क्या थकान और सांस फूलना सामान्य से ज्यादा है? यह एनीमिया का संकेत हो सकता है!

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क्या थकान और सांस फूलना सामान्य से ज्यादा है? यह एनीमिया का संकेत हो सकता है!

सारांश

क्या आप थकान और सांस फूलने की समस्या से परेशान हैं? यह न केवल शरीर को कमजोर करता है, बल्कि मानसिक ऊर्जा और कार्यक्षमता पर भी असर डालता है। जानिए इसके लक्षण और उपचार के आयुर्वेदिक तरीके।

Key Takeaways

  • रक्ताल्पता के लक्षणों को पहचानें।
  • आयुर्वेदिक उपचारों का सहारा लें।
  • जीवनशैली में सुधार करें।
  • संतुलित आहार का सेवन करें।
  • योग और प्राणायाम को अपनाएं।

नई दिल्ली, 30 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। यदि आप बार-बार थकान, चक्कर, सांस फूलना या चेहरे पर पीलापन का अनुभव कर रहे हैं, तो यह रक्ताल्पता (एनीमिया) का संकेत हो सकता है। चिकित्सा की दृष्टि से इसे हीमोग्लोबिन की कमी कहा जाता है, जबकि आयुर्वेद में इसे पाण्डु रोग के नाम से जाना जाता है। यह न केवल शरीर को कमजोर करता है, बल्कि मानसिक ऊर्जा, कार्यक्षमता और रोग प्रतिरोधक क्षमता पर भी प्रभाव डालता है।

रक्ताल्पता का अर्थ है शरीर में लाल रक्त कणिकाओं या हीमोग्लोबिन की कमी होना। हीमोग्लोबिन का मुख्य कार्य शरीर में ऑक्सीजन पहुँचाना है। जब इसकी मात्रा कम हो जाती है, तो अंगों तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुँच पाती और व्यक्ति थकान और कमजोरी महसूस करता है। आयुर्वेद के अनुसार, पाण्डु रोग में शरीर का रंग पीला होता है, हृदय की धड़कन तेज रहती है और व्यक्ति आलस्य का अनुभव करता है।

रक्ताल्पता के लक्षणों में चेहरे और होंठों का पीला होना, चक्कर आना, जल्दी थक जाना, हृदय की तेज धड़कन, हाथ-पाँव ठंडे रहना, सांस फूलना, बालों का झड़ना और नाखूनों का टूटना शामिल हैं। इसके मुख्य कारणों में आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन बी12 की कमी, बार-बार होने वाला रक्तस्राव, खराब पाचन, कृमि रोग, अत्यधिक तनाव और असंतुलित जीवनशैली शामिल हैं। आयुर्वेद का कहना है कि जब पाचन अग्नि कमजोर होती है, तो पोषक तत्व शरीर तक सही ढंग से नहीं पहुँच पाते, जिससे रक्त उत्पादन कम हो जाता है।

रक्ताल्पता को ठीक करने के लिए कई आयुर्वेदिक घरेलू उपाय हैं। रोज सुबह खाली पेट आंवले का रस पीने से विटामिन सी मिलता है और आयरन का अवशोषण बढ़ता है। गुड़ और तिल के लड्डू खाएं, पालक, मेथी, चौलाई और सरसों के पत्तों का सूप लें। रात को मुनक्का और खजूर भिगोकर सुबह खाएं। अश्वगंधा और शतावरी का दूध के साथ सेवन करने से रक्त उत्पादन बढ़ता है। चुकंदर और गाजर का रस पीना भी लाभदायक है। गिलोय और पुनर्नवा जैसी जड़ी-बूटियां रक्त को शुद्ध करती हैं और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती हैं।

जीवनशैली में सुधार भी आवश्यक है। समय पर हल्का और पचने योग्य भोजन करें, दूध, दही, हरी सब्जियां और फल शामिल करें, देर रात तक जागने से बचें और पर्याप्त नींद लें। योग और प्राणायाम जैसे अनुलोम विलोम और कपालभाति रक्त संचार को बेहतर बनाते हैं।

Point of View

बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। हमें इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और उचित उपचार की दिशा में कदम उठाने की आवश्यकता है।
NationPress
30/11/2025

Frequently Asked Questions

रक्ताल्पता क्या है?
रक्ताल्पता शरीर में लाल रक्त कणिकाओं या हीमोग्लोबिन की कमी को दर्शाता है।
रक्ताल्पता के लक्षण क्या हैं?
इसके लक्षणों में थकान, चक्कर, सांस फूलना और चेहरे का पीला होना शामिल हैं।
रक्ताल्पता का इलाज कैसे करें?
आयरन और विटामिन की कमी को पूरा करने के लिए संतुलित आहार लें और आयुर्वेदिक उपाय अपनाएं।
क्या आयुर्वेदिक उपाय प्रभावी हैं?
जी हां, आयुर्वेदिक उपाय जैसे आंवला का रस, गुड़ और तिल के लड्डू, और गिलोय रक्ताल्पता में मदद कर सकते हैं।
जीवनशैली में क्या बदलाव करें?
हल्का भोजन करें, योग और प्राणायाम करें, और पर्याप्त नींद लें।
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