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क्या अजमेर दरगाह को लेकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला सराहनीय है?: सलमान चिश्ती

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क्या अजमेर दरगाह को लेकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला सराहनीय है?: सलमान चिश्ती

सारांश

सुप्रीम कोर्ट ने पीएम मोदी की चादर को लेकर याचिका को खारिज कर दिया है। हाजी सैयद सलमान चिश्ती ने इसे ऐतिहासिक फैसला बताया है। अजमेर शरीफ की दरगाह पर शांति का संदेश और सभी धर्मों का सम्मान किया गया। जानिए इस महत्वपूर्ण फैसले के पीछे की कहानी।

मुख्य बातें

सुप्रीम कोर्ट ने नफरत फैलाने वाली याचिका को खारिज किया।
उर्स उत्सव में 10 लाख लोगों ने भाग लिया।
पीएम मोदी ने 2014 से चादर भेजी है।
चिश्ती फाउंडेशन का उद्देश्य सहिष्णुता को बढ़ावा देना है।
यह फैसला धार्मिक एकता का प्रतीक है।

अजमेर, 5 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। चिश्ती फाउंडेशन के अध्यक्ष हाजी सैयद सलमान चिश्ती ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा अजमेर शरीफ में पीएम मोदी की चादर चढ़ाने की इजाजत को रोकने वाली याचिका को खारिज करने पर अपनी खुशी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि नफरत फैलाने वाले इस तरह की बेवजह याचिकाएं दायर करते हैं, और कोर्ट ने सही निर्णय लिया कि इसे खारिज किया जाए।

अजमेर में चिश्ती फाउंडेशन के अध्यक्ष हाजी सैयद सलमान चिश्ती ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि मैं सबसे पहले देशवासियों को नए साल 2026 की शुभकामनाएं देना चाहता हूं। आज सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक आदेश जारी किया है। इस बार भी उर्स के दौरान शांति का संदेश दिया गया है। लगभग 10 लाख लोगों ने उर्स उत्सव में भाग लिया। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरन रिजिजू ने भी 'चादर' चढ़ाई। केंद्र सरकार, कैबिनेट, अल्पसंख्यक मंत्रालय और पीएम ने भारत की आध्यात्मिक विरासतों के बारे में एक आध्यात्मिक संदेश दिया है। हम उनके प्रति आभारी हैं। हम सुप्रीम कोर्ट के भी आभारी हैं, जिसने यह फैसला सुनाया और इस धोखाधड़ी वाली याचिका को खारिज किया, जो कि उस पवित्र परंपरा को रोकने के लिए दायर की गई थी।

उन्होंने कहा कि दरगाह अजमेर शरीफ के संत का सम्मान करती है। हम सुप्रीम कोर्ट की सराहना करते हैं और धन्यवाद देते हैं कि उसने भारतीयों की आवाज को बनाए रखा। इस उर्स के दौरान सभी धर्मों के लोग उपस्थित थे, और गणमान्य व्यक्तियों ने 'चादर' चढ़ाई। हम जांच एजेंसियों से अनुरोध करते हैं कि वे इन असामाजिक तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें जो न्यायपालिका का उपयोग करके देश में अराजकता फैलाने का प्रयास कर रहे हैं। उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, और यह जांच होनी चाहिए कि उन्हें फंडिंग कैसे मिलती है और कौन उनका समर्थन करता है।

उन्होंने कहा कि अजमेर शरीफ दरगाह पूरी तरह से एक आध्यात्मिक स्थान है, जहां सभी धर्मों के लोग प्यार और सद्भाव के साथ एकत्रित होते हैं। देश के सभी प्रधानमंत्रियों ने यहां से शांति का संदेश भेजा है। इसी परंपरा में, 2014 से अब तक पीएम नरेंद्र मोदी दरगाह में चादर भेजते रहे हैं और शांति का संदेश देते रहे हैं। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी की ओर से हर साल जो चादर यहां आती थी, उसे रोकने के लिए याचिका दाखिल की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया है। इस फैसले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि नफरत के लिए कोई स्थान नहीं है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह यह भी दर्शाता है कि भारतीय न्यायपालिका किसी भी प्रकार की नफरत और अराजकता के खिलाफ सख्त कदम उठाने के लिए तत्पर है। यह एक सकारात्मक संकेत है कि हम सब मिलकर एक शांतिपूर्ण समाज की ओर बढ़ सकते हैं।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका क्यों खारिज की?
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को खारिज किया क्योंकि यह नफरत फैलाने वाली थी और न्यायपालिका का इस्तेमाल करके अराजकता फैलाने का प्रयास कर रही थी।
उर्स में कितने लोग शामिल हुए थे?
उर्स उत्सव में लगभग 10 लाख लोग शामिल हुए थे, जो विभिन्न धर्मों से थे।
पीएम मोदी की चादर कब से भेजी जा रही है?
पीएम मोदी ने 2014 से अब तक दरगाह में चादर भेजी है और शांति का संदेश दिया है।
चिश्ती फाउंडेशन का क्या उद्देश्य है?
चिश्ती फाउंडेशन का उद्देश्य धार्मिक सहिष्णुता को बढ़ावा देना और सभी धर्मों के लोगों को एक साथ लाना है।
क्या सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला महत्वपूर्ण है?
जी हां, यह फैसला धार्मिक सहिष्णुता और न्यायपालिका की स्वतंत्रता का प्रतीक है।
राष्ट्र प्रेस
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