 1025-26 ईस्वी में अफगानिस्तान के गजनी प्रांत के सुल्तान महमूद गजनवी ने सोमनाथ पर सबसे विनाशकारी और बर्बर आक्रमण किया था। उस समय सोमनाथ अत्यंत समृद्ध धार्मिक केंद्र था, जिसे लूटने के लिए गजनवी ने रेगिस्तानी क्षेत्र के कठिन मार्गों को पार किया।

स्थानीय शासकों और जनसामान्य ने उसका वीरतापूर्वक सामना किया, लेकिन गजनवी ने मंदिर को भारी नुकसान पहुंचाया और इसकी अकूत संपत्ति को लूट लिया। इसके बावजूद, गजनवी लोगों की आस्था को समाप्त करने में असफल रहा। उसके जाने के बाद तुरंत ही चालुक्य (सोलंकी) शासकों ने मंदिर का पुनर्निर्माण कर संस्कृति को जीवित रखा।

भारत की स्वतंत्रता के बाद सोमनाथ मंदिर का नवनिर्माण राष्ट्रीय आत्मगौरव का विषय बन गया था। लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल ने 1947 में मंदिर का उसके मूल गौरव के साथ पुनर्निर्माण करने का संकल्प किया। उनके मार्गदर्शन में प्रसिद्ध शिल्पकार प्रभाशंकर सोमपुरा ने पारंपरिक चालुक्य शैली में भव्य मंदिर का निर्माण किया। 1951 में प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने इस मंदिर का लोकार्पण करते हुए इसे भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक बताया था।

प्रधानमंत्री मोदी के श्री सोमनाथ ट्रस्ट का अध्यक्ष बनने के बाद सोमनाथ के विकास में एक नया और आधुनिक अध्याय शुरू हुआ है। उनकी दूरदर्शी योजना के तहत मंदिर परिसर को विश्व स्तरीय पर्यटन स्थल बनाया गया है। श्रद्धालुओं के लिए डिजिटल दर्शन, सुरक्षा और सुविधाओं में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है।

प्रोमेनाड (वॉक-वे) :- समुद्र तट पर बना सुंदर पदयात्री मार्ग पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है।

टेक्नोलॉजी :- भव्य ‘लाइट एंड साउंड शो’ के माध्यम से इतिहास को जीवंत रखने के प्रयास किए गए हैं।

संरक्षण :- समुद्री क्षार और जंग से मंदिर को बचाने के लिए विशेष तकनीकी उपाय किए गए हैं।

आज सोमनाथ मंदिर उन पारंपरिक मूल्यों और आधुनिक विकास के समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर दुनिया भर के श्रद्धालुओं के लिए आस्था और राष्ट्रीय स्वाभिमान का जीवंत प्रतीक बनकर खड़ा है।

Point of View

इसकी पुनर्निर्माण की गाथा हमें यह सिखाती है कि आस्था और संस्कृति कभी समाप्त नहीं होती। यह स्थान आज भी श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
NationPress
09/01/2026

Frequently Asked Questions

सोमनाथ मंदिर का इतिहास क्या है?
सोमनाथ मंदिर का इतिहास गजनवी के आक्रमण से शुरू होता है, जब इसे लूटने की कोशिश की गई थी, लेकिन इसके पुनर्निर्माण ने इसे एक मजबूत सांस्कृतिक प्रतीक बना दिया।
पीएम मोदी ने सोमनाथ के विकास के लिए क्या कदम उठाए हैं?
पीएम मोदी ने सोमनाथ ट्रस्ट का अध्यक्ष बनते ही मंदिर परिसर को आधुनिक पर्यटन स्थल में तब्दील करने की दिशा में कई योजनाएं बनाई हैं।
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