दक्षिण कोरिया की PM हान सियोंग-सूक का प्योंगयांग से बातचीत फिर शुरू करने पर जोर, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का आह्वान
सारांश
मुख्य बातें
दक्षिण कोरिया की प्रधानमंत्री हान सियोंग-सूक ने रविवार, 18 अक्टूबर 2026 को सोल में स्पष्ट किया कि उनकी सरकार सोल और प्योंगयांग के बीच बंद पड़े संवाद के दरवाज़े फिर से खोलने के प्रयास जारी रखेगी और दोनों देशों के बीच शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की दिशा में काम करेगी। यह बयान ऐसे समय में आया है जब कुछ ही सप्ताह पहले सीमा पर बारूदी सुरंग विस्फोट की घटना से दोनों कोरियाई देशों के बीच तनाव काफी बढ़ गया था।
प्रधानमंत्री के मुख्य वक्तव्य
हान सोल में विस्थापित उत्तर कोरियाई नागरिकों के लिए आयोजित एक प्रतियोगिता कार्यक्रम में बोल रही थीं। उन्होंने कहा, 'दक्षिण कोरिया और उत्तर कोरिया के बीच बातचीत के रास्ते खोलने और शांति तथा साझा समृद्धि पर चर्चा करने के प्रयास किए जाएंगे।' उन्होंने दोनों देशों के विभाजन को एक 'हकीकत' बताया और यह भी रेखांकित किया कि विस्थापित नागरिकों और अलग हुए परिवारों का दर्द आज भी 'जारी' है।
प्रधानमंत्री ने आगे कहा, 'दक्षिण कोरिया और उत्तर कोरिया के शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का रास्ता खोलने के हमारे प्रयास रुक नहीं सकते।' उन्होंने प्रतिभागियों से शांति स्थापित करने में सहयोग का अनुरोध किया और दक्षिण कोरिया के आर्थिक विकास तथा लोकतंत्रीकरण में उनके योगदान के लिए धन्यवाद दिया।
सीमा पर बारूदी सुरंग विस्फोट और आरोप-प्रत्यारोप
गौरतलब है कि 21 सितंबर को दोनों कोरियाई देशों की सीमा के निकट हुए एक विस्फोट में तीन दक्षिण कोरियाई सैनिक घायल हो गए थे। 8 अक्टूबर को दक्षिण कोरिया ने संयुक्त राष्ट्र में उत्तर कोरिया से 'जिम्मेदार कदम' उठाने का आग्रह किया। दक्षिण कोरिया का आरोप है कि प्योंगयांग ने जानबूझकर 'सैन्य सीमा रेखा' (MDL) के दक्षिण में एक बारूदी सुरंग बिछाई, जो युद्धविराम समझौते का स्पष्ट उल्लंघन है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र की एक समिति बैठक में न्यूयॉर्क में दक्षिण कोरिया के राजदूत चा जी-हून ने बताया कि दक्षिण कोरियाई सेना और संयुक्त राष्ट्र कमान (UNC) की संयुक्त जाँच — जिसे फोरेंसिक विश्लेषण का भी समर्थन प्राप्त है — से यह पुष्टि हुई है कि यह विस्फोट उत्तर कोरियाई बलों द्वारा जानबूझकर बिछाई गई बारूदी सुरंग के कारण हुआ। उन्होंने उत्तर कोरिया से माफी माँगने और तनाव बढ़ाने वाली गतिविधियाँ रोकने का आग्रह किया।
उत्तर कोरिया की प्रतिक्रिया
उत्तर कोरिया के प्रतिनिधि ने सोल के सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उनका कहना था कि यह प्योंगयांग द्वारा अपनी दक्षिणी सीमा को मजबूत करने के प्रयासों को 'सैन्य घुसपैठ' के रूप में पेश करने की कोशिश है। प्रतिनिधि ने कहा, 'यह आरओके सेना की एक घटिया चाल के अलावा और कुछ नहीं है, जिसका मकसद अपनी गलतियों का दोष डीपीआरके पर मढ़ना है।'
परमाणु विवाद पर परस्पर विरोधी रुख
दोनों देशों ने प्योंगयांग के परमाणु हथियार कार्यक्रम को लेकर अपने परस्पर विरोधी रुख एक बार फिर दोहराए। राजदूत चा ने परमाणु अप्रसार के प्रति सोल की प्रतिबद्धता दोहराई और उत्तर कोरिया से 'परमाणु अप्रसार संधि' (NPT) तथा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संबंधित प्रस्तावों का पूर्ण अनुपालन करने का आग्रह किया।
उत्तर कोरियाई प्रतिनिधि ने अपने देश के परमाणु हथियारों का बचाव करते हुए कहा कि 'दशकों से अमेरिकी परमाणु खतरे' के सामने यह उनकी संप्रभुता की रक्षा के लिए एक अनिवार्य विकल्प है।
आगे क्या होगा
प्रधानमंत्री हान के ताज़ा बयान से यह स्पष्ट है कि सोल कूटनीतिक चैनल खुले रखने का इच्छुक है, लेकिन सीमा पर हालिया घटनाएँ और परमाणु मुद्दे पर गहरे मतभेद किसी भी वास्तविक संवाद की राह में बड़ी बाधा बने हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों के अनुसार, तनाव कम करने के लिए दोनों पक्षों की ओर से ठोस कदम उठाना अपरिहार्य होगा।