टिहरी की ई-लाइब्रेरी में रोज़ाना 35-40 विद्यार्थी, CDO वरुणा अग्रवाल ने किया निरीक्षण

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टिहरी की ई-लाइब्रेरी में रोज़ाना 35-40 विद्यार्थी, CDO वरुणा अग्रवाल ने किया निरीक्षण

सारांश

टिहरी की ई-लाइब्रेरी पहाड़ी जिले के विद्यार्थियों के लिए उम्मीद की नई किरण बन रही है — 46 पंजीकृत छात्र, रोज़ाना 35-40 की उपस्थिति, और इंटरनेट सहित प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबें। CDO वरुणा अग्रवाल ने स्वयं सहायता समूह के साथ इसका निरीक्षण किया।

मुख्य बातें

मुख्य विकास अधिकारी वरुणा अग्रवाल ने 16 मई 2026 को टिहरी की ई-लाइब्रेरी का निरीक्षण किया।
ई-लाइब्रेरी में अब तक 46 विद्यार्थी पंजीकृत; प्रतिदिन 35 से 40 विद्यार्थी अध्ययन के लिए आते हैं।
लाइब्रेरी सुबह 6 बजे से शाम 7 बजे तक खुली रहती है; प्रतियोगी परीक्षाओं की पुस्तकें और इंटरनेट सुविधा उपलब्ध।
CDO ने स्वयं सहायता समूह का भी निरीक्षण किया; स्थानीय उत्पादों की बिक्री और महिला रोज़गार बढ़ाने का लक्ष्य।
यह पहल उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में पलायन रोकने और युवाओं को स्थानीय स्तर पर अवसर देने की दिशा में एक कदम मानी जा रही है।

उत्तराखंड के टिहरी जिले में स्थापित ई-लाइब्रेरी स्थानीय विद्यार्थियों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का प्रमुख केंद्र बनती जा रही है। शनिवार, 16 मई 2026 को मुख्य विकास अधिकारी (CDO) वरुणा अग्रवाल ने इस ई-लाइब्रेरी का स्थलीय निरीक्षण किया और व्यवस्थाओं का जायज़ा लिया। अब तक 46 विद्यार्थी पंजीकृत हो चुके हैं और प्रतिदिन 35 से 40 विद्यार्थी यहाँ अध्ययन के लिए आते हैं।

निरीक्षण का उद्देश्य

CDO वरुणा अग्रवाल ने निरीक्षण के दौरान यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि ई-लाइब्रेरी का संचालन निर्धारित नियमों के अनुरूप हो रहा है और किसी प्रकार की अनियमितता तो नहीं है। उन्होंने पाया कि विद्यार्थियों में अध्ययन को लेकर उत्साह बढ़ रहा है और जो छात्र यहाँ आते हैं, वे अपने साथियों को भी पढ़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

ई-लाइब्रेरी की सुविधाएँ

यह ई-लाइब्रेरी प्रतिदिन सुबह 6 बजे से शाम 7 बजे तक खुली रहती है। यहाँ सरकारी नौकरियों की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित पुस्तकें उपलब्ध हैं। इसके अतिरिक्त, लाइब्रेरी परिसर में इंटरनेट सुविधा भी है, जिससे छात्रों को ऑनलाइन अध्ययन सामग्री तक पहुँचने में कोई बाधा न हो।

स्वयं सहायता समूह का निरीक्षण

ई-लाइब्रेरी के अतिरिक्त CDO वरुणा अग्रवाल ने स्वयं सहायता समूह का भी निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि आगामी दिनों में स्वयं सहायता समूह के माध्यम से स्थानीय उत्पादों की बिक्री में वृद्धि होगी और समूह की आजीविका में सुधार आएगा। यह पहल महिला सशक्तीकरण से भी जुड़ी है, क्योंकि इससे महिलाओं के लिए रोज़गार के नए अवसर सृजित होने की संभावना है।

आम जनता पर असर

गौरतलब है कि टिहरी जैसे पहाड़ी और अपेक्षाकृत दूरस्थ जिले में डिजिटल अध्ययन सुविधा का उपलब्ध होना शिक्षा के क्षेत्र में एक सकारात्मक कदम है। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तराखंड में युवा रोज़गार और शिक्षा के बेहतर अवसरों की तलाश में पलायन करते हैं। स्थानीय स्तर पर इस तरह की सुविधाएँ इस प्रवृत्ति को कम करने में सहायक हो सकती हैं।

क्या होगा आगे

अधिकारियों के अनुसार, स्वयं सहायता समूह को सशक्त करने की दिशा में कदम और तेज़ किए जाएंगे। ई-लाइब्रेरी में पंजीकरण की संख्या बढ़ने के साथ सुविधाओं के विस्तार पर भी विचार किया जा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन केवल 46 पंजीकृत विद्यार्थी यह भी बताते हैं कि जागरूकता और पहुँच अभी सीमित है। असली परीक्षा यह होगी कि क्या यह सुविधा उन छात्रों तक पहुँच पाती है जो संसाधनों के अभाव में शहरों की ओर पलायन करते हैं। स्वयं सहायता समूह के साथ इसे जोड़ना एक समग्र सोच दर्शाता है, पर दीर्घकालिक प्रभाव के लिए नियमित निगरानी और बजटीय प्रतिबद्धता ज़रूरी होगी।
RashtraPress
16 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

टिहरी की ई-लाइब्रेरी क्या है और यह कहाँ स्थित है?
यह उत्तराखंड के टिहरी जिले में स्थापित एक डिजिटल पुस्तकालय है, जहाँ प्रतियोगी परीक्षाओं की पुस्तकें और इंटरनेट सुविधा उपलब्ध है। यह सुबह 6 बजे से शाम 7 बजे तक खुली रहती है।
टिहरी ई-लाइब्रेरी में कितने विद्यार्थी पंजीकृत हैं?
अब तक 46 विद्यार्थियों ने पंजीकरण कराया है और इनमें से प्रतिदिन 35 से 40 विद्यार्थी अध्ययन के लिए आते हैं।
CDO वरुणा अग्रवाल ने निरीक्षण में क्या पाया?
उन्होंने पाया कि विद्यार्थियों में अध्ययन के प्रति रुचि बढ़ रही है और संचालन नियमों के अनुरूप है। उन्होंने स्वयं सहायता समूह का भी निरीक्षण किया और स्थानीय उत्पादों की बिक्री तथा महिला रोज़गार बढ़ाने पर जोर दिया।
ई-लाइब्रेरी से किसे फायदा होगा?
मुख्य रूप से सरकारी नौकरियों की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को इसका लाभ मिलेगा। इसके साथ ही स्वयं सहायता समूह के माध्यम से महिलाओं के लिए रोज़गार के अवसर भी सृजित होने की उम्मीद है।
उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में इस तरह की ई-लाइब्रेरी क्यों ज़रूरी है?
पहाड़ी और दूरस्थ क्षेत्रों में शिक्षा संसाधनों की कमी के कारण युवा रोज़गार और पढ़ाई के लिए शहरों की ओर पलायन करते हैं। स्थानीय स्तर पर डिजिटल अध्ययन सुविधा इस पलायन को कम करने और युवाओं को उनके क्षेत्र में ही अवसर देने में सहायक हो सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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