तब्बू ने 'निन्ने पेल्लाडाथा' के 30 साल पूरे होने पर किया जश्न, बोलीं — यह कहानी पीढ़ियों के दिलों में बसी है
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेत्री तब्बू ने 5 अक्टूबर 2026 को अपने इंस्टाग्राम पर एक भावुक पोस्ट साझा करते हुए तेलुगु रोमांटिक फिल्म 'निन्ने पेल्लाडाथा' के 30 वर्ष पूरे होने का उत्सव मनाया। नागार्जुन के साथ अभिनीत इस फिल्म को उन्होंने 'समय की कसौटी पर खरी उतरी कहानी' बताया, जिसके गाने आज भी श्रोताओं के मन में ताज़ा हैं।
तब्बू का भावुक संदेश
तब्बू ने फोटो शेयरिंग प्लेटफ़ॉर्म पर फिल्म की कुछ यादगार झलकियाँ साझा करते हुए लिखा, "एक ऐसी रोमांटिक कहानी जिसने दिल जीत लिए, एक ऐसी कहानी जो समय की कसौटी पर खरी उतरी, और ऐसे गाने जो पीढ़ियों को मंत्रमुग्ध करते रहे हैं।" उन्होंने इसे 'निन्ने पेल्लाडाथा के सदाबहार जादू और तीन यादगार दशकों के खूबसूरत सफर का जश्न' बताया।
कमेंट सेक्शन में प्रशंसकों ने भी उनकी भावनाओं से खुद को जोड़ा। एक यूज़र ने लिखा, "ओह माय गॉड, 30 साल हो गए और मुझे अब भी इससे प्यार है", जबकि एक अन्य ने कहा कि यह उनकी अब तक की पसंदीदा फिल्मों में से एक है।
फिल्म की विरासत और पुरस्कार
'निन्ने पेल्लाडाथा' को निर्देशक कृष्णा वामसी ने लिखा और डायरेक्ट किया था, जबकि नागार्जुन ने इसे अन्नपूर्णा स्टूडियोज के बैनर तले निर्मित किया था। बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन के साथ साथ, इस फिल्म ने 1996 में 'तेलुगु में सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म' का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी जीता।
गौरतलब है कि इस फिल्म ने टॉलीवुड से परे भी अपनी छाप छोड़ी — इसे तमिल में 'उन्नय्ये कल्याणम पन्निकिरेन' नाम से डब किया गया और कन्नड़ में 'प्रीथसोद थप्पा' टाइटल से रीमेक भी बना।
स्टारकास्ट और तकनीकी टीम
फिल्म में नागार्जुन ने 'सीनू' और तब्बू ने 'महालक्ष्मी' उर्फ़ 'पांडु' का किरदार निभाया था। सहायक भूमिकाओं में चलपति राव, गिरी बाबू, चंद्र मोहन, आहुति प्रसाद, ब्रह्माजी, बनर्जी, रवि तेजा, सी.वी.एल. नरसिम्हा राव, जीवा, उत्तेज, पृथ्वीराज, लक्ष्मी, रमा प्रभा, मंजू भार्गवी, कविता, शानूर सना और रामाराजू जैसे कलाकार थे।
तकनीकी पक्ष पर, के. प्रसाद ने सिनेमेटोग्राफी और शंकर ने एडिटिंग संभाली थी। संदीप चौटा ने इस फिल्म के लिए संगीत तैयार किया, जो टॉलीवुड में उनका पहला काम था।
तीन दशकों की प्रासंगिकता
यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिण भारतीय सिनेमा की क्लासिक फिल्मों में नई पीढ़ी की रुचि फिर से बढ़ रही है और ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म पुराने टॉलीवुड कंटेंट को नई ऑडियंस तक पहुँचा रहे हैं। 'निन्ने पेल्लाडाथा' का तीन दशक बाद भी प्रशंसकों के दिलों में जीवित रहना, भारतीय क्षेत्रीय सिनेमा की उस कालजयी परंपरा का हिस्सा है जो भाषाई सीमाओं से परे जाती है।