18 अक्टूबर 2026
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दक्षिण कोरिया की PM हान सियोंग-सूक का प्योंगयांग से बातचीत फिर शुरू करने पर जोर, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का आह्वान

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दक्षिण कोरिया की PM हान सियोंग-सूक का प्योंगयांग से बातचीत फिर शुरू करने पर जोर, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का आह्वान

सारांश

सीमा पर बारूदी सुरंग विस्फोट से तनाव के बीच दक्षिण कोरियाई प्रधानमंत्री हान सियोंग-सूक ने प्योंगयांग के साथ बातचीत फिर शुरू करने का संकल्प दोहराया — लेकिन परमाणु विवाद और आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।

मुख्य बातें

दक्षिण कोरियाई प्रधानमंत्री हान सियोंग-सूक ने 18 अक्टूबर 2026 को प्योंगयांग के साथ बातचीत फिर शुरू करने और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का आह्वान किया।
21 सितंबर को सीमा पर हुए बारूदी सुरंग विस्फोट में तीन दक्षिण कोरियाई सैनिक घायल हुए; दक्षिण कोरिया ने उत्तर कोरिया पर युद्धविराम समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाया।
दक्षिण कोरिया- UNC की संयुक्त जाँच और फोरेंसिक विश्लेषण ने पुष्टि की कि सुरंग उत्तर कोरियाई बलों ने MDL के दक्षिण में जानबूझकर बिछाई थी।
उत्तर कोरिया ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए इसे दक्षिण कोरियाई सेना की 'घटिया चाल' करार दिया।
दोनों देशों ने परमाणु हथियार कार्यक्रम पर परस्पर विरोधी रुख दोहराए; उत्तर कोरिया ने परमाणु शस्त्रों को 'अनिवार्य' बताया।

दक्षिण कोरिया की प्रधानमंत्री हान सियोंग-सूक ने रविवार, 18 अक्टूबर 2026 को सोल में स्पष्ट किया कि उनकी सरकार सोल और प्योंगयांग के बीच बंद पड़े संवाद के दरवाज़े फिर से खोलने के प्रयास जारी रखेगी और दोनों देशों के बीच शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की दिशा में काम करेगी। यह बयान ऐसे समय में आया है जब कुछ ही सप्ताह पहले सीमा पर बारूदी सुरंग विस्फोट की घटना से दोनों कोरियाई देशों के बीच तनाव काफी बढ़ गया था।

प्रधानमंत्री के मुख्य वक्तव्य

हान सोल में विस्थापित उत्तर कोरियाई नागरिकों के लिए आयोजित एक प्रतियोगिता कार्यक्रम में बोल रही थीं। उन्होंने कहा, 'दक्षिण कोरिया और उत्तर कोरिया के बीच बातचीत के रास्ते खोलने और शांति तथा साझा समृद्धि पर चर्चा करने के प्रयास किए जाएंगे।' उन्होंने दोनों देशों के विभाजन को एक 'हकीकत' बताया और यह भी रेखांकित किया कि विस्थापित नागरिकों और अलग हुए परिवारों का दर्द आज भी 'जारी' है।

प्रधानमंत्री ने आगे कहा, 'दक्षिण कोरिया और उत्तर कोरिया के शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का रास्ता खोलने के हमारे प्रयास रुक नहीं सकते।' उन्होंने प्रतिभागियों से शांति स्थापित करने में सहयोग का अनुरोध किया और दक्षिण कोरिया के आर्थिक विकास तथा लोकतंत्रीकरण में उनके योगदान के लिए धन्यवाद दिया।

सीमा पर बारूदी सुरंग विस्फोट और आरोप-प्रत्यारोप

गौरतलब है कि 21 सितंबर को दोनों कोरियाई देशों की सीमा के निकट हुए एक विस्फोट में तीन दक्षिण कोरियाई सैनिक घायल हो गए थे। 8 अक्टूबर को दक्षिण कोरिया ने संयुक्त राष्ट्र में उत्तर कोरिया से 'जिम्मेदार कदम' उठाने का आग्रह किया। दक्षिण कोरिया का आरोप है कि प्योंगयांग ने जानबूझकर 'सैन्य सीमा रेखा' (MDL) के दक्षिण में एक बारूदी सुरंग बिछाई, जो युद्धविराम समझौते का स्पष्ट उल्लंघन है।

संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र की एक समिति बैठक में न्यूयॉर्क में दक्षिण कोरिया के राजदूत चा जी-हून ने बताया कि दक्षिण कोरियाई सेना और संयुक्त राष्ट्र कमान (UNC) की संयुक्त जाँच — जिसे फोरेंसिक विश्लेषण का भी समर्थन प्राप्त है — से यह पुष्टि हुई है कि यह विस्फोट उत्तर कोरियाई बलों द्वारा जानबूझकर बिछाई गई बारूदी सुरंग के कारण हुआ। उन्होंने उत्तर कोरिया से माफी माँगने और तनाव बढ़ाने वाली गतिविधियाँ रोकने का आग्रह किया।

