जोजिला में हिमस्खलन: श्रीनगर-लेह हाईवे बंद, 3 ड्राइवर सुरक्षित बचाए गए
सारांश
Key Takeaways
- रविवार, 26 अप्रैल को जोजिला दर्रे के शैतानी नाला के पास भीषण हिमस्खलन आया।
- सोनमर्ग से कारगिल जा रहे दो टैंकर समेत कई वाहन बर्फ में दब गए।
- यूटीडीआरएफ कारगिल, द्रास पुलिस और स्वयंसेवकों ने तीनों ड्राइवरों को सुरक्षित बचाया।
- श्रीनगर-लेह हाईवे फिलहाल बंद है, बर्फ हटाने का काम जारी है।
- २७ मार्च को भी इसी दर्रे पर हिमस्खलन में ६ लोगों की मौत हुई थी।
- जोजिला टनल (१४.२ किमी लंबी) का निर्माण जारी है, जो पूरा होने पर लद्दाख को साल भर देश से जोड़ेगी।
श्रीनगर, 26 अप्रैल: लद्दाख के जोजिला दर्रे में रविवार को आए भीषण हिमस्खलन के बाद श्रीनगर-लेह नेशनल हाईवे पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद कर दी गई है। द्रास सेक्टर के शैतानी नाला के पास हुए इस हिमस्खलन में सोनमर्ग से कारगिल की ओर जा रहे दो टैंकर समेत कई वाहन बर्फ की चपेट में आकर सड़क से नीचे जा गिरे। राहत दलों ने तत्काल अभियान चलाकर तीनों फंसे ड्राइवरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
हिमस्खलन का घटनाक्रम
रविवार की सुबह जोजिला दर्रे के शैतानी नाला क्षेत्र में अचानक भारी हिमस्खलन आया। सोनमर्ग से कारगिल की दिशा में जा रहे वाहनों का एक काफिला उस समय इस इलाके से गुजर रहा था।
हिमस्खलन की चपेट में दो टैंकर और कई अन्य वाहन आ गए, जो बर्फ के दबाव से सड़क से नीचे खिसक गए। वाहनों में सवार तीन ड्राइवर बर्फ में फंस गए और उनका संपर्क टूट गया।
राहत एवं बचाव अभियान
सूचना मिलते ही यूटीडीआरएफ कारगिल, द्रास पुलिस स्टेशन और स्थानीय स्वयंसेवकों की संयुक्त टीमों ने तत्काल राहत अभियान शुरू किया। कड़ाके की ठंड और कठिन परिस्थितियों के बावजूद बचाव दल ने तीनों ड्राइवरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
अधिकारियों ने बताया कि क्षतिग्रस्त वाहनों को भी बर्फ से बाहर निकाल लिया गया है। फिलहाल श्रीनगर-लेह हाईवे यातायात के लिए बंद है और बर्फ हटाने का काम जारी है।
जोजिला — देश का सबसे खतरनाक दर्रा
जोजिला दर्रा श्रीनगर-लेह हाईवे पर सबसे संवेदनशील और खतरनाक हिस्सों में से एक माना जाता है। समुद्र तल से लगभग ११,५७५ फीट की ऊंचाई पर स्थित यह दर्रा सर्दियों में महीनों बंद रहता है और बसंत-गर्मियों में भी हिमस्खलन का खतरा बना रहता है।
पिछले ७० वर्षों में इस रास्ते पर दर्जनों हादसे हो चुके हैं, जिनमें सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है। गौरतलब है कि २७ मार्च को भी इसी जोजिला दर्रे में हुए एक अन्य हिमस्खलन में ६ लोगों की मौत हो गई थी और ५ अन्य घायल हुए थे। यानी महज एक महीने के भीतर यह दूसरा बड़ा हिमस्खलन है।
जोजिला टनल — स्थायी समाधान की ओर
इन बार-बार होने वाले हादसों को देखते हुए सरकार जोजिला टनल का निर्माण करा रही है, जो जम्मू-कश्मीर के गांदरबल जिले के सोनमर्ग को लद्दाख के कारगिल जिले के द्रास से सीधे जोड़ेगी।
यह सुरंग ९.५ मीटर चौड़ी, ७.५७ मीटर ऊंची और १४.२ किलोमीटर लंबी होगी। यह घोड़े की नाल के आकार की सिंगल-ट्यूब, दो-लेन सड़क सुरंग होगी, जो समुद्र तल से करीब १२,००० फीट की ऊंचाई पर निर्मित हो रही है।
इस टनल को पास की जेड-मोढ़ टनल के साथ जोड़कर लद्दाख को पूरे साल, हर मौसम में देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने की योजना है। इससे न केवल सेना की आपूर्ति सुनिश्चित होगी, बल्कि आम नागरिकों और पर्यटकों को भी भारी राहत मिलेगी।
बड़ा सवाल: बार-बार हादसे, कब मिलेगा स्थायी हल?
यह विडंबना है कि जोजिला टनल परियोजना वर्षों से चल रही है, लेकिन हर साल इस दर्रे पर जानें जाती रहती हैं। मार्च २०२५ में ६ मौतें और अब अप्रैल २०२५ में एक और बड़ा हिमस्खलन — यह सिलसिला तब तक जारी रहेगा जब तक टनल पूरी तरह चालू नहीं हो जाती।
फिलहाल श्रीनगर-लेह हाईवे पर बर्फ हटाने का काम युद्धस्तर पर जारी है। अधिकारियों के अनुसार सड़क को जल्द से जल्द खोलने की कोशिश की जा रही है, लेकिन मौसम की स्थिति और हिमस्खलन के खतरे को देखते हुए यातायात बहाली की कोई निश्चित समयसीमा नहीं दी गई है।