तरुण चुघ का भगवंत मान सरकार पर हमला: पंजाब में व्हिसलब्लोअर हत्याएँ और नशा माफिया पर NIA-CBI जाँच की माँग
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राज्यसभा सांसद एवं पार्टी के केंद्रीय कार्यालय प्रभारी तरुण चुघ ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को पंजाब के संगरूर में मीडिया को संबोधित करते हुए भगवंत मान सरकार पर कड़े प्रहार किए। उन्होंने राज्य में व्हिसलब्लोअर की हत्याओं, पुलिस थानों पर ग्रेनेड हमलों और नशा माफिया की बेलगाम सक्रियता को लेकर मान सरकार को सीधे कठघरे में खड़ा किया। चुघ ने बटाला में नशा-विरोधी कार्यकर्ता विक्रमजीत की हत्या का उल्लेख करते हुए NIA और CBI से तत्काल जाँच कराने की माँग की।
मुख्य घटनाक्रम: व्हिसलब्लोअर की हत्याएँ
तरुण चुघ ने एक के बाद एक कई घटनाओं का ज़िक्र करते हुए कहा कि पंजाब में नशे की सप्लाई चेन के विरुद्ध आवाज़ उठाने वाले लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। उनके अनुसार, गुलजार सिंह ने यह उजागर किया कि उनके क्षेत्र में 'चिट्टा' बिकता है, जिसके बाद उन्हें इतना मजबूर किया गया कि उन्होंने आत्महत्या कर ली। एक अन्य व्यक्ति मोहनजीत को, चुघ के आरोप के अनुसार, पुलिस ने उठाकर माफिया का नाम न लेने की चेतावनी दी।
सबसे गंभीर मामले के रूप में उन्होंने 'झोटा' की हत्या का उल्लेख किया, जिसने स्वयं व्हिसलब्लोअर बनकर नशे की एक खेप पकड़ी थी। चुघ के अनुसार, झोटा को भरे बाज़ार में गोलियाँ मारकर सरेआम मार दिया गया, जबकि वह लगातार फोन पर मदद माँगता रहा और पुलिस समय पर नहीं पहुँची। झोटा के पिता ने कथित तौर पर आम आदमी पार्टी (AAP) के स्थानीय विधायक सिंगला पर इस हत्या में संलिप्तता का आरोप लगाया है, हालाँकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
बटाला में विक्रमजीत की हत्या
चुघ ने बताया कि बटाला में विक्रमजीत और उनके साथियों पर ड्रग माफिया ने हमला किया, जिसमें विक्रमजीत की हत्या कर दी गई। उनके अनुसार, विक्रमजीत का एकमात्र 'अपराध' यह था कि उन्होंने नशे की आपूर्ति रोकने और तस्करों के विरुद्ध आवाज़ उठाई थी। चुघ ने कहा कि आज पंजाब में पुलिस का काम आम नागरिक, समाजसेवी और स्वयंसेवक कर रहे हैं, जबकि सरकार उन्हें सुरक्षा देने की बजाय माफिया के रहमोकरम पर छोड़ रही है।
सरकार पर सीधे आरोप
चुघ ने पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा पर भी हमला बोला और आरोप लगाया कि वे माफिया के हितों की वकालत कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस व्यक्ति ने नशे की खेप पकड़वाई, उसकी हत्या हो गई, तो वित्त मंत्री किस माफिया को और क्यों बचाना चाहते हैं। चुघ ने मान सरकार द्वारा बुलाई गई 'हाई पावर मीटिंग' को केवल 'फिल्मी ड्रामा' करार दिया और कहा कि असल समस्या की जड़ पर प्रशासन की पकड़ पूरी तरह ढीली पड़ चुकी है।
यह ऐसे समय में आया है जब पंजाब में नशे के मुद्दे पर विपक्ष और सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) के बीच तनाव चरम पर है। गौरतलब है कि AAP ने 2022 के विधानसभा चुनाव में नशामुक्त पंजाब के वादे को प्रमुख मुद्दा बनाया था।
BJP का वादा और NIA-CBI जाँच की माँग
चुघ ने ऐलान किया कि BJP सत्ता में आने पर 31 दिसंबर 2029 तक पंजाब को नशामुक्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने केंद्रीय जाँच एजेंसियों — NIA (राष्ट्रीय जाँच एजेंसी) और CBI (केंद्रीय जाँच ब्यूरो) — से विक्रमजीत हत्याकांड की स्वतंत्र जाँच कराने की माँग की, ताकि दोषियों को कानून के कटघरे में लाया जा सके।
क्या होगा आगे
पंजाब में ग्रेनेड हमलों और टार्गेटेड किलिंग की घटनाओं ने राज्य की कानून-व्यवस्था को एक बार फिर राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है। विपक्ष की माँग के मद्देनज़र मान सरकार पर जवाबदेही का दबाव बढ़ता दिख रहा है। इन घटनाओं की सच्चाई और ज़िम्मेदारी तय करने के लिए न्यायिक या केंद्रीय जाँच की माँग आने वाले दिनों में और ज़ोर पकड़ सकती है।