उत्तर कोरिया की प्रतिक्रिया

उत्तर कोरिया के प्रतिनिधि ने सोल के सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उनका कहना था कि यह प्योंगयांग द्वारा अपनी दक्षिणी सीमा को मजबूत करने के प्रयासों को 'सैन्य घुसपैठ' के रूप में पेश करने की कोशिश है। प्रतिनिधि ने कहा, 'यह आरओके सेना की एक घटिया चाल के अलावा और कुछ नहीं है, जिसका मकसद अपनी गलतियों का दोष डीपीआरके पर मढ़ना है।'

परमाणु विवाद पर परस्पर विरोधी रुख

दोनों देशों ने प्योंगयांग के परमाणु हथियार कार्यक्रम को लेकर अपने परस्पर विरोधी रुख एक बार फिर दोहराए। राजदूत चा ने परमाणु अप्रसार के प्रति सोल की प्रतिबद्धता दोहराई और उत्तर कोरिया से 'परमाणु अप्रसार संधि' (NPT) तथा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संबंधित प्रस्तावों का पूर्ण अनुपालन करने का आग्रह किया।

उत्तर कोरियाई प्रतिनिधि ने अपने देश के परमाणु हथियारों का बचाव करते हुए कहा कि 'दशकों से अमेरिकी परमाणु खतरे' के सामने यह उनकी संप्रभुता की रक्षा के लिए एक अनिवार्य विकल्प है।

आगे क्या होगा

प्रधानमंत्री हान के ताज़ा बयान से यह स्पष्ट है कि सोल कूटनीतिक चैनल खुले रखने का इच्छुक है, लेकिन सीमा पर हालिया घटनाएँ और परमाणु मुद्दे पर गहरे मतभेद किसी भी वास्तविक संवाद की राह में बड़ी बाधा बने हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों के अनुसार, तनाव कम करने के लिए दोनों पक्षों की ओर से ठोस कदम उठाना अपरिहार्य होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नज़र आती है — सीमा पर ताज़ा विस्फोट, परमाणु हथियारों पर उत्तर कोरिया का अड़ियल रवैया और संयुक्त राष्ट्र में आरोप-प्रत्यारोप मिलकर किसी भी वास्तविक संवाद की संभावना को कमज़ोर करते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब दोनों कोरियाई देशों के बीच 2018 के बाद से कोई सार्थक उच्चस्तरीय वार्ता नहीं हुई है। जब तक प्योंगयांग अपनी सीमा-संबंधी कार्रवाइयों और परमाणु रुख में कोई ठोस बदलाव नहीं करता, सोल की 'खुले दरवाज़े' की नीति एक कूटनीतिक मुद्रा से ज़्यादा कुछ नहीं बन पाएगी।
RashtraPress
18 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दक्षिण कोरियाई प्रधानमंत्री हान सियोंग-सूक ने प्योंगयांग के बारे में क्या कहा?
हान सियोंग-सूक ने 18 अक्टूबर 2026 को कहा कि उनकी सरकार सोल और प्योंगयांग के बीच बातचीत फिर से शुरू करने के प्रयास करेगी और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की दिशा में काम करती रहेगी। उन्होंने विस्थापित उत्तर कोरियाई नागरिकों के कार्यक्रम में यह बात कही।
सीमा पर बारूदी सुरंग विस्फोट की घटना क्या थी?
21 सितंबर 2026 को दोनों कोरियाई देशों की सीमा के निकट एक बारूदी सुरंग विस्फोट में तीन दक्षिण कोरियाई सैनिक घायल हो गए। दक्षिण कोरिया-UNC की संयुक्त जाँच और फोरेंसिक विश्लेषण के अनुसार, यह सुरंग उत्तर कोरियाई बलों ने सैन्य सीमा रेखा (MDL) के दक्षिण में जानबूझकर बिछाई थी।
उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया के आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया दी?
उत्तर कोरिया के संयुक्त राष्ट्र प्रतिनिधि ने सभी आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने इसे दक्षिण कोरियाई सेना की 'घटिया चाल' बताया, जिसका मकसद अपनी गलतियों का दोष उत्तर कोरिया पर मढ़ना है।
परमाणु हथियार कार्यक्रम पर दोनों देशों का रुख क्या है?
दक्षिण कोरिया ने परमाणु अप्रसार संधि (NPT) और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का पूर्ण अनुपालन करने की माँग की। उत्तर कोरिया ने अपने परमाणु हथियारों का बचाव करते हुए कहा कि 'दशकों से अमेरिकी परमाणु खतरे' के सामने यह उनकी संप्रभुता की रक्षा के लिए अनिवार्य है।
दोनों कोरियाई देशों के बीच संवाद की संभावनाएँ क्या हैं?
प्रधानमंत्री हान ने बातचीत की इच्छाशक्ति ज़ाहिर की है, लेकिन हालिया सीमा विवाद, परमाणु मुद्दे पर गहरे मतभेद और संयुक्त राष्ट्र में आरोप-प्रत्यारोप वास्तविक संवाद की राह में बड़ी बाधाएँ हैं। विश्लेषकों के अनुसार 2018 के बाद से कोई सार्थक उच्चस्तरीय वार्ता नहीं हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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