टीजीएसआरटीसी हड़ताल: ड्राइवर शंकर गौड़ की मौत पर तेलंगाना सरकार का बड़ा फैसला, परिवार को मिलेंगे 10 लाख और घर
सारांश
Key Takeaways
- शंकर गौड़ ने 24 अप्रैल को वारंगल के नरसंपेट डिपो में टीजीएसआरटीसी हड़ताल के दौरान आत्मदाह किया और हैदराबाद के अपोलो डीआरडीओ अस्पताल में उनकी मृत्यु हो गई।
- तेलंगाना सरकार ने परिवार को 10 लाख रुपए की आर्थिक सहायता, इंदिरम्मा योजना के तहत मकान और एक सदस्य को नौकरी देने का ऐलान किया।
- परिवहन मंत्री पोन्नम प्रभाकर ने जेएसी नेताओं से शांतिपूर्ण अंतिम संस्कार सुनिश्चित करने और विपक्ष से राजनीतिकरण न करने की अपील की।
- शंकर गौड़ ने नरसंपेट डिपो में 22 वर्षों तक बस चालक के रूप में सेवा दी थी और आत्मदाह के समय वे 80 प्रतिशत तक जल गए थे।
- केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बी. संजय कुमार मुथोजिपेट पहुंचे और पुलिस की कार्रवाई की आलोचना करते हुए परिवार की इच्छाओं का सम्मान करने की मांग की।
- बीआरएस और भाजपा दोनों विपक्षी दलों ने मृतक परिवार और टीजीएसआरटीसी कर्मचारियों के प्रति एकजुटता व्यक्त की।
शंकर गौड़ की मौत और सरकार की घोषणा
हैदराबाद, 24 अप्रैल: तेलंगाना स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (टीजीएसआरटीसी) की चल रही हड़ताल के दौरान आत्मदाह करने वाले बस चालक शंकर गौड़ की मौत के बाद तेलंगाना सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने पीड़ित परिवार को 10 लाख रुपए की आर्थिक सहायता, 'इंदिरम्मा योजना' के तहत एक मकान और परिवार के एक योग्य सदस्य को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की है।
परिवहन मंत्री पोन्नम प्रभाकर ने यह ऐलान करते हुए टीजीएसआरटीसी कर्मचारियों की ज्वाइंट एक्शन कमेटी (जेएसी) के नेताओं से अपील की कि वे अंतिम संस्कार शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने में सहयोग करें। उन्होंने विपक्षी दलों से भी इस संवेदनशील मुद्दे का राजनीतिकरण न करने का आग्रह किया।
घटना का पूरा घटनाक्रम
शंकर गौड़ ने गुरुवार, 24 अप्रैल को वारंगल जिले के नरसंपेट डिपो में विरोध प्रदर्शन के दौरान खुद को आग लगा ली थी। वे 80 प्रतिशत तक जल गए थे और शुक्रवार तड़के हैदराबाद के अपोलो डीआरडीओ अस्पताल में उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।
शंकर गौड़ ने नरसंपेट डिपो में 22 वर्षों तक बतौर बस चालक सेवाएं दी थीं। उनके साथी कर्मचारी उन्हें अंतिम विदाई देना चाहते थे, जिससे एक भावनात्मक और कानून-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हुई।
पार्थिव शरीर को लेकर तनाव और पुलिस की भूमिका
परिवार के सदस्यों और टीजीएसआरटीसी कर्मचारियों ने शंकर गौड़ के पार्थिव शरीर को नरसंपेट डिपो ले जाकर श्रद्धांजलि देने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इससे नरसंपेट मंडल के मुथोजिपेट इलाके में तनाव का माहौल बन गया।
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बी. संजय कुमार भी मुथोजिपेट पहुंचे और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने वारंगल के पुलिस कमिश्नर से बातचीत करते हुए कहा कि शंकर गौड़ ने इस डिपो में 22 साल सेवा की थी और उनके सहयोगियों को श्रद्धांजलि देने का अधिकार मिलना चाहिए।
अंततः पुलिस अधिकारियों ने परिवार और जेएसी नेताओं के साथ बातचीत की। परिवार ने पार्थिव शरीर को डिपो ले जाए बिना ही अंतिम संस्कार करने पर सहमति दे दी, जिससे स्थिति शांत हो गई।
विपक्ष की प्रतिक्रिया और राजनीतिक समर्थन
भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं ने मृतक के परिवार और टीजीएसआरटीसी कर्मचारियों के प्रति एकजुटता दिखाई। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बी. संजय कुमार ने पुलिस अधिकारियों से मृतक के परिवार की इच्छाओं का सम्मान करने की अपील की।
परिवहन मंत्री ने विपक्ष को इस त्रासदी को राजनीतिक रंग देने से बचने की सलाह दी और कहा कि यह समय परिवार के साथ खड़े होने का है, न कि राजनीति करने का।
गहरा संदर्भ: टीजीएसआरटीसी हड़ताल की पृष्ठभूमि
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब टीजीएसआरटीसी कर्मचारी वेतन वृद्धि, सेवा शर्तों में सुधार और अन्य मांगों को लेकर लंबे समय से हड़ताल पर हैं। गौरतलब है कि सरकारी परिवहन निगमों में कर्मचारी असंतोष केवल तेलंगाना तक सीमित नहीं है — देशभर में सरकारी बस सेवाओं के कर्मचारी वेतन विसंगतियों और निजीकरण के भय से जूझ रहे हैं।
शंकर गौड़ की आत्मदाह की घटना इस बात की गंभीर चेतावनी है कि कर्मचारी असंतोष को नजरअंदाज करने के क्या परिणाम हो सकते हैं। 10 लाख रुपए की सहायता और घर-नौकरी का ऐलान सरकार की त्वरित प्रतिक्रिया तो है, लेकिन असली सवाल यह है कि टीजीएसआरटीसी की मूल मांगें कब और कैसे पूरी होंगी।
आने वाले दिनों में जेएसी और सरकार के बीच वार्ता के नतीजे तय करेंगे कि यह हड़ताल समाप्त होती है या और उग्र रूप लेती है। तेलंगाना की कांग्रेस सरकार के लिए यह राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों ही दृष्टि से एक बड़ी परीक्षा है।