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भारत के साथ सहयोग को मजबूत कर अमेरिका ने चीन को चुनौती देने की रणनीति बनाई है

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भारत के साथ सहयोग को मजबूत कर अमेरिका ने चीन को चुनौती देने की रणनीति बनाई है

सारांश

अमेरिकी राज्य विभाग की नई योजना में 2026-2030 के दौरान चीन के बढ़ते प्रभाव का सामना करने के लिए भारत के साथ आर्थिक साझेदारी को महत्वपूर्ण बताया गया है। जानें अमेरिका का यह नया दृष्टिकोण क्या है।

मुख्य बातें

अमेरिका का लक्ष्य: चीन के बढ़ते प्रभाव का संतुलन बनाए रखना।
भारत के साथ साझेदारी: शर्तें जो अमेरिका के हितों के अनुकूल हों।
क्वाड का महत्व: अमेरिका, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया का साझा मंच।

वॉशिंगटन, २४ फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिकी राज्य विभाग ने अपनी २०२६–२०३० की रणनीतिक योजना में स्पष्ट रूप से यह उल्लेख किया है कि २१वीं सदी का भविष्य इस पर निर्भर करेगा कि अमेरिका, चीन के बढ़ते प्रभाव का कैसे सामना करता है। इसके साथ ही, एक महत्वपूर्ण हिंद-प्रशांत रणनीति के तहत भारत के साथ एक गहरी, लेकिन शर्तों पर आधारित आर्थिक साझेदारी का संकेत दिया गया है।

वास्तव में, अमेरिका की नीति सीधे चीन के साथ टकराव की नहीं है, बल्कि यह कड़े प्रतिस्पर्धा, अपने राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा और भारत जैसे देशों के साथ रणनीतिक सहयोग को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।

अमेरिकी राज्य विभाग के २०२६–२०३० की एजेंसी रणनीतिक योजना में उल्लेख किया गया है, "चीन के विकास पर अमेरिका की प्रतिक्रिया, २१वीं सदी की कहानी को निर्धारित करेगी।"

अमेरिका का मानना है कि चीन तेजी से एक आर्थिक और सैन्य शक्ति बनता जा रहा है। एशिया विश्व की लगभग आधी जीडीपी का केंद्र है, और महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग (सी लेन) और सप्लाई चेन भी यहीं स्थित हैं। इसलिए, हिंद-प्रशांत क्षेत्र अमेरिका के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अमेरिका चीन के साथ युद्ध या सत्ता परिवर्तन नहीं चाहता। वह संवाद बनाए रखना चाहता है, लेकिन आवश्यकता पड़ने पर प्रतिस्पर्धा के लिए भी तैयार रहेगा।

योजना में भारत को एक उभरती हुई बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में देखा गया है। अमेरिका भारत के साथ साझेदारी बढ़ाना चाहता है, लेकिन ऐसी शर्तों पर जो उसके अपने सुरक्षा और आर्थिक हितों के अनुकूल हों। अमेरिका हिंद-प्रशांत क्षेत्र में ऐसा आर्थिक ढांचा चाहता है जो बाहरी दबावों से मुक्त हो। वह उन देशों या कंपनियों पर नजर रखेगा जो तीसरे देशों के माध्यम से अमेरिकी टैरिफ से बचने का प्रयास करते हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन ने तेजी से अपनी सैन्य ताकत को बढ़ाया है। अमेरिका चाहता है कि क्षेत्र में ताकत का संतुलन बना रहे, ताकि व्यापार मार्ग सुरक्षित रह सकें।

अमेरिका अपने सहयोगी देशों के साथ आर्थिक और सैन्य रिश्तों को मजबूत करेगा। इसमें अमेरिका, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया का साझा मंच क्वाड भी शामिल है। अमेरिका अपने उद्योगों को "गलत व्यापार तरीकों" से बचाना चाहता है और खुद को २१वीं सदी की तकनीकी और आर्थिक महाशक्ति बनाए रखना चाहता है।

भारत का उल्लेख करते हुए योजना में कहा गया, "हम भारत जैसी उभरती हुई क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था के साथ साझेदारी करने का प्रयास करेंगे, लेकिन ऐसी शर्तों पर जो अमेरिका की सुरक्षा और आर्थिक रुचियों को बढ़ावा दें और पूर्व की गलतियों को दोहराने से बचें।"

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसमें भारत के साथ संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। यह रणनीति न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखती है, बल्कि वैश्विक आर्थिक संतुलन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमेरिका की नई रणनीति का मुख्य उद्देश्य क्या है?
अमेरिका की नई रणनीति का मुख्य उद्देश्य चीन के बढ़ते प्रभाव का सामना करना और भारत जैसे सहयोगियों के साथ रणनीतिक साझेदारी को बढ़ावा देना है।
भारत के साथ अमेरिका की साझेदारी पर क्या शर्तें होंगी?
अमेरिका भारत के साथ साझेदारी बढ़ाना चाहता है, लेकिन ऐसी शर्तों पर जो उसकी सुरक्षा और आर्थिक हितों के अनुकूल हों।
राष्ट्र प्रेस
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