क्या पहले विधानसभा सत्र में गायब हो गए तेजस्वी? एक-दो सीटें कम होतीं तो नहीं बन पाते नेता प्रतिपक्ष: संजय सरावगी

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क्या पहले विधानसभा सत्र में गायब हो गए तेजस्वी? एक-दो सीटें कम होतीं तो नहीं बन पाते नेता प्रतिपक्ष: संजय सरावगी

सारांश

बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने तेजस्वी यादव की विधानसभा में अनुपस्थिति पर सवाल उठाया है। उन्होंने विपक्ष की स्थिति को कमजोर बताया और कहा कि यह दल मुद्दों से भटक रहा है। आइए जानते हैं उनके बयान के पीछे की पूरी कहानी।

Key Takeaways

  • तेजस्वी यादव की विधानसभा में अनुपस्थिति ने विपक्ष की स्थिति को कमजोर किया।
  • संजय सरावगी ने भाजपा के विरोध के पीछे की राजनीति को उजागर किया।
  • विपक्ष की ओर से कोई ठोस मुद्दा नहीं है।
  • सरकार के कार्यों का विरोध करना विपक्ष का एक रणनीति बन गई है।
  • भाजपा का यह दृष्टिकोण विपक्ष को और कमजोर करने का प्रयास है।

नई दिल्ली, 27 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने विपक्ष द्वारा एसआईआर को लेकर लगाए गए आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि इसी मुद्दे पर राहुल गांधी ने यात्रा निकाली थी। बिहार चुनाव में कितने लोगों ने कहा कि उनका नाम मतदाता सूची में नहीं है।

संजय सरावगी ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में बताया कि विपक्ष के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं है। ये चाहते हैं कि बांग्लादेशी और रोहिंग्या लोगों के नाम वोटर लिस्ट में बने रहें, जो असंभव है। जो लोग यहां से स्थायी रूप से पलायन कर चुके हैं या जिनकी मृत्यु हो चुकी है, उनका नाम हटाना चुनाव आयोग की प्रक्रिया है।

उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं और सरकार के सही कार्य का विरोध करना विपक्ष का काम बन गया है। यही वजह है कि यह दल खत्म हो रहे हैं। ये भाजपा का विरोध करते-करते भारत का विरोध करने लगे हैं, जिससे इनका अस्तित्व संकट में है। बिहार में भी यही हुआ। कांग्रेस के मंच से पीएम मोदी के लिए अपशब्द कहे गए, उनकी क्या गलती थी?

उन्होंने कहा कि जब आप मुद्दों से भटकेंगे और अपशब्दों का प्रयोग करेंगे तो आपका राजनीतिक अस्तित्व समाप्त होना तय है, बिहार में भी यही हुआ। बंगाल में एसआईआर हो रहा है, बांग्लादेशियों के नाम काटे जाने से घबराहट क्यों हो रही है? अगर कोई पश्चिम बंगाल का निवासी है और उसका वोट कट गया है, तब बोलें, तब तो ठीक है।

तेजस्वी यादव के सदन में अनुपस्थित रहने पर उन्होंने कहा कि यह सरकार बनने के बाद पहला विधानसभा सत्र था, जिसमें वह गायब रहे। नेता प्रतिपक्ष की भूमिका महत्वपूर्ण होती है और यह पहले ही सत्र में अनुपस्थित रहे। ये राजनीतिक कोमा में हैं। अगर एक-दो सीटें और कम हो जातीं, तो ये नेता प्रतिपक्ष की भूमिका में भी नहीं रहते।

उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि जनता ने अगर आपको नकार दिया है, तो कम से कम नेता प्रतिपक्ष की भूमिका में तो रहना चाहिए। कहां गए हैं, कुछ पता नहीं। उनके पोस्टर लगाए जा रहे हैं कि वे भागे हुए हैं। ये सभी लोग बिहार से गायब हैं।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बनने पर उन्होंने कहा कि मैं पार्टी का एक सामान्य कार्यकर्ता रहा हूं। संघ की पाठशाला से प्राथमिक शिक्षा मुझे मिली। विद्यार्थी परिषद, महामंडल और युवा मोर्चा में काम किया है। छह बार पार्टी ने मुझे मैदान में उतारा और हर बार चुनाव जीता। अब पार्टी ने प्रदेश की जिम्मेदारी दी है। दिल्ली में शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात कर आभार व्यक्त करूंगा और मार्गदर्शन प्राप्त करूंगा।

Point of View

यह भाजपा को और मजबूत बनाता है।
NationPress
12/02/2026

Frequently Asked Questions

तेजस्वी यादव ने विधानसभा सत्र में क्यों भाग नहीं लिया?
तेजस्वी यादव पहले विधानसभा सत्र में अनुपस्थित रहे, जिससे विपक्ष की स्थिति कमजोर हुई है।
संजय सरावगी का बयान किस संदर्भ में है?
संजय सरावगी ने विपक्ष के आरोपों और तेजस्वी यादव की अनुपस्थिति को लेकर बयान दिया है।
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