तेज प्रताप यादव ने लौटाई सुरक्षा, बोले — 'कुछ हुआ तो बिहार CM जिम्मेदार'; खान सर पर लगाए गंभीर आरोप
सारांश
मुख्य बातें
जनशक्ति जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार सरकार में पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव ने 15 जून 2026 को पटना पहुँचते ही अपनी समस्त सुरक्षा व्यवस्था लौटा दी और चेतावनी दी कि उनके साथ किसी भी अनहोनी की जिम्मेदारी बिहार के मुख्यमंत्री की होगी। इसके साथ ही उन्होंने पटना के शिक्षक रौशन आनंद के भाई की मौत के मामले में खान सर की भूमिका की जाँच की माँग करते हुए उन पर गंभीर आरोप लगाए।
सुरक्षा वापसी का घटनाक्रम
बताया जा रहा है कि बिहार सरकार ने लालू परिवार को दी गई सुरक्षा वापस लेने का निर्णय पहले ही ले लिया था। तेज प्रताप यादव बिहार से बाहर रहने के कारण उन्हें एक सुरक्षाकर्मी की तैनाती प्राप्त थी। पटना लौटते ही उन्होंने स्वयं वह सुरक्षा भी लौटा दी।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि लोकतंत्र में विपक्षी नेताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार का संवैधानिक दायित्व है। उनके अनुसार, किसी भी अप्रिय घटना की जवाबदेही अब पूरी तरह सरकार पर होगी।
मुख्यमंत्री को सीधी चेतावनी
मीडिया से बातचीत में तेज प्रताप यादव ने कहा, 'मैं बाहर था, मेरे पास एक सुरक्षा थी, मैंने वह भी वापस कर दी है। हमें अब कोई सुरक्षा नहीं चाहिए।' उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि उन्हें कुछ भी होता है तो उसके लिए बिहार के मुख्यमंत्री व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में विपक्षी नेताओं की सुरक्षा को लेकर राजनीतिक तनाव पहले से बढ़ा हुआ है।
खान सर पर आरोप
तेज प्रताप यादव ने रौशन आनंद के भाई की मौत के मामले में खान सर की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस मामले की निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए। उन्होंने दावा किया, 'खान सर की पहुँच कहाँ-कहाँ तक है, हम सब जानते हैं। वह किस-किस से मिले हुए हैं, मेरे पास फोटो-वीडियो प्रूफ है।'
गौरतलब है कि तेज प्रताप यादव के अनुसार उन्होंने इस मामले में पहले भी सोशल मीडिया पर पोस्ट और सार्वजनिक बयान दिए थे, जिसके बाद रौशन आनंद की रिहाई हो गई। उन्होंने कहा कि वे अपने बयान पर अब भी कायम हैं।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
यह मामला बिहार की राजनीति में उस वक्त सामने आया है जब सत्तारूढ़ गठबंधन और विपक्ष के बीच तनातनी चरम पर है। बिहार सरकार का लालू परिवार की सुरक्षा वापस लेने का कदम विपक्ष की नजर में राजनीतिक प्रतिशोध के रूप में देखा जा रहा है, जबकि सरकार इसे नियमित प्रशासनिक समीक्षा बता रही है।
आगे क्या
अब देखना यह होगा कि बिहार सरकार तेज प्रताप यादव की चेतावनी पर क्या प्रतिक्रिया देती है और खान सर के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जाँच की माँग को लेकर कोई औपचारिक कदम उठाया जाता है या नहीं। यह विवाद आने वाले दिनों में बिहार की राजनीतिक सरगर्मी को और तेज कर सकता है।