11 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

क्या सुप्रीम कोर्ट हेट स्पीच पर दायर याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रखेगा?

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
क्या सुप्रीम कोर्ट हेट स्पीच पर दायर याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रखेगा?

सारांश

क्या सुप्रीम कोर्ट हेट स्पीच पर दायर याचिकाओं का फैसला सुरक्षित रखेगा? सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा हुई। जानिए इस मामले में क्या हुआ।

मुख्य बातें

हेट स्पीच पर कार्रवाई की मांग बढ़ रही है।
सुप्रीम कोर्ट ने पक्षकारों से लिखित दलीलें मांगी हैं।
भड़काऊ बयानबाजी पर नियंत्रण का सवाल उठाया गया है।
सामाजिक स्तर के व्यक्ति के अधिकारों की रक्षा महत्वपूर्ण है।

नई दिल्ली, 20 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को हेट स्पीच की घटनाओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने वाली विभिन्न याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता ने सभी पक्षों को लिखित दलीलें प्रस्तुत करने के लिए कहा है।

सुप्रीम कोर्ट को यह निर्णय लेना है कि क्या सांप्रदायिक आधार पर भड़काऊ बयानबाजी पर नियंत्रण के लिए कोई विशेष दिशा-निर्देश बनाए जाएं। कोर्ट ने 2018 में भीड़ हिंसा को रोकने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए थे। याचिकाओं में इस आदेश के सही तरीके से पालन नहीं होने और भड़काऊ बयानबाजी को रोकने के लिए कोर्ट की दखल की मांग भी की गई है।

सुनवाई के दौरान वकील निजाम पाशा ने कहा कि शिकायतों के बाद भी एफआईआर नहीं दर्ज होती हैं। यदि एफआईआर दर्ज होती है, तो उसमें सही धाराएं नहीं लगाई जातीं। हेट स्पीच से हेट क्राइम होते हैं।

एडवोकेट एमआर शमशाद ने बताया कि सामान्य हेट स्पीच के अलावा, एक प्रवृत्ति है कि केवल धार्मिक हस्तियों को निशाना बनाया जाता है। शिकायत करने पर एफआईआर केवल इस वजह से नहीं होती क्योंकि इसमें मंजूरी की आवश्यकता होती है।

हिंदू सेना के वकील बरुण सिन्हा ने कहा कि कुछ नेताओं ने हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ सांप्रदायिक बयान दिए हैं। मैंने इस पर शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

एडवोकेट संजय हेगड़े ने कहा कि एक न्यूज चैनल ने किसी समुदाय के लिए यूपीएससी की कोचिंग की व्यवस्था को 'यूपीएससी जिहाद' बताया था। सुप्रीम कोर्ट ने कम से कम दो निर्णय दिए हैं। समस्या यह है कि अक्सर एक व्यक्ति या संगठन की बोलने की आज़ादी दूसरे के लिए हेट स्पीच बन जाती है।

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने वकीलों को स्पष्टीकरण, सुझाव और तर्क प्रस्तुत करने के लिए दो हफ्ते का समय दिया है। कोर्ट ने कहा कि पक्षकार दो हफ्ते के अंदर अपने संक्षिप्त नोट्स प्रस्तुत कर सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह समाज में सहिष्णुता और संवाद को बढ़ावा देने का भी एक अवसर है। हमें यह समझना होगा कि सभी का अधिकार है कि वे अपनी बात रख सकें, लेकिन यह अधिकार दूसरों के अधिकारों का उल्लंघन नहीं कर सकता।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्रीम कोर्ट की भूमिका क्या है?
सुप्रीम कोर्ट संविधान की रक्षा करता है और हेट स्पीच के मामलों में न्याय सुनिश्चित करता है।
क्या हेट स्पीच के खिलाफ कोई कानून है?
भारत में हेट स्पीच के खिलाफ विभिन्न धाराएं हैं, लेकिन इनके सही तरीके से लागू होने की आवश्यकता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 महीने पहले
  2. 4 महीने पहले
  3. 6 महीने पहले
  4. 6 महीने पहले
  5. 6 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 12 महीने पहले
  8. 1 साल पहले